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Yamuna Nagar News: घरों व पंडालों में विराजमान होने को तैयार गणपति
Mon, 02 Sep 2024 03:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 02 Sep 2024 03:47 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। इस बार गणपति उत्सव की बड़े स्तर तैयारियां हो रही हैं। पंडालों की संख्या व उनमें विराजमान होने के लिए तैयार गणपति मूर्तियों के आकार भी बढ़े हैं। जिले में छोटे-बड़े करीब 250 गणपति पंडाल लगने का अनुमान है। सेक्टर-17 समीप जिमखाना क्लब रोड किनारे बसे मूर्तिकारों के पास लगातार बड़े आकार की मूर्तियों के ऑर्डर आ रहे हैं।
अभी गणपति उत्सव शुरू होने में छह दिन शेष है, उसमें भी नए ऑर्डर के साथ मूर्तियों की सीधी खरीद होगी। शहर की कॉलोनियों-मोहल्लों से लेकर गांवों तक में पांच से 11 फीट ऊंची गणपति की मूर्तियां पंडालों में विराजमान होंगी। साथ ही छोटे आकार की मूर्तियों को लोग घरों में स्थापित करेंगे, जो अभी से मूर्तियां पसंद करने पहुंच रहे हैं।
गणेश चतुर्थी इस बार सात सितंबर को है। गणपति उत्सव के लिए एक माह पहले से धार्मिक, सामाजिक संगठनों सहित कॉलोनियों-मोहल्लों के बने युवा क्लब तैयारी में लगे हैं। कई संगठन व क्लब गणपति उत्सव के लिए आसपास के लोगों से चंदा जुटा रहे हैं, जिससे पंडालों में सुबह-शाम की आरती के साथ प्रसाद वितरण, चौकी, झांकियां व जागरण जैसे आयोजन हो सकें।
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कई वर्षों से गणपति पंडाल लगाकर उत्सव मना रहे संगठनों व क्लबों की ओर से सात से 17 सितंबर तक के कार्यक्रम का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है, जिसके बैनर व पोस्टर आसपास दीवारों पर लगा दिए गए हैं। इसके मुताबिक सात से 16 सितंबर तक पंडालों में सुबह-शाम गणपति आरती के अलावा गायकों के जरिए भजन संध्या, जागरण प्रस्तावित हैं। 17 सितंबर को पंडालों से पूजन व शोभायात्रा के साथ गणपति की मूर्तियों का विसर्जन किया जाना है।
बड़े-छोटे आकार की हजारों मूर्तियां तैयार
मूर्तिकार शंकर व श्रवण ने बताया कि उनके सहित सेक्टर-17 समीप जिमखाना क्लब रोड किनारे बसे मूर्तिकारों ने इस बार करीब पांच हजार गणपति की मूर्तियां तैयार की हैं। आधे फीट की मूर्ति 150-200 रुपये की है। सबसे बड़ी मूर्ति 10-11 फीट की है, जो 15-16 हजार रुपये की है। छोटे आकार की मूर्तियां लोग घरों और बड़ी पंडालों में स्थापित करने के लिए ले जाते हैं। पंडालों के लिए 250 मूर्तियां बनाई गई हैं, जो पांच फीट से 11 फीट ऊंची हैं। जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा अन्य जिलों से भी लोग उनकी बनाई मूर्तियां लेकर जाते हैं, जिसके ऑर्डर आ रहे हैं।
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यमुनानगर। इस बार गणपति उत्सव की बड़े स्तर तैयारियां हो रही हैं। पंडालों की संख्या व उनमें विराजमान होने के लिए तैयार गणपति मूर्तियों के आकार भी बढ़े हैं। जिले में छोटे-बड़े करीब 250 गणपति पंडाल लगने का अनुमान है। सेक्टर-17 समीप जिमखाना क्लब रोड किनारे बसे मूर्तिकारों के पास लगातार बड़े आकार की मूर्तियों के ऑर्डर आ रहे हैं।
अभी गणपति उत्सव शुरू होने में छह दिन शेष है, उसमें भी नए ऑर्डर के साथ मूर्तियों की सीधी खरीद होगी। शहर की कॉलोनियों-मोहल्लों से लेकर गांवों तक में पांच से 11 फीट ऊंची गणपति की मूर्तियां पंडालों में विराजमान होंगी। साथ ही छोटे आकार की मूर्तियों को लोग घरों में स्थापित करेंगे, जो अभी से मूर्तियां पसंद करने पहुंच रहे हैं।
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गणेश चतुर्थी इस बार सात सितंबर को है। गणपति उत्सव के लिए एक माह पहले से धार्मिक, सामाजिक संगठनों सहित कॉलोनियों-मोहल्लों के बने युवा क्लब तैयारी में लगे हैं। कई संगठन व क्लब गणपति उत्सव के लिए आसपास के लोगों से चंदा जुटा रहे हैं, जिससे पंडालों में सुबह-शाम की आरती के साथ प्रसाद वितरण, चौकी, झांकियां व जागरण जैसे आयोजन हो सकें।
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कई वर्षों से गणपति पंडाल लगाकर उत्सव मना रहे संगठनों व क्लबों की ओर से सात से 17 सितंबर तक के कार्यक्रम का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है, जिसके बैनर व पोस्टर आसपास दीवारों पर लगा दिए गए हैं। इसके मुताबिक सात से 16 सितंबर तक पंडालों में सुबह-शाम गणपति आरती के अलावा गायकों के जरिए भजन संध्या, जागरण प्रस्तावित हैं। 17 सितंबर को पंडालों से पूजन व शोभायात्रा के साथ गणपति की मूर्तियों का विसर्जन किया जाना है।
बड़े-छोटे आकार की हजारों मूर्तियां तैयार
मूर्तिकार शंकर व श्रवण ने बताया कि उनके सहित सेक्टर-17 समीप जिमखाना क्लब रोड किनारे बसे मूर्तिकारों ने इस बार करीब पांच हजार गणपति की मूर्तियां तैयार की हैं। आधे फीट की मूर्ति 150-200 रुपये की है। सबसे बड़ी मूर्ति 10-11 फीट की है, जो 15-16 हजार रुपये की है। छोटे आकार की मूर्तियां लोग घरों और बड़ी पंडालों में स्थापित करने के लिए ले जाते हैं। पंडालों के लिए 250 मूर्तियां बनाई गई हैं, जो पांच फीट से 11 फीट ऊंची हैं। जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा अन्य जिलों से भी लोग उनकी बनाई मूर्तियां लेकर जाते हैं, जिसके ऑर्डर आ रहे हैं।