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Yamuna Nagar News: नवरात्रि 19 से , पालकी में सवार होकर आएंगी माता रानी

Sun, 15 Mar 2026 02:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 15 Mar 2026 02:55 AM IST
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From Navratri 19, Mata Rani will come riding in a palanquin.
जगाधरी। चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ इस बार 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं। इनका समापन 27 मार्च को होगा। चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि से ही नया हिंदी नववर्ष प्रारंभ होता है। इस बार पूरे नौ दिनों की नवरात्रि रहेगी। इस बार माता रानी पालकी में सवार होकर आएंगी और उनकी प्रस्थान हाथी पर होगा। वहीं, नवरात्रि पर मां की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होंगे और परिवार में सुख-समृद्धि आएगी। घट स्थापना के लिए सुबह छह बजकर 52 मिनट से सात बजकर 43 मिनट तक का मुहूर्त अत्यंत शुभ होगा।
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ज्योतिषाचार्य पंडित ललित शर्मा ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना की जाएगी। घट स्थापना उदया तिथि के अनुसार 19 मार्च को ही की जाएगी। चूंकि प्रतिपदा सुबह 6:52 मिनट पर प्रारंभ होगी और समापन 20 मार्च भोर में 4:52 मिनट पर होगा। इस बार पहले दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, शुक्ल योग का संयोग बन रहा है। इस दौरान द्विस्वभाव मीनलग्न प्रातः 06:52 से 07:43 बजे तक रहेगा। इसके बाद मिथुनलग्न प्रातः 11:24 से दोपहर 01:38 बजे तक और शुभ चौघड़िया प्रातः 06:54 से प्रातः 08:05 बजे तक रहेगा। वहीं, अमृत का चौघड़िया प्रातः वकः 8:40 से दोपहर 03:32 बजे तक रहेगा। वहीं, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि इस दौरान कलश स्थापित पहला शुभ मुहूर्त प्रात: 06 बजकर 52 मिनट से सुबह 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। उन्होंने कहा कि पहला मुहूर्त घट स्थापना के लिए अत्यंत शुभ रहेगा।
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इस तरह करेंगे घट स्थापना व पूजन

पंडित रमन शर्मा ने बताया कि पहले दिन एक साफ चौकी पर माता रानी की मूर्ति स्थापित करें। मां को लाल रंग की नई चुनरी ओढ़ाएं। इसके बाद मां को अन्य श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें और उन्हें इत्र लगाएं। एक थाली में रोली और अक्षत का टीका बनाकर माता रानी को लगाएं। इसके बाद साफ लोटे या घट यानी घड़े में जल भरकर उस पर नारियल चुनरी में बांधकर रखें और कलश स्थापित करें। कलश का तिलक करें और फूल माला पहनाएं। मां को फूलों की माला पहनाएं और सूखे मेवे पूजा में भोग में अर्पित करें। मां दुर्गा के नामों का जाप और फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। देवी की परिवार संग आरती करें और फल मिठाई भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांट दें।
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