चार सौ गांवों में बिजली, पानी के लिए हाहाकार

यमुनानगर Updated Thu, 23 Jan 2014 12:43 AM IST
कर्मचारियों की हड़ताल के चलते दिनभर जिले में बिजली और पानी के लिए हाहाकार रहा। बिजली निगम में कर्मचारियों की हड़ताल जहां शत प्रतिशत रही।

पब्लिक हेल्थ विभाग की लाज ठेकेदार के कर्मचारियों ने बचा ली। लेकिन बिजली सप्लाई न होने से नलकूप चल ही नहीं पाए, जिससे ठेकेदार के कर्मचारी भी चाह कर भी स्थिति को नहीं संभाल पाए। हड़ताल के चलते अधिकारियों को गाड़ी चलाने के ड्राइवर तक की भी दिक्कत आई।

बिजली निगम के 332 में से करीब 80 फीडर दिनभर ब्रेक डाउन रहे। सुबह छह बजे से पहले जहां करीब 30 फीडर ब्रेक डाउन थे। लेकिन बारिश ने जले पर नमक छिड़कने का काम किया। बारिश की वजह से इनकी संख्या 80 हो गई। सबसे ज्यादा दिक्कत छछरौली, बिलासपुर और सढौरा में पेश आई। 80 में से करीब 50 फीडर इन्हीं क्षेत्रों के हैं। कार्यालयों में दिनभर बिजली समस्या को लेकर फोन घनघनाते रहे।

लेकिन फोन सुनने के लिए भी बिजली कार्यालय में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। बिजली निगम के सबडिवीजन कार्यालय से लेकर एसई कार्यालय में कर्मचारी देखने को भी नहीं मिले। सिर्फ एसडीओ या अन्य अधिकारी ही कुछ देर के लिए कार्यालय में पहुंचे। वे भी सिर्फ फीडरों की रिपोर्ट हेडक्वार्टर में भेजने के लिए। पब्लिक हेल्थ में 520 कर्मचारियों में से दूसरे दिन 169 कर्मचारी हड़ताल पर रहे।

पब्लिक हेल्थ के जिले में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में 705 नलकूप हैं। विभाग के 169 कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से इसकी जगह ठेकेदार के कर्मचारी नलकूपों पर तैनात रहेष लेकिन बिजली न आने से वे भी बेबस दिखे। घरों में पानी न पहुंचने से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बिगड़ गई। हड़ताल के चलते घरों में न बिजली पहुंची और न ही पानी। मंगलवार को तो जैसे तैसे कर लोगों ने काम चला लिया। लेकिन बुधवार को स्थिति भयानक हो गई और माना जा रहा है अगर हालात नहीं सुधरे तो वीरवार को और अधिकारियों के सामने बड़ी दिक्कत आ सकती है।

और ड्राइवर का इंतजाम कर चलवाई गाड़ी
हड़ताल को लेकर जहां लोगों को दिक्कतों से दोचार होना पड़ रहा है, तो वहीं अधिकारियोें के लिए भी दिक्कत कम नहीं है। बुधवार को बिजली निगम के एसई को ड्राइवर तक नहीं मिला। इससे उन्हें गाड़ी चलाने के लिए इधर-उधर से ड्राइवर का इंतजाम करना पड़ा। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि हड़ताल लोगों के साथ-साथ अधिकारियों पर भी भारी पड़ रही है।

आउटसोर्सिंग से भी नहीं जुट पाए कर्मचारी
अधिकारी हड़ताल को बेअसर करने के लिए आउटसोर्सिंग से कर्मचारी जुटाने के लिए जीजान में लगे रहे। लेकिन बिजली निगम के अधिकारी आउटसोर्सिंग से भी कर्मचारी न जुटा पाए। प्रतिदिन जहां बिजली व्यवस्था को सुचारु करने के लिए 1500 के करीब कर्मचारी काम करते थे, वहीं हड़ताल में इनमें से 15 से 20 कर्मचारी ही काम पर रहे और 100 के करीब कर्मचारी ठेकेदारों की तरफ से लगाए गए थे। लेकिन उन्हें फीडर संबंधी जानकारी न होने से वे भी कुछ नहीं कर पाए। हड़ताल संबंधी रिपोर्ट जिला प्रशासन और हेडक्वार्टर को देने के लिए अधिकारियों को खुद काम करना पड़ा।

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