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सरकारी विभागों तक फाइनेंसरों की पहुंच, चंगुल में फंसे हैं सैकड़ों कर्मचारी
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शहर के अवैध फाइनेंसरों के चंगुल में रेहड़ी, ठेली, फड़ी वाले, मजदूर, फैक्टरी वर्कर्स के साथ सरकारी विभाग के सैकड़ों कर्मचारी भी फंसे हुए हैं। कर्मचारी की हर महीने की जायज कमाई का बड़ा भाग ये फाइनेंसर नाजायज रूप से ले लेते हैं। वेतन के दिन ये फाइनेंसर एटीएम पर दर्जनों कार्ड के साथ मिलते हैं। कर्मचारी को पता भी नहीं होता कि उससे पहले ही खाते में से वेतन निकाल लिया जाता है। इन फाइनेंसरों की पहुंच सरकारी कार्यालयों के अंदर तक है। जिससे इन्हें एकाउंट में सैलरी आने का समय तक का पता चल जाता है। अपने इन सूत्रों का प्रयोग करके फाइनेंसर कर्मचारी के आने से पहले ही उसका पूरा वेतन निकाल लेता है। इन कर्मचारियों को कर्ज देने से पहले ही सूदखोर उनके एटीएम कार्ड, पास बुक, पेंशन बुक, चैक बुक अपने पास रख लेते हैं। जरूरतमंद कर्मचारी फाइनेंसर के जाल में फंसे के फंसे रह जाते हैं।
अमर उजाला की पड़ताल में इन सूदखोरों का एक और नया जाल सामने आया है। इन सूदखोरों की पहुंच गली, नुक्कड़ और थानों तक ही नहीं है। बल्कि सरकारी कार्यालयों के अंदर तक इन फाइनेंसरों ने अपनी जड़े फैलाई हुए हैं। पड़ताल में पता चला है कि जगाधरी रेलवे वर्कशॉप के सैकड़ों कर्मचारी इन सूदखोरों के चंगुल में फंसे हुए है। रेलवे वर्कशॉप के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की इसमें बड़ी संख्या है। वहीं इसमें लिपिक जैसे कर्मचारी भी शोषण का शिकार हो रहे हैं। यदि आवाज उठाने की कौशिक कोई करता है, तो आलाअधिकारियों सहित चैक व स्टांप का डर दिखाकर चुप करवा दिया जाता है।
हर माह चलता है यह खेल
एक रेलवे कर्मचारी ने बताया कि एक दो नहीं करीब बीस से ज्यादा छोटे बड़े सूदखोर वर्कशॉप में अपनी जड़े गड़ाए हुए हैं। जरूरतमंद लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें कर्ज देकर सालों लूटा जा रहा है। कर्मचारी का कहना है कि जब तक इसमें प्रशासन की कार्रवाई न होने तक वह सामने नहीं आना चाहता। चूंकि इससे उसे व उसके परिवार को खतरा होगा। आसपास मंडराने वाले इनके दलाल ही फाइनेंसरों तक कर्मचारियों को फंसाते हैं।
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बच्चों के भविष्य का दिखाया जाता है सपना
सूदखोर कर्मचारियों को उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सुनहरा सपना दिखाते हैं। बच्चों को बड़े नामी स्कूल व कॉलेज में एडमिशन, पढ़ाई, दूसरे राज्यों में पढ़ाई और काम शुरू करवाने के नाम पर कर्ज दिया जाता है। जिसके बाद इसे इतनी बड़ी रकम बना दी जाती है, व्यक्ति सबकुछ देकर भी इससे मुक्त नहीं हो पाता।
आपके पास है कोई फाइनेंसर का सताया, तो हमें बताएं
अमर उजाला जिले के इन सूदखोरों व बेलगाम फाइनेंसरों के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है। ताकि मनोज जोशी की तरह अन्य किसी को फाइनेंसरों की ज्यादतियों के चलते जान न देनी पड़े। यदि आप या आपके आसपास कोई फाइनेंसर की ज्यादतियों व दबंगई से परेशान हैं, तो अमर उजाला के नंबर 8930821113 पर अपनी कहानी बताएं। जिसे प्रकाशित कर प्रशासन को जगाया जाएगा।
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अमर उजाला की पड़ताल में इन सूदखोरों का एक और नया जाल सामने आया है। इन सूदखोरों की पहुंच गली, नुक्कड़ और थानों तक ही नहीं है। बल्कि सरकारी कार्यालयों के अंदर तक इन फाइनेंसरों ने अपनी जड़े फैलाई हुए हैं। पड़ताल में पता चला है कि जगाधरी रेलवे वर्कशॉप के सैकड़ों कर्मचारी इन सूदखोरों के चंगुल में फंसे हुए है। रेलवे वर्कशॉप के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की इसमें बड़ी संख्या है। वहीं इसमें लिपिक जैसे कर्मचारी भी शोषण का शिकार हो रहे हैं। यदि आवाज उठाने की कौशिक कोई करता है, तो आलाअधिकारियों सहित चैक व स्टांप का डर दिखाकर चुप करवा दिया जाता है।
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एक रेलवे कर्मचारी ने बताया कि एक दो नहीं करीब बीस से ज्यादा छोटे बड़े सूदखोर वर्कशॉप में अपनी जड़े गड़ाए हुए हैं। जरूरतमंद लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें कर्ज देकर सालों लूटा जा रहा है। कर्मचारी का कहना है कि जब तक इसमें प्रशासन की कार्रवाई न होने तक वह सामने नहीं आना चाहता। चूंकि इससे उसे व उसके परिवार को खतरा होगा। आसपास मंडराने वाले इनके दलाल ही फाइनेंसरों तक कर्मचारियों को फंसाते हैं।
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सूदखोर कर्मचारियों को उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का सुनहरा सपना दिखाते हैं। बच्चों को बड़े नामी स्कूल व कॉलेज में एडमिशन, पढ़ाई, दूसरे राज्यों में पढ़ाई और काम शुरू करवाने के नाम पर कर्ज दिया जाता है। जिसके बाद इसे इतनी बड़ी रकम बना दी जाती है, व्यक्ति सबकुछ देकर भी इससे मुक्त नहीं हो पाता।
आपके पास है कोई फाइनेंसर का सताया, तो हमें बताएं
अमर उजाला जिले के इन सूदखोरों व बेलगाम फाइनेंसरों के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है। ताकि मनोज जोशी की तरह अन्य किसी को फाइनेंसरों की ज्यादतियों के चलते जान न देनी पड़े। यदि आप या आपके आसपास कोई फाइनेंसर की ज्यादतियों व दबंगई से परेशान हैं, तो अमर उजाला के नंबर 8930821113 पर अपनी कहानी बताएं। जिसे प्रकाशित कर प्रशासन को जगाया जाएगा।