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Yamuna Nagar News: गुमशुदा बेटे को 12 साल बाद देख पिता भावुक
Tue, 29 Jul 2025 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 29 Jul 2025 12:25 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरस्वतीनगर। बिहार के जिला मधुबनी के गांव गैनौर से 12 साल पहले लापता हुए रामू को परिवार ने मृत मान लिया था। पूरा परिवार कई साल तक उनकी तलाश करता रहा, लेकिन कहीं से कुछ पता नहीं चला। जिस पर पिता ने रामू को मरा हुआ मान लिया था। बेटे के जाने के बाद उनकी मां सदमे से गुजर गई। रामू के दो बच्चे अनाथ हो गए और पत्नी ने भी दूसरी शादी कर ली।
मघरपुर गांव स्थित नी आसरे दा आसरा शेल्टर होम से जब पिता के पास रामू के जिंदा होने का फोन गया तो उन्हें यह सुनकर अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ। उम्मीद की एक किरण लिए पिता शेल्टर होम में पहुंचे। बेटे को जिंदा देख कर बुजुर्ग पिता फफक कर रोने लगे।
नी आसरे दा आसरा शेल्टर होम के संस्थापक जसकीरत सिंह ने बताया कि जब रामू को उनके पास लाया गया तो उनकी मानसिक स्थिति कमजोर थी। वह सड़क के किनारे बेसहारा अवस्था में बैठे मिले थे। वह न बोल पा रहे थे, न अपना परिचय दे पाने में सक्षम थे। शेल्टर होम की टीम ने हालत देख तुरंत उन्हें सहारा दिया।
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उन्हें नहलाया गया, साफ कपड़े दिए गए, दवा, खाना और सबसे अहम एक परिवार जैसा माहौल दिया गया। पूरे एक साल की देखरेख और काउंसलिंग के बाद एक दिन रामू ने धीमी आवाज में अपने गांव का नाम गैनौर मधुबनी बताया। टीम ने तुरंत परिवार की तलाश शुरू की और जब उनके पिता से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि रामू सुरक्षित है और शेल्टर होम में रह रहा है।
यह सुनते ही पिता को पहले यकीन ही नहीं हुआ। शेल्टर होम में जब 12 साल बाद बेटे को गले लगाया तो वहां मौजूद सभी की आंखें नम हो गईं। जसकीरत सिंह ने बताया कि उन्होंने सिर्फ इंसानियत का फर्ज निभाया। उनकी कोशिश यही है कि हर बेसहारा को फिर से जीवन की उम्मीद दी जाए।
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सरस्वतीनगर। बिहार के जिला मधुबनी के गांव गैनौर से 12 साल पहले लापता हुए रामू को परिवार ने मृत मान लिया था। पूरा परिवार कई साल तक उनकी तलाश करता रहा, लेकिन कहीं से कुछ पता नहीं चला। जिस पर पिता ने रामू को मरा हुआ मान लिया था। बेटे के जाने के बाद उनकी मां सदमे से गुजर गई। रामू के दो बच्चे अनाथ हो गए और पत्नी ने भी दूसरी शादी कर ली।
मघरपुर गांव स्थित नी आसरे दा आसरा शेल्टर होम से जब पिता के पास रामू के जिंदा होने का फोन गया तो उन्हें यह सुनकर अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ। उम्मीद की एक किरण लिए पिता शेल्टर होम में पहुंचे। बेटे को जिंदा देख कर बुजुर्ग पिता फफक कर रोने लगे।
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नी आसरे दा आसरा शेल्टर होम के संस्थापक जसकीरत सिंह ने बताया कि जब रामू को उनके पास लाया गया तो उनकी मानसिक स्थिति कमजोर थी। वह सड़क के किनारे बेसहारा अवस्था में बैठे मिले थे। वह न बोल पा रहे थे, न अपना परिचय दे पाने में सक्षम थे। शेल्टर होम की टीम ने हालत देख तुरंत उन्हें सहारा दिया।
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उन्हें नहलाया गया, साफ कपड़े दिए गए, दवा, खाना और सबसे अहम एक परिवार जैसा माहौल दिया गया। पूरे एक साल की देखरेख और काउंसलिंग के बाद एक दिन रामू ने धीमी आवाज में अपने गांव का नाम गैनौर मधुबनी बताया। टीम ने तुरंत परिवार की तलाश शुरू की और जब उनके पिता से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि रामू सुरक्षित है और शेल्टर होम में रह रहा है।
यह सुनते ही पिता को पहले यकीन ही नहीं हुआ। शेल्टर होम में जब 12 साल बाद बेटे को गले लगाया तो वहां मौजूद सभी की आंखें नम हो गईं। जसकीरत सिंह ने बताया कि उन्होंने सिर्फ इंसानियत का फर्ज निभाया। उनकी कोशिश यही है कि हर बेसहारा को फिर से जीवन की उम्मीद दी जाए।