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खरीद नहीं होने से धान समेटकर वापस ले जा रहे किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2020 01:12 AM IST
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farmers withdrawing paddy due to no purchases
शहर की अनाजमंडी में धान की फसल को समेटते मजदूर। - फोटो : Yamuna Nagar
अनाजमंडी में धान की सरकारी खरीद न होने से किसानों की धान की फसल को व्यापारी औने पौने दामों पर खरीद रहें है। धान की सरकारी खरीद शुरू न होने का फायदा व्यापारी जमकर उठा रहें है। कम दाम मिलने से किसानों को प्रति एकड़ हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं बहुत से किसान मंडी में धान की फसल के औने पौने दाम मिलने से निराश होकर अपनी फसल को वापस अपने घर ले जा रहें है। ऐसे किसान धान की सरकारी खरीद शुरू होने के बाद अपनी धान की फसल को न्यूनतम मूल्य पर बेचने को लेकर अपनी फसल को घर में या आढ़ती की दुकान पर स्टॉक लगा रहें है।
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धान की सरकारी खरीद 25 सितंबर से शुरू होने की संभावना है। ऐसे में तब तक किसानों को धान की फसल का न्यूनतम मूल्य मिलना संभव नहीं है। अब किसान सरकारी खरीद शुरू होने की बाट जोह रहे है। किसान नरेश, रामकुमार, प्रदीप, सुखबीर, रमेश, साहिल आदि ने बताया कि क्षेत्र में धान की काफी फसल पक चुकी है। सरकार ने मोटे धान के 1888 रुपये प्रति एकड़ दाम निर्धारित किये है। लेकिन मंडी में किसानों को 1400 से 1500 रूपये प्रति क्विंटल तक ही दाम मिल रहें है। बिना सरकारी खरीद के व्यापारी किसानों को दोनो हाथों से लूट रहा है। जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों ने बताया कि 1509 बारिक किस्म की धान का मूल्य पिछले वर्ष 2500 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक था। लेकिन अब यह किस्म मंडी में 1600 से 1850 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहीं है। जिससे किसानों को भारी नुकसान है। इस बारे अनाजमंडी रादौर के प्रधान संजय गुप्ता ने बताया कि मोटे धान के दाम कम मिलने से अधिकतर किसानों ने अपनी धान की फसल को बेचने की बजाय आढ़ती की दुकान पर कट्टों में स्टॉक लगा दिया है। जिससे सरकारी खरीद शुरू होने के बाद ही बेचा जायेगा। बहुत कम किसान ही कम दाम पर अपनी फसल बेच रहे है। उधर भारतीय किसान यूनियन की ओर से जिला प्रधान संजु गुंदयाना ने सरकार से मांग की कि सरकार 20 सितंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू कर किसानों को राहत पहुंचाये।
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