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Yamuna Nagar News: सरकार के खिलाफ मुखर पर फिर गुटबाजी उजागर
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सरकार के खिलाफ कांग्रेस जहां मुखर नजर आ रही है, वहीं पार्टी की आपसी गुटबाजी खत्म नहीं हो रही है। रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर से आयोजित विपक्ष आपके समक्ष कार्यक्रम में एकबार फिर कांग्रेस की गुटबाजी नजर आई। इस कार्यक्रम से कुमारी सैलजा के समर्थकों ने पूरी तरह दूरी बनाकर रखी। सैलजा का कोई समर्थक और सहयोगी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। दूसरी ओर मंचासीन नेताओं में किसी ने भी अपने भाषण में कुमारी सैलजा का नाम तक नहीं लिया।
भले ही कांग्रेस की ओर से सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेसियों में आपसी खींचतान ही इसमें सबसे बड़ा रोड़ा है। अन्य राज्यों की तरह हरियाणा में भी कांग्रेस के कई धड़े हैं, जिन्हें एक मंच पर करने की तमाम कोशिशें सिरे नहीं चढ़ सकी हैं। इसका नजारा एकबार फिर दिखा जब रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के कार्यक्रम से कुमारी सैलजा समर्थकों ने पूरी तरह से दूरी बनाए रखी। हालत यह रही कि जिले की साढौरा सीट से कांग्रेस विधायक रेणूबाला भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचीं, जिन्हें कुमारी सैलजा की करीबी माना जाता है। 2019 चुनाव से पहले कुमारी सैलजा ने रेणूबाला को इनेलो से कांग्रेस में शामिल कराया था। उसके बाद कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़कर रेणूबाला विधानसभा पहुंची। इसी तरह हरियाणा विकास पार्टी में गृहमंत्री एवं हुड्डा सरकार में विधानसभा डिप्टी स्पीकर रहे चौधरी अकरम खान भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। चौधरी अकरम खान यमुनानगर की राजनीति का बड़ा नाम है। उनके पिता व दादा भी राजनेता रहे हैं, हालांकि पार्टी की ओर से चौधरी अकरम खान की अनुपस्थिति का कारण माह-ए-पाक रमजान में व्यस्तता बताई जा रही है। बता दें कि चौधरी अकरम खान 2009 में बसपा से चुनाव जीते थे। तब उन्हें भूपेंद्र सिंह हड्डा की सरकार में डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। इसके बाद कुमारी सैलजा के नेतृत्व में अकरम खान कांग्रेस में शामिल हो गए। वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, जिला को-ऑर्डिनेटर एवं पूर्व जिला परिषद चेयरमैन श्याम सुंदर बतरा ने भी कार्यक्रम से दूरी रखी। अकरम खान व श्याम सुंदर बतरा दोनों ही कुमारी सैलजा के बेहद करीबी माने जाते हैं, हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता इसे गुटबाजी नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि व्यस्तताओं के चलते कई नेता कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके हैं।
अनाजमंडी में लगा पंडाल भी कांग्रेसी नेताओं के पोस्टर बैनर से अटा पड़ा था, लेकिन कहीं भी कुमारी सैलजा की फोटो नजर नहीं आई। वहीं 2014 में कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने वाली एवं नगर निगम वार्ड नंबर-13 की पार्षद निर्मल चौहान भी कार्यक्रम में नहीं पहुंची। इसी तरह नगर निगम वार्ड नंबर-3 पार्षद हरमीन कौर, वार्ड नंबर-4 से पार्षद देवेंद्र सिंह, वार्ड नंबर-5 से पार्षद विनय कांबोज टिंकू ने भी इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बना कर रखी।
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भले ही कांग्रेस की ओर से सरकार के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेसियों में आपसी खींचतान ही इसमें सबसे बड़ा रोड़ा है। अन्य राज्यों की तरह हरियाणा में भी कांग्रेस के कई धड़े हैं, जिन्हें एक मंच पर करने की तमाम कोशिशें सिरे नहीं चढ़ सकी हैं। इसका नजारा एकबार फिर दिखा जब रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के कार्यक्रम से कुमारी सैलजा समर्थकों ने पूरी तरह से दूरी बनाए रखी। हालत यह रही कि जिले की साढौरा सीट से कांग्रेस विधायक रेणूबाला भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचीं, जिन्हें कुमारी सैलजा की करीबी माना जाता है। 2019 चुनाव से पहले कुमारी सैलजा ने रेणूबाला को इनेलो से कांग्रेस में शामिल कराया था। उसके बाद कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़कर रेणूबाला विधानसभा पहुंची। इसी तरह हरियाणा विकास पार्टी में गृहमंत्री एवं हुड्डा सरकार में विधानसभा डिप्टी स्पीकर रहे चौधरी अकरम खान भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। चौधरी अकरम खान यमुनानगर की राजनीति का बड़ा नाम है। उनके पिता व दादा भी राजनेता रहे हैं, हालांकि पार्टी की ओर से चौधरी अकरम खान की अनुपस्थिति का कारण माह-ए-पाक रमजान में व्यस्तता बताई जा रही है। बता दें कि चौधरी अकरम खान 2009 में बसपा से चुनाव जीते थे। तब उन्हें भूपेंद्र सिंह हड्डा की सरकार में डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। इसके बाद कुमारी सैलजा के नेतृत्व में अकरम खान कांग्रेस में शामिल हो गए। वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, जिला को-ऑर्डिनेटर एवं पूर्व जिला परिषद चेयरमैन श्याम सुंदर बतरा ने भी कार्यक्रम से दूरी रखी। अकरम खान व श्याम सुंदर बतरा दोनों ही कुमारी सैलजा के बेहद करीबी माने जाते हैं, हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता इसे गुटबाजी नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि व्यस्तताओं के चलते कई नेता कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके हैं।
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अनाजमंडी में लगा पंडाल भी कांग्रेसी नेताओं के पोस्टर बैनर से अटा पड़ा था, लेकिन कहीं भी कुमारी सैलजा की फोटो नजर नहीं आई। वहीं 2014 में कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने वाली एवं नगर निगम वार्ड नंबर-13 की पार्षद निर्मल चौहान भी कार्यक्रम में नहीं पहुंची। इसी तरह नगर निगम वार्ड नंबर-3 पार्षद हरमीन कौर, वार्ड नंबर-4 से पार्षद देवेंद्र सिंह, वार्ड नंबर-5 से पार्षद विनय कांबोज टिंकू ने भी इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बना कर रखी।
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