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परीक्षा के बाद सड़कों पर जाम, बसों में भीड़ से परीक्षार्थी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Sun, 27 Nov 2016 11:40 PM IST
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जिले के शिक्षण संस्थानों में बने केंद्रों पर रविवार को लिपिक पदों की भर्ती हेतु लिखित परीक्षा हुई। दो सत्रों में हुई परीक्षा के पहले और बाद में परीक्षार्थियों समेत अन्य लोगों को बसों में धक्के व सड़कों पर जाम की दिक्कत का सामना करना पड़ा। रोडवेज बसों में बढ़ी भीड़ के मारे मजबूरन परीक्षार्थी बसों की छतों पर बैठ और सीढ़ियों व खिड़कियों पर लटक कर व जान जोखिम में डाल शहर पहुंचे और इन्हीं हालात में वापस लौटे। बसों में भीड़ के चलते अन्य यात्रियों को भी धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। वहीं, परीक्षार्थियों के करीब तीन हजार निजी वाहन से पहुंचने पर परीक्षा शुरू होने से पूर्व व खत्म होने पर शहर की सड़कों पर जाम की स्थिति बन गईं। इसमें परीक्षार्थियों सहित अन्य वाहन चालकों को भी दिक्कत हुई।
बता दें कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पंचकूला द्वारा सुबह 10:30 से दोपहर 12 बजे तक व दोपहर बाद तीन से 4:30 बजे तक लिपिक पदों की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा ली गई। इसके लिए जिले के शिक्षण संस्थाओं में स्थापित विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर रविवार को प्रदेशभर से परीक्षार्थी पहुंचे। अन्य जिलों से आए परीक्षार्थियों ने शहर पहुंचने के लिए रोडवेज बसों व निजी वाहनों का सहारा लिया। कुछ परीक्षार्थी सुबह से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर पहुंचने लगे और परीक्षा से पूर्व आसपास पेड़ों की छांव के नीचे व दुकानों में बैठकर पढ़ाई करते दिखे। प्रथम सत्र की परीक्षा सुबह 10:30 बजे शुरू हुई। इससे पूर्व केंद्रों पर प्रवेश करने पर परीक्षार्थियों की बारीकी से जांचा गया।
प्रवेश से पहले हर परीक्षार्थी की हुई बारीकी से जांच:
परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले हर परीक्षार्थी की मेटल डिटेक्टर के जरिए जांच की गई। उन्हें सिर्फ रोल नंबर स्लिप व परिचय पत्र ले जाने की ही अनुमति दी गई। जबकि इस दौरान महिला परीक्षार्थियों के हाथों से कंगन, चूडिय़ां, अंगूठियां, घड़ी, कानों से बालियां, नाक से टॉप्स समेत पायल, जूड़ा पिन, क्लिप व अन्य जेवर बाहर ही रखवा दिए गए। इसी तरह कई परुष परीक्षार्थियों से बेल्ट व मोबाइल, घड़ी व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन उपकरण बाहर ही रखवा दिए गए। ठीक इसी तरह दोपहर बाद तीन बजे से शुरू हुई दूसरे सत्र की परीक्षा में परीक्षार्थियों को बारीकी से जांच के बाद ही केंद्रों में प्रवेश करने दिया गया। परीक्षा के दौरान केंद्रों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा और कई जगह बेरिकेटिंग के जरिए केंद्र के आसपास वाहनों की आवाजाही रोक दी गई और लोगों को जमा नहीं होने दिया गया वहीं, नकल रोकने हेतु सभी केंद्रों पर जैमर लगे थे।
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सड़कों पर जाम तो बसों में बनी धक्का-मुक्की की स्थिति:
पहले सत्र की परीक्षा दोपहर 12 बजे व दूसरे सत्र की परीक्षा 4:30 बजे संपन्न हुई। परीक्षा केंद्रों से परीक्षार्थियों के बाहर निकलते ही शहर की सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई, चूंकि अन्य वाहनों के साथ रविवार को परीक्षार्थियों के करीब तीन हजार निजी वाहन भी सड़कों पर आ गए। रेलवे रोड, जगाधरी वर्कशॉप रोड व मॉडल टाउन समेत जगाधरी की सड़कों पर जाम के बीच वाहन रेंगते हुए नजर आए। इस बीच परीक्षार्थियों के साथ अन्य वाहन चालक भी दिक्कतों से दो-चार होते दिखे। उधर, सुबह जहां अलग-अलग जिलों के परीक्षार्थियों को बसों में भीड़ के कारण खड़े होकर व धक्का-मुक्की के बीच यमुनानगर पहुंचना पड़ा। वहीं, वापस लौटते वक्त सभी जिलों के परीक्षार्थी दोपहर व शाम के वक्त बस स्टैंड यमुनानगर व जगाधरी पर जुट गए। अन्य यात्रियों समेत परीक्षार्थियों की भीड़ के चलते बसों में पैर रखने की भी जगह नहीं रही। अधिक्कतर परीक्षार्थी घर लौटने के लिए बसों की खिड़कियों व सीढ़ियों पर लटक कर और छतों पर बैठकर सफर करने पर मजबूर हो गए। कई परीक्षार्थियों ने बसों में भीड़ को देख निजी वाहनों का सहारा लिया।
जिला स्तर पर होनी चाहिए परीक्षा: परीक्षार्थी राकेश, अनिल, गुरजंत, अविनाश ने कहा कि इस तरह की परीक्षा परीक्षार्थी के संबंधित जिले में ही होनी चाहिए। ताकि बसों में भीड़ के चलते खड़े होकर व धक्का-मुक्की के बीच परीक्षार्थियों को परेशान न होना पड़े। चूंकि परीक्षा केंद्र पर पहुंचने में आने वाले दिक्कतों से काफी थकावट महसूस होती है और ऐसे में तनाव के कारण परीक्षा सही ढंग से नहीं हो पाती है। अगर परीक्षार्थियों को अन्य जिलों में परीक्षा के लिए बुलाया जाए, तो प्रशासन व सरकार को बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। वह बसों में खड़े होकर पहुंचे और अब वापस लौटने के वक्त बसों में भीड़ के कारण चढ़ भी नहीं पा रहे हैं।
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बता दें कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग पंचकूला द्वारा सुबह 10:30 से दोपहर 12 बजे तक व दोपहर बाद तीन से 4:30 बजे तक लिपिक पदों की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा ली गई। इसके लिए जिले के शिक्षण संस्थाओं में स्थापित विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर रविवार को प्रदेशभर से परीक्षार्थी पहुंचे। अन्य जिलों से आए परीक्षार्थियों ने शहर पहुंचने के लिए रोडवेज बसों व निजी वाहनों का सहारा लिया। कुछ परीक्षार्थी सुबह से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर पहुंचने लगे और परीक्षा से पूर्व आसपास पेड़ों की छांव के नीचे व दुकानों में बैठकर पढ़ाई करते दिखे। प्रथम सत्र की परीक्षा सुबह 10:30 बजे शुरू हुई। इससे पूर्व केंद्रों पर प्रवेश करने पर परीक्षार्थियों की बारीकी से जांचा गया।
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प्रवेश से पहले हर परीक्षार्थी की हुई बारीकी से जांच:
परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले हर परीक्षार्थी की मेटल डिटेक्टर के जरिए जांच की गई। उन्हें सिर्फ रोल नंबर स्लिप व परिचय पत्र ले जाने की ही अनुमति दी गई। जबकि इस दौरान महिला परीक्षार्थियों के हाथों से कंगन, चूडिय़ां, अंगूठियां, घड़ी, कानों से बालियां, नाक से टॉप्स समेत पायल, जूड़ा पिन, क्लिप व अन्य जेवर बाहर ही रखवा दिए गए। इसी तरह कई परुष परीक्षार्थियों से बेल्ट व मोबाइल, घड़ी व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन उपकरण बाहर ही रखवा दिए गए। ठीक इसी तरह दोपहर बाद तीन बजे से शुरू हुई दूसरे सत्र की परीक्षा में परीक्षार्थियों को बारीकी से जांच के बाद ही केंद्रों में प्रवेश करने दिया गया। परीक्षा के दौरान केंद्रों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा और कई जगह बेरिकेटिंग के जरिए केंद्र के आसपास वाहनों की आवाजाही रोक दी गई और लोगों को जमा नहीं होने दिया गया वहीं, नकल रोकने हेतु सभी केंद्रों पर जैमर लगे थे।
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सड़कों पर जाम तो बसों में बनी धक्का-मुक्की की स्थिति:
पहले सत्र की परीक्षा दोपहर 12 बजे व दूसरे सत्र की परीक्षा 4:30 बजे संपन्न हुई। परीक्षा केंद्रों से परीक्षार्थियों के बाहर निकलते ही शहर की सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई, चूंकि अन्य वाहनों के साथ रविवार को परीक्षार्थियों के करीब तीन हजार निजी वाहन भी सड़कों पर आ गए। रेलवे रोड, जगाधरी वर्कशॉप रोड व मॉडल टाउन समेत जगाधरी की सड़कों पर जाम के बीच वाहन रेंगते हुए नजर आए। इस बीच परीक्षार्थियों के साथ अन्य वाहन चालक भी दिक्कतों से दो-चार होते दिखे। उधर, सुबह जहां अलग-अलग जिलों के परीक्षार्थियों को बसों में भीड़ के कारण खड़े होकर व धक्का-मुक्की के बीच यमुनानगर पहुंचना पड़ा। वहीं, वापस लौटते वक्त सभी जिलों के परीक्षार्थी दोपहर व शाम के वक्त बस स्टैंड यमुनानगर व जगाधरी पर जुट गए। अन्य यात्रियों समेत परीक्षार्थियों की भीड़ के चलते बसों में पैर रखने की भी जगह नहीं रही। अधिक्कतर परीक्षार्थी घर लौटने के लिए बसों की खिड़कियों व सीढ़ियों पर लटक कर और छतों पर बैठकर सफर करने पर मजबूर हो गए। कई परीक्षार्थियों ने बसों में भीड़ को देख निजी वाहनों का सहारा लिया।
जिला स्तर पर होनी चाहिए परीक्षा: परीक्षार्थी राकेश, अनिल, गुरजंत, अविनाश ने कहा कि इस तरह की परीक्षा परीक्षार्थी के संबंधित जिले में ही होनी चाहिए। ताकि बसों में भीड़ के चलते खड़े होकर व धक्का-मुक्की के बीच परीक्षार्थियों को परेशान न होना पड़े। चूंकि परीक्षा केंद्र पर पहुंचने में आने वाले दिक्कतों से काफी थकावट महसूस होती है और ऐसे में तनाव के कारण परीक्षा सही ढंग से नहीं हो पाती है। अगर परीक्षार्थियों को अन्य जिलों में परीक्षा के लिए बुलाया जाए, तो प्रशासन व सरकार को बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। वह बसों में खड़े होकर पहुंचे और अब वापस लौटने के वक्त बसों में भीड़ के कारण चढ़ भी नहीं पा रहे हैं।