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जीवन में सबकुछ पहले से तय : प्रिय किशोरी
Wed, 11 Dec 2024 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 11 Dec 2024 02:15 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। मथुरा की आनंदमूर्ति प्रिय किशोरी भारद्वाज ने श्री श्याम गोशाला में चल रही कथा के तीसरे दिन कहा कि प्रभु का दिया ये जीवन आपके और हमारे काम का नहीं है। संसार में हर प्राणी का जन्म किसी उद्देश्य से होता है। उद्देश्य की पूर्ति ही जीवन का मकसद है। मनुष्य स्वयं फैसले जरूर लेता है। लेकिन, सब कुछ पहले से तय होता है।
जीवन में कुछ बुरा हो तो परेशान न हों। हर घटना का उद्देश्य है। प्रभु आपका बुरा नहीं चाहते। अपना ध्यान प्रभु भक्ति में लगाएं। उक्त विचार रखे। उन्होंने श्रद्धालुओं को सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, माता देवहूति से संवाद, ब्रह्मा जी की उत्पत्ति व वामन अवतार प्रसंगों की कथा सुनाई। कपिल देवहूती प्रसंग के माध्यम से कथा सुनाते हुए उन्होंने संतों के संगति के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु ने पांचवां अवतार कपिल मुनि के रूप में लिया। इनके पिता का नाम महर्षि कर्दम व माता का नाम देवहूति था। शरशैया पर पड़े हुए भीष्म पितामह के शरीर त्याग के समय वेदज्ञ व्यास आदि ऋषियों के साथ भगवान कपिल मुनि भी वहां उपस्थित थे। गुरु भगवान कपिल महामुनि भागवत धर्म के प्रमुख बारह आचार्यों में से एक हैं।
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कथावाचक ने कहा कि ध्रुव चरित्र की कथा से यह सिद्ध हो जाता है कि भगवत प्राप्ति के लिए उम्र की नहीं बल्कि निष्ठा की जरूरत है। भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में भाग लेने पहुंच गईं। यज्ञ में भगवान शिव का आमंत्रण और उनका भाग न दिए जाने पर कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया।
प्रिय किशोरी ने कहा कि हमारा शरीर हमारे वश में है या नहीं, यह जानना जरूरी है। अगर वश में है तो प्रभु भक्ति में ध्यान लगाएं। वश में नहीं है तो हमारा शरीर किस काम का है? दुनिया में हमारा क्या अस्तित्व है? भगवान का नाम लेने मात्र से जैसे हजारों वर्षों का कूड़ा छोटी सी आग की चिंगारी से जलकर राख हो जाता है। उसी तरह जीव के हजारों वर्ष के जो पाप हैं वह भगवान के नाम रूपी अग्नि के द्वारा जल जाते हैं।
कलयुग में जीव के कल्याण के लिए सबसे सरल कोई उपाय है तो वह भगवान का नाम संकीर्तन है। कथा समापन पर भगवान वामन की भव्य झांकी निकाली गई। वहीं कथा के तीसरे दिन रक्तदान शिविर में आठ लोगों ने रक्तदान किया। इस दौरान विहिप भारतीय गोवंश रक्षण एवं संवर्धन के प्रांत प्रमुख महंत शोभा दास, रामकुमार निजामपुर, अमित सेतिया, सोनू पंवार, अमित सैनी, रामेश्वर दयाल मौजूद रहे।
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साढौरा। मथुरा की आनंदमूर्ति प्रिय किशोरी भारद्वाज ने श्री श्याम गोशाला में चल रही कथा के तीसरे दिन कहा कि प्रभु का दिया ये जीवन आपके और हमारे काम का नहीं है। संसार में हर प्राणी का जन्म किसी उद्देश्य से होता है। उद्देश्य की पूर्ति ही जीवन का मकसद है। मनुष्य स्वयं फैसले जरूर लेता है। लेकिन, सब कुछ पहले से तय होता है।
जीवन में कुछ बुरा हो तो परेशान न हों। हर घटना का उद्देश्य है। प्रभु आपका बुरा नहीं चाहते। अपना ध्यान प्रभु भक्ति में लगाएं। उक्त विचार रखे। उन्होंने श्रद्धालुओं को सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, माता देवहूति से संवाद, ब्रह्मा जी की उत्पत्ति व वामन अवतार प्रसंगों की कथा सुनाई। कपिल देवहूती प्रसंग के माध्यम से कथा सुनाते हुए उन्होंने संतों के संगति के महत्व पर प्रकाश डाला।
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उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु ने पांचवां अवतार कपिल मुनि के रूप में लिया। इनके पिता का नाम महर्षि कर्दम व माता का नाम देवहूति था। शरशैया पर पड़े हुए भीष्म पितामह के शरीर त्याग के समय वेदज्ञ व्यास आदि ऋषियों के साथ भगवान कपिल मुनि भी वहां उपस्थित थे। गुरु भगवान कपिल महामुनि भागवत धर्म के प्रमुख बारह आचार्यों में से एक हैं।
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कथावाचक ने कहा कि ध्रुव चरित्र की कथा से यह सिद्ध हो जाता है कि भगवत प्राप्ति के लिए उम्र की नहीं बल्कि निष्ठा की जरूरत है। भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में भाग लेने पहुंच गईं। यज्ञ में भगवान शिव का आमंत्रण और उनका भाग न दिए जाने पर कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दिया।
प्रिय किशोरी ने कहा कि हमारा शरीर हमारे वश में है या नहीं, यह जानना जरूरी है। अगर वश में है तो प्रभु भक्ति में ध्यान लगाएं। वश में नहीं है तो हमारा शरीर किस काम का है? दुनिया में हमारा क्या अस्तित्व है? भगवान का नाम लेने मात्र से जैसे हजारों वर्षों का कूड़ा छोटी सी आग की चिंगारी से जलकर राख हो जाता है। उसी तरह जीव के हजारों वर्ष के जो पाप हैं वह भगवान के नाम रूपी अग्नि के द्वारा जल जाते हैं।
कलयुग में जीव के कल्याण के लिए सबसे सरल कोई उपाय है तो वह भगवान का नाम संकीर्तन है। कथा समापन पर भगवान वामन की भव्य झांकी निकाली गई। वहीं कथा के तीसरे दिन रक्तदान शिविर में आठ लोगों ने रक्तदान किया। इस दौरान विहिप भारतीय गोवंश रक्षण एवं संवर्धन के प्रांत प्रमुख महंत शोभा दास, रामकुमार निजामपुर, अमित सेतिया, सोनू पंवार, अमित सैनी, रामेश्वर दयाल मौजूद रहे।