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देश की गरिमा को दर्शाता है प्रत्येक त्योहार : ज्ञानानंद

Sun, 19 Oct 2025 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 19 Oct 2025 11:27 PM IST
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Every festival reflects the dignity of the country: Gyananand
प्रवचन करते स्वामी ज्ञानानंद। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में दीपावली के उपलक्ष्य में आयोजित सत्संग में स्वामी गुरु ज्ञानानंद ने कहा कि प्रत्येक त्योहार भारत देश की गरिमा को दर्शाता है, किंतु ये हम पर निर्भर है कि हम इन त्योहारों के मर्म को जान कर पूर्ण रूप से लाभान्वित होते हैं अथवा नहीं।
स्वामी ने बताया कि मानव मन पूर्णतः तभी जागृत होता है जब उसके जीवन में गुरु का पदार्पण हो क्योंकि हम अपने मन और बुद्धि से कितना भी धन अथवा ज्ञान अर्जित क्यों न कर लें परंतु गुरु, भक्ति और ब्रह्म ज्ञान के बिना सांसारिक ज्ञान अधूरा है। दीपावली की रात्रि को अकेली मां लक्ष्मी की पूजा नहीं की जाती है, अपितु उनके साथ श्री गणेश व मां सरस्वती का पूजन भी किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि धन संपदा की देवी मां लक्ष्मी का आवाहन विवेक के प्रदाता श्री गणेश और कर्मठता एवं सर्वगुण संपन्न को देने वाली मां सरस्वती के साथ किया जाता है ताकि हमारे विवेक और कर्मठता के द्वारा धर्मपरायण होकर अर्जित धन एवं ज्ञान हमारे घर में स्थाई संपन्नता एवं सुख शांति लेकर आए।
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स्वामी ने समझाते हुए कहा कि मानव मस्तिष्क का प्रत्येक विचार, स्वभाव और मान्यताएं उसके द्वारा ग्रहण किए गए ज्ञान पर ही आधारित होते हैं।इसी लिए शास्त्रों में सुसंगती के लिए मनुष्य को प्रेरित किया गया है। यह शाश्वत सत्य है कि जब तक हम अपने जीवन में ब्रह्मनिष्ठ संत के द्वारा ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करके निरंतर उनकी आज्ञा में चलते हुए सत्संग, सेवा, साधना और सुमिरन को स्थान नहीं देते, तब तक हम अपने जीवन में कर्मयोग, भक्तियोग अथवा ज्ञान योग के सूत्रों से लाभान्वित नहीं हो पाते।

उन्होंने कहा कि जैसे एक दीये के भीतर छिपी अग्नि को प्रकट करने के लिए उसे अग्नि के किसी बाहरी स्रोत से संपर्क साधने की आवश्यकता होती है, इसी प्रकार हमारे भीतर का सुप्त ब्रह्मज्ञान तब ही जागृत होता है जब गुरु अपने तपोबल की शक्ति से हमारे अंतःकरण में परमात्मा के ज्योति स्वरूप में दर्शन करवाता है।

प्रवचन करते स्वामी ज्ञानानंद। आयोजक

प्रवचन करते स्वामी ज्ञानानंद। आयोजक

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