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Yamuna Nagar News: सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा का जज्बा बरकरार, युवा को सिखा रहीं नर्सिंग के गुर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 May 2024 05:38 AM IST
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Even after retirement, the spirit of service remains intact, she is teaching the tricks of nursing to the youth.
यमुनानगर। कोरोना महामारी की त्रासदी आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। शायद यही कारण है कि सेवानिवृत्त के बाद भी एक बुजुर्ग नर्स कोरोना से जंग के लिए नर्सिंग की फौज तैयार करने में लगी हैं। बात हो रही है सरोजनी कॉलोनी निवासी 71 वर्षीय अशोक धवन की। जिनमें 43 साल की नर्सिंग सर्विस से सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ है। वे यमुनानगर समेत दूसरे शहरों में भी लेक्चर देकर नर्सिंग के हुनर बांट रही हैं। इससे पहले कोरोना जैसी महामारी में जब अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की कमी थी, तब भी अशोक धवन ने नर्सिंग के 270 युवा तैयार कर दिए थे। इसी जज्बे को देख लोग आज भी उन्हें सिस्टर अशोक धवन कहकर बुलाते हैं।
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विदित हो कि अशोक धवन ने फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की यमुनानगर ब्रांच में फरवरी-2021 से मार्च 2022 तक दो-दो माह की अवधि के सात बैच में लड़के-लड़कियों को निशुल्क नर्सिंग के हुनर सिखाए। हालांकि यह ट्रेनिंग अकेले रह रहे बुजुर्ग महिलाओं-पुरुषों व असहाय मरीजों की घर पर स्वास्थ्य सेवा के प्रोजेक्ट के तहत थी, पर इसमें ट्रेंड 270 लड़के-लड़कियों ने कोरोना काल में नर्सिंग स्टाफ की कमी के चलते अस्पतालों में काम किया।
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अशोक धवन ने बताया कि उनका जन्म चंडीगढ़ में वर्ष 1953 में हुआ। पांच भाई-बहनों में वे दूसरे नंबर की हैं। पढ़ाई के दौरान उनके फार्मासिस्ट पिता बिहारी लाल राजपूत का हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग जिलों में ट्रांसफर हुआ। नादौन से मैट्रिक फिर पंजाब यूनिवर्सिटी से बीए प्रथम वर्ष के आगे पढ़ाई रह गई। पिता को कई किमी. पैदल चल फार्मासिस्ट के तौर पर सेवाएं देते देखा तो खुद में भी लोगों की सेवा करने का जुनून आया। इसके बाद सनोडन अस्पताल शिमला में जीएनएम ट्रेनिंग में नाम लिखवा दिया, जहां परीक्षा में अव्वल रही। चार साल नर्सिंग की बारीकियां सीखी। वर्ष 1975 में धर्मशाला के सरकारी अस्पताल में नौकरी लगी, जहां 1980 तक काम किया। यमुनानगर में बिजली निगम के चीफ ड्राफ्टमैन दर्शन लाल धवन से शादी हुई, यहां नर्सिंग जारी रखने को फैमिली प्लानिंग एसोसिएशन को चुना। जहां सरकारी नौकरी से कम वेतन होने पर भी 38 साल सर्विस की। 2018 में रिटायरमेंट के बाद भी मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद में नर्सिंग पर लेक्चर दिए, जिसमें युवाओं को नर्सिंग की बारीकियां सिखाई।
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