फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   ESI Hospital female referrer dies as soon as she arrives at the hospital gate from the hospital's Kovid ward.

अस्पताल के कोविड वार्ड से ईएसआई अस्पताल महिला रेफर की अस्पताल के गेट पर पहुंचते ही मौत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 May 2021 12:22 AM IST
विज्ञापन
ESI Hospital female referrer dies as soon as she arrives at the hospital gate from the hospital's Kovid ward.
यमुनानगर। जिला अस्पताल प्रशासन पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। चौधरी कॉलोनी के मदन ने आरोप लगाया है कि उसकी 63 वर्षीय मां को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। सांस लेने में परेशानी के चलते दो दिन पूर्व अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन गंभीर स्थिति में ही चिकित्सकों ने ईएसआई अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इससे पूर्व कोरोना की जांच कराई गई। महिला की मौत ईएसआई अस्पताल के गेट पर पहुंचते ही हो गई। आरोप है कि महिला का शव कोरोना पॉजिटिव बताते हुए नहीं दिया गया।
विज्ञापन

मृतक महिला के बेटे का आरोप है कि ट्रामा सेंटर के कोविड वार्ड को जब वापस जाकर देखा तो वहां से सभी मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा था। क्योंकि वहां पर आईसीयू वार्ड बनाना था। आरोप है कि जब मरीज की हालत गंभीर थी तो चिकित्सकों ने पास के ईएसआई अस्पताल में रेफर क्यों किया? जिस कारण उनकी मौत हो गई। इसके बाद मेडिकल ऑफिसर की स्टांप लगी पर्ची उन्हें दी गई, जिस पर कोविड टेस्ट के सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आने पर शव ले जाने की बात लिखी है। पर सिविल अस्पताल के शवगृह पहुंचे, तो कह दिया गया कि मृतक कोविड पॉजिटिव था, इसलिए उसका शव नहीं दिया जा सकता। जबकि उनके पास एमएस की स्टांप लगी निगेटिव रिपोर्ट की पर्ची थी। बावजूद इसके मृतक को पॉजिटिव बताकर उन्हें शव नहीं दिया जा रहा। न ही उसकी पॉजिटिव रिपोर्ट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इलाज में लापरवाही व गुमराह करने पर डॉक्टर पर केस दर्ज करना चाहिए।
विज्ञापन

-आरोप निराधार है, ज्यादातर मरीज पॉजिटिव आ रहे हैं। शव का संस्कार कोरोना गाइडलाइन के तहत कराया गया। कोविड पॉजिटिव होने और हालत गंभीर होने पर ही ईएसआई अस्पताल में भर्ती किया गया। हम उन परिवारों का दुख दर्द समझते हैं, जिनके किसी अपने की मौत होती है। ऐसे हालात में गुस्सा आना स्वाभाविक है। डॉक्टर अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों का इलाज कर रहे हैं। आमजन भी डॉक्टरों का सहयोग करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

-डॉ. सुनील कुमार, पीएमओ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed