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Yamuna Nagar News: शहद की पैकिंग से महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर
Fri, 23 Oct 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 23 Oct 2026 01:30 AM IST
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प्रदर्शनी के दौरान स्टॉल पर मौजूद ममता रानी। स्वयं
अशोक कुमार
यमुनानगर। घरेलू जिम्मेदारियों के बीच रोजगार का रास्ता चुनकर फतेहपुर गांव की ममता रानी ने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है। वर्ष 2018 में शहद की पैकिंग का काम शुरू करने वाली ममता आज घर पर ही इस कार्य को आगे बढ़ा रही हैं।
उनके साथ चार महिलाएं शहद की पैकिंग कर परिवार की आमदनी बढ़ाने में सहयोग दे रही हैं। अब तक वह 30 से अधिक महिलाओं को शहद पैकिंग का प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बना चुकी हैं। ममता रानी ने शहद की पैकिंग के काम को छोटे स्तर पर शुरू किया था। धीरे-धीरे उनके काम को पहचान मिलने लगी और वह जिले में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रदर्शनियों व स्टॉलों में भाग लेने लगीं।
जिले से बाहर भी उनके काम को अवसर मिला है। वह देहरादून सहित उत्तराखंड में आयोजित कार्यक्रमों में स्टॉल लगा चुकी हैं। वहां कमेटी के पदाधिकारियों की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। ममता के पति मुकेश मधुमक्खी पालन का कार्य करते हैं। इससे शहद उत्पादन से जुड़ने का अवसर मिलता है। वे अब मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लेंगी, ताकि शहद उत्पादन से लेकर उसकी पैकिंग तक की प्रक्रिया की जानकारी हासिल कर सकें।
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ममता विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से अपने काम को लोगों तक पहुंचा रही हैं। उनका मानना है कि महिलाओं में हुनर की कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें सअवसर देने की है। शहद पैकिंग के जरिये वह महिलाओं को स्वरोजगार का रास्ता दिखा रही हैं। उनका लक्ष्य अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाना है। संवाद
महिलाओं को हुनरमंद बनाने का प्रयास
ममता रानी का कहना है कि शहद पैकिंग का प्रशिक्षण देकर महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं इस काम को करके अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं। पैकिंग के काम से जुड़ी महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।
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यमुनानगर। घरेलू जिम्मेदारियों के बीच रोजगार का रास्ता चुनकर फतेहपुर गांव की ममता रानी ने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है। वर्ष 2018 में शहद की पैकिंग का काम शुरू करने वाली ममता आज घर पर ही इस कार्य को आगे बढ़ा रही हैं।
उनके साथ चार महिलाएं शहद की पैकिंग कर परिवार की आमदनी बढ़ाने में सहयोग दे रही हैं। अब तक वह 30 से अधिक महिलाओं को शहद पैकिंग का प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बना चुकी हैं। ममता रानी ने शहद की पैकिंग के काम को छोटे स्तर पर शुरू किया था। धीरे-धीरे उनके काम को पहचान मिलने लगी और वह जिले में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रदर्शनियों व स्टॉलों में भाग लेने लगीं।
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जिले से बाहर भी उनके काम को अवसर मिला है। वह देहरादून सहित उत्तराखंड में आयोजित कार्यक्रमों में स्टॉल लगा चुकी हैं। वहां कमेटी के पदाधिकारियों की ओर से उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। ममता के पति मुकेश मधुमक्खी पालन का कार्य करते हैं। इससे शहद उत्पादन से जुड़ने का अवसर मिलता है। वे अब मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लेंगी, ताकि शहद उत्पादन से लेकर उसकी पैकिंग तक की प्रक्रिया की जानकारी हासिल कर सकें।
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ममता विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से अपने काम को लोगों तक पहुंचा रही हैं। उनका मानना है कि महिलाओं में हुनर की कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें सअवसर देने की है। शहद पैकिंग के जरिये वह महिलाओं को स्वरोजगार का रास्ता दिखा रही हैं। उनका लक्ष्य अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाना है। संवाद
महिलाओं को हुनरमंद बनाने का प्रयास
ममता रानी का कहना है कि शहद पैकिंग का प्रशिक्षण देकर महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं इस काम को करके अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं। पैकिंग के काम से जुड़ी महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे रही हैं।