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Yamuna Nagar News: हथिनीकुंड बैराज पर जलस्तर घटने से बिजली उत्पादन प्रभावित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2024 05:57 AM IST
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Electricity production affected due to decrease in water level at Hathnikund Barrage
प्रतापनगर/यमुनानगर। हथिनीकुंड बैराज पर वीरवार को शाम को जलस्तर घटकर 3352 क्यूसेक रह गया। इस दौरान पश्चिमी यमुना नहर में 2509 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की गई जबकि उत्तर प्रदेश को 491 क्यूसेक तो यमुना नदी में 352 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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अधिकारियों के मुताबिक बारिश होने तक यमुना नदी का जलस्तर इसी तरह बना रहेगा। बैराज पर जलस्तर घटने से पनबिजली परियोजना प्रभावित हो रही है। वहीं यमुना के साथ बसे गांवों के लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। बैराज पर वीरवार को जलस्तर घटकर मात्र 3352 क्यूसेक रह गया, हालांकि सुबह छह बजे 7667 क्यूसेक दर्ज किया गया था।
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बैराज कार्यालय के अनुसार बारिश होने तक यमुना नदी का जलस्तर घटता रहेगा। सिर्फ बर्फ पिघलने से आने वाला पानी ही हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली को मिल पा रहा है। जल स्तर कम होने का असर बिजली उत्पादन पर भी देखा जा रहा है।
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जिला यमुनानगर की ताजेवाला स्थित पानी पर आधारित चार पनबिजली परियोजनाओं को चलाने के लिए 5400 क्यूसेक पानी की जरूरत होती है, परंतु यमुना नदी में लगातार घट रहे जलस्तर के कारण केवल 3352 क्यूसेक पानी की ही सप्लाई मिल रही है। ऐसे में चारों पनबिजली परियोजनाओं में बिजली का उत्पादन भी घट रही है।
हथिनीकुंड बैराज कार्यालय के अनुसार वीरवार को सुबह छह बजे 7667, सात बजे 7569, आठ बजे 6229, नौ बजे 6318, दस बजे 66 00, 11 बजे 7736, 12 बजे 7564, दोपहर एक बजे 7281, दो बजे 6987, तीन बजे 6436, चार बजे 4231, और शाम छह बजे 3352 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। चारों पन बिजली परियोजनाओं को चलाने के लिए 5400 क्यूसेक पानी न मिल पाने से दो इकाइयों को बंद करना पड़ रहा है। फिलहाल पानी की कमी के कारण दो इकाइयां बंद हैं।





बर्फ पिघलने से आ रहा पानी

हथिनीकुंड बैराज के गेज रीडर शेर सिंह ने बताया कि पहाड़ों में बर्फ पिघलने के बाद करीब आठ घंटे हथिनीकुंड बैराज पर पानी पहुंचने में लगता है। पानी रात में सुबह तक बढ़ता है और शाम को इसमें कमी देखने को मिलती है। उन्होंने बताया कि जब तक क्षेत्र में बारिश नहीं होती, तब तक पानी में इस प्रकार उतार चढ़ाव देखने को मिलेगा। ग्रामीणों के अनुसार यमुना नदी के साथ बसे गांवों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। अधिक गर्मी होने के चलते पशुओं को पानी पिलाने, नहलाने व सिंचाई इत्यादि के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
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