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Yamuna Nagar News: तपिश से जंगल में वन्य प्राणियों की चहलकदमी हुई कम
Wed, 29 May 2024 05:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 29 May 2024 05:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। एक तरफ जहां प्रचंड गर्मी से आमजन बेहाल है, वहीं बढ़ती गर्मी व लू का असर 11570 एकड़ में फैले कलेसर राष्ट्रीय पार्क के वन्य जीवों पर भी देखने को मिल रहा है। इससे वन्य प्राणियों की जंगल में चहलकदमी कम हो गई है।
जानवर गर्मी से राहत पाने के लिए पेड़ों की छांव में दिनभर जंगल के भीतर ही बैठते रहते हैं, ऐसे में उनकी मूवमेंट अब पर्यटकों को दिखाई नहीं देती। वन्य प्राणी विभाग के एक्सपर्ट के अनुसार जानवर सुबह छह से सात बजे या फिर शाम को छह बजे के बाद जंगल में दिखाई देते हैं, बाकी सारा दिन जंगल के अंदर तक ही पेड़ों की छांव में बैठते रहते हैं। उधर प्रचंड गर्मी के चलते जंगल सफारी भी गहरा असर पड़ रहा है। इक्का-दुक्का लोग ही अब जंगल की सैर करने के आ रहे हैं।
पशुओं की प्यास बुझाने के लिए जंगल में बनाए गए गजलरों में टैंकरों से पानी भरा जा रहा है। कलेसर के घने जंगल में लैपर्ड, हाथी, जंगली सुअर, कक्कड़, चीतल, सांभर, बंदर, लंगूर, सांप, पैंथर, सहित असंख्य जंगली जीव जंतु पाए जाते हैं। गर्मी से परेशान जंगली जानवर अपने आप को पेड़ों की छाया में बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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जानवरों को न सिर्फ पीने के लिए बल्कि गर्मी में खुद को ठंडा भी रखना होता है। इसके लिए उन्हें पानी में नहाना होता है। जबकि विभाग की तरफ से रोजाना सात से आठ टैंकर जंगल के भीतर बने गजलरों में पानी भरने का काम किया जा रहा है। विभाग के गार्ड सुमित ने बताया कि जंगल के अंदर छोटे-बड़े कई गजलर बने हैं। इन सभी की पहले सफाई की गई, उसके बाद उनमें पानी भरा गया है।
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प्रतापनगर। एक तरफ जहां प्रचंड गर्मी से आमजन बेहाल है, वहीं बढ़ती गर्मी व लू का असर 11570 एकड़ में फैले कलेसर राष्ट्रीय पार्क के वन्य जीवों पर भी देखने को मिल रहा है। इससे वन्य प्राणियों की जंगल में चहलकदमी कम हो गई है।
जानवर गर्मी से राहत पाने के लिए पेड़ों की छांव में दिनभर जंगल के भीतर ही बैठते रहते हैं, ऐसे में उनकी मूवमेंट अब पर्यटकों को दिखाई नहीं देती। वन्य प्राणी विभाग के एक्सपर्ट के अनुसार जानवर सुबह छह से सात बजे या फिर शाम को छह बजे के बाद जंगल में दिखाई देते हैं, बाकी सारा दिन जंगल के अंदर तक ही पेड़ों की छांव में बैठते रहते हैं। उधर प्रचंड गर्मी के चलते जंगल सफारी भी गहरा असर पड़ रहा है। इक्का-दुक्का लोग ही अब जंगल की सैर करने के आ रहे हैं।
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पशुओं की प्यास बुझाने के लिए जंगल में बनाए गए गजलरों में टैंकरों से पानी भरा जा रहा है। कलेसर के घने जंगल में लैपर्ड, हाथी, जंगली सुअर, कक्कड़, चीतल, सांभर, बंदर, लंगूर, सांप, पैंथर, सहित असंख्य जंगली जीव जंतु पाए जाते हैं। गर्मी से परेशान जंगली जानवर अपने आप को पेड़ों की छाया में बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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जानवरों को न सिर्फ पीने के लिए बल्कि गर्मी में खुद को ठंडा भी रखना होता है। इसके लिए उन्हें पानी में नहाना होता है। जबकि विभाग की तरफ से रोजाना सात से आठ टैंकर जंगल के भीतर बने गजलरों में पानी भरने का काम किया जा रहा है। विभाग के गार्ड सुमित ने बताया कि जंगल के अंदर छोटे-बड़े कई गजलर बने हैं। इन सभी की पहले सफाई की गई, उसके बाद उनमें पानी भरा गया है।