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दिव्यांग ने रक्तदान के लिए किया 40 किमी का सफर
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रक्तदान करता दिव्यांग वीरभान।
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। रक्त की कमी से रोजाना लोगों की जान चली जाती है। तमाम सामाजिक, धार्मिक व शिक्षण संस्थान लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बावजूद इसके रक्त की कमी पूरी नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में लोगों की जान बचाने के लिए अपना समर्पण देने पीछे नहीं हटे हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिले के दिव्यांग वीरभान ने पेश की है। वीरभान ने घर से 40 किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचकर मौत से जूझ रहे व्यक्ति को रक्त देकर उसकी जान बचाई।
वीरभान खिजराबाद के गांव शहजादवाला से शहर के एक अस्पताल एनीमिया के पीड़ित व्यक्ति को रक्त देने पहुंचा था। शहर निवासी एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति को प्रत्येक सप्ताह चार से पांच यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ती है। कोरोना संक्रमण के कारण न तो सामाजिक संस्थाओं के शिविर लग पा रहे हैं और न ही शिक्षण संस्थानों में शिविर लग रहे हैं। शनिवार को जब पीड़ित को जब जरूरत पड़ी तो कोष में रक्त नहीं था, जिससे उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने रिश्तेदारों व जान पहचान के लोगों से संपर्क किया, लेकिन रक्त का प्रबंध नहीं हो पाया। वहीं चिकित्सकों ने शीघ्र रक्त न मिलने पर हालत और ज्यादा गंभीर होने की बात कही।
ऐसे में शहर की स्माइल फाउंडेशन सदस्यों ने सोशल मीडिया के रक्तदाता ग्रुप में संदेश छोड़ा। संदेश वीरभान को मिला तो वह अस्पताल रक्तदान के लिए पहुंच गया। समय पर रक्त मिलने से मरीज की जान बच गई। रक्तदाता वीरभान चलने फिरने में असमर्थ हैं। वह कृत्रिम टांग लगाकर चलते हैं। वीरभान ने कहा कि उन्हें जब से रक्तदान के महत्व का पता चला है, वह निरंतर रक्तदान कर रहे हैं। वह छह बार रक्तदान कर चुका है। उसने बताया कि स्माइल फाउंडेउशन की प्रेरणा से वह यह कर सका है। इससे पहले वह स्वयं को इसके लिए अयोग्य समझता था। संस्था के राहुल दुरेजा ने कहा कि वीरभान से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। ताकि रक्त की कमी को पूरा किया जा सके।
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जगाधरी। रक्त की कमी से रोजाना लोगों की जान चली जाती है। तमाम सामाजिक, धार्मिक व शिक्षण संस्थान लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बावजूद इसके रक्त की कमी पूरी नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में लोगों की जान बचाने के लिए अपना समर्पण देने पीछे नहीं हटे हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिले के दिव्यांग वीरभान ने पेश की है। वीरभान ने घर से 40 किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचकर मौत से जूझ रहे व्यक्ति को रक्त देकर उसकी जान बचाई।
वीरभान खिजराबाद के गांव शहजादवाला से शहर के एक अस्पताल एनीमिया के पीड़ित व्यक्ति को रक्त देने पहुंचा था। शहर निवासी एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति को प्रत्येक सप्ताह चार से पांच यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ती है। कोरोना संक्रमण के कारण न तो सामाजिक संस्थाओं के शिविर लग पा रहे हैं और न ही शिक्षण संस्थानों में शिविर लग रहे हैं। शनिवार को जब पीड़ित को जब जरूरत पड़ी तो कोष में रक्त नहीं था, जिससे उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने रिश्तेदारों व जान पहचान के लोगों से संपर्क किया, लेकिन रक्त का प्रबंध नहीं हो पाया। वहीं चिकित्सकों ने शीघ्र रक्त न मिलने पर हालत और ज्यादा गंभीर होने की बात कही।
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ऐसे में शहर की स्माइल फाउंडेशन सदस्यों ने सोशल मीडिया के रक्तदाता ग्रुप में संदेश छोड़ा। संदेश वीरभान को मिला तो वह अस्पताल रक्तदान के लिए पहुंच गया। समय पर रक्त मिलने से मरीज की जान बच गई। रक्तदाता वीरभान चलने फिरने में असमर्थ हैं। वह कृत्रिम टांग लगाकर चलते हैं। वीरभान ने कहा कि उन्हें जब से रक्तदान के महत्व का पता चला है, वह निरंतर रक्तदान कर रहे हैं। वह छह बार रक्तदान कर चुका है। उसने बताया कि स्माइल फाउंडेउशन की प्रेरणा से वह यह कर सका है। इससे पहले वह स्वयं को इसके लिए अयोग्य समझता था। संस्था के राहुल दुरेजा ने कहा कि वीरभान से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। ताकि रक्त की कमी को पूरा किया जा सके।
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