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Yamuna Nagar News: मन को काबू के विषय पर की चर्चा
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यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 111वें दिन महा साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने मन के चंचल होने और मन को काबू करने के विषय में विस्तार से श्रावकों को समझाया। उन्होंने बताया कि मन हमारा इतना चंचल है कि उसको काबू में करना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है लेकिन जिस व्यक्ति ने अपने मन को काबू में कर लिया है वह सब के दिलों पर राज कर सकता है। परंतु दुनिया में सबसे मुश्किल काम अगर कोई है तो है मन को काबू करना।
एक बार एक व्यक्ति एक सिद्ध संत के पास गया और उनके चरणों में वंदना की और पूछा महाराज मैं पूरी दुनिया को अपने वश में करना चाहता हूं मुझे इसका कोई उपाय बताइए। उन संत महाराज ने उनसे पूछा क्या तुम्हारी पत्नी तुम्हारे वश में है? उसे व्यक्ति ने उत्तर दिया नहीं।
महाराज अगर मैं एक बात कहता हूं तो आगे से पांच जवाब देती है। फिर उन्होंने कहा चलो कोई बात नहीं तुम्हारे पड़ोसी तो तुम्हारे कहे में होंगे उसने फिर मना कर दिया कि पड़ोसियों से भी मेरी ज्यादा बनती नहीं।फिर संत ने पूछा कि क्या तुम्हारे बच्चे तुम्हारे वश में हैं तो वह बोला महाराज आप आज की पीढ़ी के बच्चों को अच्छी तरह जानते हो उन्हें जो को वह उसे उल्टा करते हैं, अंत में संत महाराज ने उससे पूछा चलो तुम्हारा मन तो तुम्हारे वश में होगा तो उसने कहा महाराज मेरा मन बिल्कुल भी मेरे वश में नहीं है, तो संत ने अंत में कटाक्ष करते हुए कहा है भैया तुम्हारा मन तक तुम्हारे वश में नहीं है तो तुम पूरी दुनिया को कैसे अपने वश में कर सकते हो?
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सबसे पहले अपने मन को अपने वश में करो आप देखना पूरी दुनिया आपके वश में हो जाएगी।कहने का तात्पर्य यह था कि इंद्रियों पर संयम रखना और तपस्या के मार्ग पर चलना दुनिया के सबसे कठिन कामों में से एक है परंतु जिसने यह कर लिया उसने समझो मोक्ष को प्राप्त कर लिया। इसलिए महा साध्वी ने कहा कि गुरुओं की शरण में आते रहो उनसे शिक्षा लेते रहो अपने मन को साधते रहो और तपस्या के कठिन मार्ग पर अहिंसा का पालन करते हुए चलते रहो और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर लो।
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एक बार एक व्यक्ति एक सिद्ध संत के पास गया और उनके चरणों में वंदना की और पूछा महाराज मैं पूरी दुनिया को अपने वश में करना चाहता हूं मुझे इसका कोई उपाय बताइए। उन संत महाराज ने उनसे पूछा क्या तुम्हारी पत्नी तुम्हारे वश में है? उसे व्यक्ति ने उत्तर दिया नहीं।
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महाराज अगर मैं एक बात कहता हूं तो आगे से पांच जवाब देती है। फिर उन्होंने कहा चलो कोई बात नहीं तुम्हारे पड़ोसी तो तुम्हारे कहे में होंगे उसने फिर मना कर दिया कि पड़ोसियों से भी मेरी ज्यादा बनती नहीं।फिर संत ने पूछा कि क्या तुम्हारे बच्चे तुम्हारे वश में हैं तो वह बोला महाराज आप आज की पीढ़ी के बच्चों को अच्छी तरह जानते हो उन्हें जो को वह उसे उल्टा करते हैं, अंत में संत महाराज ने उससे पूछा चलो तुम्हारा मन तो तुम्हारे वश में होगा तो उसने कहा महाराज मेरा मन बिल्कुल भी मेरे वश में नहीं है, तो संत ने अंत में कटाक्ष करते हुए कहा है भैया तुम्हारा मन तक तुम्हारे वश में नहीं है तो तुम पूरी दुनिया को कैसे अपने वश में कर सकते हो?
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सबसे पहले अपने मन को अपने वश में करो आप देखना पूरी दुनिया आपके वश में हो जाएगी।कहने का तात्पर्य यह था कि इंद्रियों पर संयम रखना और तपस्या के मार्ग पर चलना दुनिया के सबसे कठिन कामों में से एक है परंतु जिसने यह कर लिया उसने समझो मोक्ष को प्राप्त कर लिया। इसलिए महा साध्वी ने कहा कि गुरुओं की शरण में आते रहो उनसे शिक्षा लेते रहो अपने मन को साधते रहो और तपस्या के कठिन मार्ग पर अहिंसा का पालन करते हुए चलते रहो और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर लो।