{"_id":"6859a551feda263b56010bb9","slug":"diaphragm-wall-will-act-as-a-rock-in-front-of-hathinikund-barrage-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1018-139808-2025-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: हथिनीकुंड बैराज के सामने चट्टान का कार्य करेगी डायाफ्राम वॉल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: हथिनीकुंड बैराज के सामने चट्टान का कार्य करेगी डायाफ्राम वॉल
Tue, 24 Jun 2025 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 24 Jun 2025 12:34 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की लाइफलाइन कहे जाने वाले हथिनीकुंड बैराज भविष्य में सुरक्षित रहे इसके मद्देनजर उसके सामने 146 करोड़ रुपये की लागत डायाफ्राम वॉल का निर्माण किया जा रहा है, जोकि चट्टान की तरह कार्य करेगी। इस वॉल को बनाने का 40 प्रतिशत कार्य हो चुका है।
मानसून सीजन को देखते हुए बाकी कार्य अगले छह माह में पूरा होने की संभावना है। मानसून से पहले हथिनीकुंड बैराज पर एक लाख क्यूसेक पानी पहुंच गया तो अधूरा कार्य पूरा होने में दिक्कत हो जाएगी। इस डायाफ्राम वॉल को शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा बनाया जा रहा है। जिसकी लंबाई 246 मीटर, चौड़ाई 2 मीटर और गहराई 21 मीटर है।
बरसात के सीजन में आने वाले पानी की वजह से यमुना नदी का तल कटाव के चलते गहरा हो गया है। इससे हथिनीकुंड बैराज की नींव को कभी भी नुकसान हो सकता है। बैराज के खतरे के मद्देनजर पुल की सुरक्षा को लेकर करोड़ों की लागत से डायाफ्राम वॉल व अन्य कार्य करवाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
हथिनीकुंड बैराज चार राज्यों हरियाणा उत्तर प्रदेश , दिल्ली और राजस्थान के जल बंटवारे को लेकर बना एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है, जो जिला सहारनपुर और यमुनानगर की सीमा पर स्थित है। दिल्ली की लगभग 60 प्रतिशत जल आपूर्ति हथिनीकुंड बैराज से ही होती है। यमुना नदी के मुख्य प्रवाह के अलावा हथिनीकुंड से दो नहरें निकलती हैं, जिसमें पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर है। पश्चिमी नहर से हरियाणा में यमुनानगर, करनाल और पानीपत के क्षेत्रों को पानी मिलता है, जबकि पूर्वी यमुना नहर से उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, शामली और बागपत आदि को पानी जाता है।
लगभग 40 प्रतिशत कार्य हो चुका है दिन-रात कार्य किया जा रहा है। डायाफ्राम वॉल की लंबाई 246 मीटर, चौड़ाई 2 मीटर व गहराई 21 मीटर है। यह कार्य शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया जा रहा है। जब तक हथिनीकुंड बैराज में बरसात का पानी नहीं आ जाता तब तक कार्य चलता रहेगा। पानी आने पर कार्य बंद कर दिया जाएगा बाकी का कार्य है बरसात का सीजन खत्म होने के बाद शुरू किया जाएगा। जिसमें 6 महीने का समय ओर लगेगा। - विजय कुमार गर्ग, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
विज्ञापन
प्रतापनगर। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की लाइफलाइन कहे जाने वाले हथिनीकुंड बैराज भविष्य में सुरक्षित रहे इसके मद्देनजर उसके सामने 146 करोड़ रुपये की लागत डायाफ्राम वॉल का निर्माण किया जा रहा है, जोकि चट्टान की तरह कार्य करेगी। इस वॉल को बनाने का 40 प्रतिशत कार्य हो चुका है।
मानसून सीजन को देखते हुए बाकी कार्य अगले छह माह में पूरा होने की संभावना है। मानसून से पहले हथिनीकुंड बैराज पर एक लाख क्यूसेक पानी पहुंच गया तो अधूरा कार्य पूरा होने में दिक्कत हो जाएगी। इस डायाफ्राम वॉल को शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा बनाया जा रहा है। जिसकी लंबाई 246 मीटर, चौड़ाई 2 मीटर और गहराई 21 मीटर है।
विज्ञापन
बरसात के सीजन में आने वाले पानी की वजह से यमुना नदी का तल कटाव के चलते गहरा हो गया है। इससे हथिनीकुंड बैराज की नींव को कभी भी नुकसान हो सकता है। बैराज के खतरे के मद्देनजर पुल की सुरक्षा को लेकर करोड़ों की लागत से डायाफ्राम वॉल व अन्य कार्य करवाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
हथिनीकुंड बैराज चार राज्यों हरियाणा उत्तर प्रदेश , दिल्ली और राजस्थान के जल बंटवारे को लेकर बना एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है, जो जिला सहारनपुर और यमुनानगर की सीमा पर स्थित है। दिल्ली की लगभग 60 प्रतिशत जल आपूर्ति हथिनीकुंड बैराज से ही होती है। यमुना नदी के मुख्य प्रवाह के अलावा हथिनीकुंड से दो नहरें निकलती हैं, जिसमें पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर है। पश्चिमी नहर से हरियाणा में यमुनानगर, करनाल और पानीपत के क्षेत्रों को पानी मिलता है, जबकि पूर्वी यमुना नहर से उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, शामली और बागपत आदि को पानी जाता है।
लगभग 40 प्रतिशत कार्य हो चुका है दिन-रात कार्य किया जा रहा है। डायाफ्राम वॉल की लंबाई 246 मीटर, चौड़ाई 2 मीटर व गहराई 21 मीटर है। यह कार्य शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया जा रहा है। जब तक हथिनीकुंड बैराज में बरसात का पानी नहीं आ जाता तब तक कार्य चलता रहेगा। पानी आने पर कार्य बंद कर दिया जाएगा बाकी का कार्य है बरसात का सीजन खत्म होने के बाद शुरू किया जाएगा। जिसमें 6 महीने का समय ओर लगेगा। - विजय कुमार गर्ग, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।