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Yamuna Nagar News: छछरौली राइस मिल में रखे धान की सुपरदारी डीएफएससी को मिली
Fri, 12 Dec 2025 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 12 Dec 2025 01:37 AM IST
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राइस मिल में रखी धान की बोरियां। आर्काइव
- फोटो : ramban news
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। धान के गबन का मामला सामने आने के बाद राइस मिलों में बचे पड़े धान को खरीद एजेंसियों ने अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया है। न्यायालय के माध्यम से वीरवार को छछरौली स्थित राइस मिल में रखे करीब 8,000 क्विंटल धान की सुपरदारी डीएफएससी को मिल गई। इस धान की अब डीएफएससी द्वारा किसी दूसरी राइस मिल में कुटाई करवाई जाएगी ताकि चावल समय रहते एफसीआई को सप्लाई किया जा सके। प्रतापनगर की राइस मिलों में रखे धान की सुपरदारी के लिए जल्द ही सुनवाई में फैसला हो जाएगा।
हैफेड व डीएफएससी दोनों ही सातों राइस मिलों में बचे हुए धान को अपने नियंत्रण में लेना चाहते हैं। इसके लिए दोनों ने ही न्यायालय में अर्जी लगाई हुई है। क्योंकि मामले में प्राथमिक दर्ज है इसलिए धान को अपने नियंत्रण में लेने के लिए न्यायालय से अनुमति लेनी होगी। धान की सुपरदारी के लिए न्यायालय में पहली सुनवाई 26 नवंबर को होनी थी, लेकिन लगातार सुनवाई टलने से यह तय नहीं हो पा रहा था कि राइस मिलों में बचा धान कौन सी खरीद एजेंसी को दिया जाए।
दरअसल प्रतापनगर की चार राइस मिल एक ही परिसर में चल रही हैं। इसलिए यह तय नहीं हो पा रहा है कि धान के जो बैग बचे पड़े हैं उनमें से हैफेड का कौन सा है और डीएफएससी का कौन सा है। रिकॉर्ड के अनुसार डीएफएससी ने राइस मिलर को हैफेड से ज्यादा धान दिया हुआ है। डीएफएससी के वकील की तरफ से अदालत में कहा गया है कि वह हैफेड के साथ आधा धान साझा करने को तैयार है। यदि दोनों को आधा-आधा धान मिलता है तो उन्हें कोई एतराज नहीं है। सात में से एक राइस मिल में रखा धान अब डीएफएससी को मिल चुका है।
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मुख्यालय में अटकी कार्रवाई की फाइल :
धान गबन के मामले में डीएफएससी की तरफ से माना गया है कि व्यासपुर, प्रतापनगर व छछरौली मंडियों में हुई धान खरीद के बाद राइस मिलर को दी गई धान मामले में ठीक से निगरानी नहीं की गई। इसके लिए उन्होंने अपने विभाग के तीन इंस्पेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यालय में लिखा हुआ है। जहां से इन्हें चार्जशीट किया जा सकता है। परंतु कार्रवाई की फाइल विभाग के मुख्यालय में अटक गई है। वहीं दूसरी तरफ हैफेड अपने सीनियर मैनेजर, फील्ड इंस्पेक्टर व टेक्निकल ऑफिसर को निलंबित कर चुका है।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद राइस मिलों में पड़े धान को लेने के लिए विभाग की तरफ से न्यायालय में सुपरदारी की अर्जी लगाई गई थी। छछरौली मिल में रखे करीब 8,000 क्विंटल धान को उठाने की अनुमति हमें मिल गई है। जल्द ही इसकी कुटाई करवाई जाएगी।
- जतिन मित्तल, डीएफएससी, यमुनानगर।
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यमुनानगर। धान के गबन का मामला सामने आने के बाद राइस मिलों में बचे पड़े धान को खरीद एजेंसियों ने अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया है। न्यायालय के माध्यम से वीरवार को छछरौली स्थित राइस मिल में रखे करीब 8,000 क्विंटल धान की सुपरदारी डीएफएससी को मिल गई। इस धान की अब डीएफएससी द्वारा किसी दूसरी राइस मिल में कुटाई करवाई जाएगी ताकि चावल समय रहते एफसीआई को सप्लाई किया जा सके। प्रतापनगर की राइस मिलों में रखे धान की सुपरदारी के लिए जल्द ही सुनवाई में फैसला हो जाएगा।
हैफेड व डीएफएससी दोनों ही सातों राइस मिलों में बचे हुए धान को अपने नियंत्रण में लेना चाहते हैं। इसके लिए दोनों ने ही न्यायालय में अर्जी लगाई हुई है। क्योंकि मामले में प्राथमिक दर्ज है इसलिए धान को अपने नियंत्रण में लेने के लिए न्यायालय से अनुमति लेनी होगी। धान की सुपरदारी के लिए न्यायालय में पहली सुनवाई 26 नवंबर को होनी थी, लेकिन लगातार सुनवाई टलने से यह तय नहीं हो पा रहा था कि राइस मिलों में बचा धान कौन सी खरीद एजेंसी को दिया जाए।
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दरअसल प्रतापनगर की चार राइस मिल एक ही परिसर में चल रही हैं। इसलिए यह तय नहीं हो पा रहा है कि धान के जो बैग बचे पड़े हैं उनमें से हैफेड का कौन सा है और डीएफएससी का कौन सा है। रिकॉर्ड के अनुसार डीएफएससी ने राइस मिलर को हैफेड से ज्यादा धान दिया हुआ है। डीएफएससी के वकील की तरफ से अदालत में कहा गया है कि वह हैफेड के साथ आधा धान साझा करने को तैयार है। यदि दोनों को आधा-आधा धान मिलता है तो उन्हें कोई एतराज नहीं है। सात में से एक राइस मिल में रखा धान अब डीएफएससी को मिल चुका है।
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मुख्यालय में अटकी कार्रवाई की फाइल :
धान गबन के मामले में डीएफएससी की तरफ से माना गया है कि व्यासपुर, प्रतापनगर व छछरौली मंडियों में हुई धान खरीद के बाद राइस मिलर को दी गई धान मामले में ठीक से निगरानी नहीं की गई। इसके लिए उन्होंने अपने विभाग के तीन इंस्पेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यालय में लिखा हुआ है। जहां से इन्हें चार्जशीट किया जा सकता है। परंतु कार्रवाई की फाइल विभाग के मुख्यालय में अटक गई है। वहीं दूसरी तरफ हैफेड अपने सीनियर मैनेजर, फील्ड इंस्पेक्टर व टेक्निकल ऑफिसर को निलंबित कर चुका है।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद राइस मिलों में पड़े धान को लेने के लिए विभाग की तरफ से न्यायालय में सुपरदारी की अर्जी लगाई गई थी। छछरौली मिल में रखे करीब 8,000 क्विंटल धान को उठाने की अनुमति हमें मिल गई है। जल्द ही इसकी कुटाई करवाई जाएगी।
- जतिन मित्तल, डीएफएससी, यमुनानगर।