{"_id":"68d98cc781adc4de720b5122","slug":"devotees-were-told-the-importance-of-fasting-during-navratri-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-144588-2025-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताया नवरात्र के व्रत का महत्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताया नवरात्र के व्रत का महत्व
Mon, 29 Sep 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 29 Sep 2025 01:00 AM IST
विज्ञापन
सत्संग के दौरान करतीं साध्वियां। संस्थान
- फोटो : mathura
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में साध्वी वंशिका भारती ने प्रवचन किया। इस दौरान साध्वी वंशिका ने श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्र पर्व में छिपे आध्यात्मिक पक्ष के बारे में बताया। नवरात्र के नौ दिन तप, त्याग और संयम से आत्म उत्थान का सरल माध्यम है।
साध्वी ने कहा कि साधक अपनी निरंतर ध्यान साधना से उस परम शक्ति के वास्तविक स्वरूप से जुड़ता है, जो ब्रह्मांड के हर कण में वास करती है। हमारी प्रगति व कल्याण के मार्ग में मन ही सबसे बड़ा बाधक है, किंतु निरंतर अभ्यास से यह बाधक मन ही साधक बन जाता है। मन पर विजय प्राप्त करना सहज और सरल नहीं है।
उन्होंने कहा कि साधना की प्रारंभिक अवस्था में मन बार बार अधो पतन की ओर उन्मुख करता है। परंतु एक पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ गुरु के सानिध्य में आने से उनकी दिव्य तरंगों व ओज से विचलित मन भी सद्मार्ग पर अग्रसर होता है। इसी कारण सत्संग का महत्व बताया गया है। सत्संग से मन को दिशा प्राप्त होती है, सेवा से मन का अहंकार व स्वार्थ की प्रवृत्ति समाप्त हो जाती है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि सुमिरन से भूत, भविष्य, वर्तमान की व्यर्थ चिंताओं से मन मुक्ति प्राप्त कर लेता है और साधना से मन अपने वास्तविक स्वरूप से जुड़ जाता है। इसके बाद सदैव भटकाते रहने वाला मन ही हमें सद्मार्ग की ओर प्रेरित करने वाला मित्रवत् व्यवहार करता है। यह सत्य है कि अनियंत्रित मन ही सबसे बड़ा शत्रु है, लेकिन मन को नियंत्रित करने के लिए हम कभी अग्रसर ही नहीं होते। स्वाध्याय व आत्मचिंतन मन को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है।
साध्वी ने कहा कि सकारात्मक विचारों में सधा हुआ मन हमारे लिए शांति और प्रेरणा देने वाला स्रोत बन जाता है। उन्होंने कहा कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान प्रत्येक मानव के मन पर ही कार्य करने हेतु कटिबद्ध है, ताकि संपूर्ण मानव जाति अपने ही मन द्वारा रचित भ्रमजाल से निकलकर वास्तविक शुद्ध, शांत व सत्य स्वरूप में स्थित होकर सुखी व संपन्न जीवन जी पाए। अपने मन पर विजय प्राप्त कर के अंत में जीवन से हार कर नहीं अपितु जीतकर संसार से जाए।
विज्ञापन
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में साध्वी वंशिका भारती ने प्रवचन किया। इस दौरान साध्वी वंशिका ने श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्र पर्व में छिपे आध्यात्मिक पक्ष के बारे में बताया। नवरात्र के नौ दिन तप, त्याग और संयम से आत्म उत्थान का सरल माध्यम है।
साध्वी ने कहा कि साधक अपनी निरंतर ध्यान साधना से उस परम शक्ति के वास्तविक स्वरूप से जुड़ता है, जो ब्रह्मांड के हर कण में वास करती है। हमारी प्रगति व कल्याण के मार्ग में मन ही सबसे बड़ा बाधक है, किंतु निरंतर अभ्यास से यह बाधक मन ही साधक बन जाता है। मन पर विजय प्राप्त करना सहज और सरल नहीं है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि साधना की प्रारंभिक अवस्था में मन बार बार अधो पतन की ओर उन्मुख करता है। परंतु एक पूर्ण ब्रह्मनिष्ठ गुरु के सानिध्य में आने से उनकी दिव्य तरंगों व ओज से विचलित मन भी सद्मार्ग पर अग्रसर होता है। इसी कारण सत्संग का महत्व बताया गया है। सत्संग से मन को दिशा प्राप्त होती है, सेवा से मन का अहंकार व स्वार्थ की प्रवृत्ति समाप्त हो जाती है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि सुमिरन से भूत, भविष्य, वर्तमान की व्यर्थ चिंताओं से मन मुक्ति प्राप्त कर लेता है और साधना से मन अपने वास्तविक स्वरूप से जुड़ जाता है। इसके बाद सदैव भटकाते रहने वाला मन ही हमें सद्मार्ग की ओर प्रेरित करने वाला मित्रवत् व्यवहार करता है। यह सत्य है कि अनियंत्रित मन ही सबसे बड़ा शत्रु है, लेकिन मन को नियंत्रित करने के लिए हम कभी अग्रसर ही नहीं होते। स्वाध्याय व आत्मचिंतन मन को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है।
साध्वी ने कहा कि सकारात्मक विचारों में सधा हुआ मन हमारे लिए शांति और प्रेरणा देने वाला स्रोत बन जाता है। उन्होंने कहा कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान प्रत्येक मानव के मन पर ही कार्य करने हेतु कटिबद्ध है, ताकि संपूर्ण मानव जाति अपने ही मन द्वारा रचित भ्रमजाल से निकलकर वास्तविक शुद्ध, शांत व सत्य स्वरूप में स्थित होकर सुखी व संपन्न जीवन जी पाए। अपने मन पर विजय प्राप्त कर के अंत में जीवन से हार कर नहीं अपितु जीतकर संसार से जाए।

सत्संग के दौरान करतीं साध्वियां। संस्थान- फोटो : mathura