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Yamuna Nagar News: श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर
Mon, 27 Jul 2026 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 27 Jul 2026 12:23 AM IST
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राधा कृष्ण मंदिर में कथा के दौरान प्रवचन करते कथावाचक। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। शहर के पक्के घाट स्थित श्रीनागेश्वर धाम मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा रविवार को भी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ जारी रही। कथा के पांचवें दिन कथावाचक धनंजय शास्त्री ने भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग का वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
धनंजय शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर राजा जनक की नगरी जनकपुर पहुंचे, जहां उत्सव का माहौल था। विवाह से पहले श्रीराम और सीता की भेंट फूलों की वाटिका में हुई थी, जहां माता सीता ने गौरी माता की पूजा कर श्रीराम को पति रूप में पाने की कामना की थी।
उन्होंने बताया कि राजा जनक ने शिवजी के पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने वाले वीर से सीता विवाह की घोषणा की थी। बड़े-बड़े राजा धनुष को हिला तक नहीं सके, लेकिन गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष टूट गया। इसके बाद अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुर पहुंचे और विधि-विधान से श्रीराम-सीता विवाह संपन्न हुआ।
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रादौर। शहर के पक्के घाट स्थित श्रीनागेश्वर धाम मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा रविवार को भी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ जारी रही। कथा के पांचवें दिन कथावाचक धनंजय शास्त्री ने भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग का वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
धनंजय शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर राजा जनक की नगरी जनकपुर पहुंचे, जहां उत्सव का माहौल था। विवाह से पहले श्रीराम और सीता की भेंट फूलों की वाटिका में हुई थी, जहां माता सीता ने गौरी माता की पूजा कर श्रीराम को पति रूप में पाने की कामना की थी।
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उन्होंने बताया कि राजा जनक ने शिवजी के पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने वाले वीर से सीता विवाह की घोषणा की थी। बड़े-बड़े राजा धनुष को हिला तक नहीं सके, लेकिन गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष टूट गया। इसके बाद अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुर पहुंचे और विधि-विधान से श्रीराम-सीता विवाह संपन्न हुआ।
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