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Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं ने खेली फूलों की होली
Sun, 01 Mar 2026 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 01 Mar 2026 12:03 AM IST
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छछरौली में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन सुनने पहुंचे श्रद्धालु। आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। जीबीपीएस भक्त वृंद में श्रीमद्भागवत कथा करवाई जा रही है। कथा में श्री कृष्ण प्राकट्य, गिरिराज उत्सव, श्रीकृष्ण विवाहोत्सव, फूल होली उत्सव मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण के रूप धरे कलाकारों के साथ होली खेली और जमकर झूमे। कथा व्यास कृष्ण तत्ववेत्ता तेजस्वी दास ने श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप और जीवन उद्देश्य के बारे में बताया। प्रवचन में उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण में शरीर और आत्मा में भेद नहीं है।
जीव का शरीर प्रारब्ध के अनुसार संसार में रहता है और प्रारब्ध समाप्त होने पर शरीर का अंत हो जाता है, किंतु आत्मा अविनाशी और चेतन तत्व है। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण कर्म से बंधे नहीं हैं और उनके द्वारा की गई लीलाएं दिव्य हैं। श्रीकृष्ण व श्रीराम को स्वेच्छामय बताया गया है, उनके इच्छा के विरुद्ध उनके जीवन में कोई कार्य नहीं होता।
कथा में गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान अजन्मा, अविनाशी, अद्वय ज्ञान तत्व हैं। उन्होंने बताया कि जीव जन्म और मृत्यु के चक्र में बंधे हैं, जबकि भगवान उससे परे हैं। जीव का परम उद्देश्य कृष्ण प्रेम की प्राप्ति है।
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छछरौली। जीबीपीएस भक्त वृंद में श्रीमद्भागवत कथा करवाई जा रही है। कथा में श्री कृष्ण प्राकट्य, गिरिराज उत्सव, श्रीकृष्ण विवाहोत्सव, फूल होली उत्सव मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण के रूप धरे कलाकारों के साथ होली खेली और जमकर झूमे। कथा व्यास कृष्ण तत्ववेत्ता तेजस्वी दास ने श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप और जीवन उद्देश्य के बारे में बताया। प्रवचन में उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण में शरीर और आत्मा में भेद नहीं है।
जीव का शरीर प्रारब्ध के अनुसार संसार में रहता है और प्रारब्ध समाप्त होने पर शरीर का अंत हो जाता है, किंतु आत्मा अविनाशी और चेतन तत्व है। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण कर्म से बंधे नहीं हैं और उनके द्वारा की गई लीलाएं दिव्य हैं। श्रीकृष्ण व श्रीराम को स्वेच्छामय बताया गया है, उनके इच्छा के विरुद्ध उनके जीवन में कोई कार्य नहीं होता।
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कथा में गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान अजन्मा, अविनाशी, अद्वय ज्ञान तत्व हैं। उन्होंने बताया कि जीव जन्म और मृत्यु के चक्र में बंधे हैं, जबकि भगवान उससे परे हैं। जीव का परम उद्देश्य कृष्ण प्रेम की प्राप्ति है।
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