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Yamuna Nagar News: संत नामदेव के जीवन चरित्र का किया वर्णन
Wed, 04 Jun 2025 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 04 Jun 2025 12:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। व्यासपुर स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय कृष्ण कथा के दूसरे दिन कथा व्यास साध्वी कालिंदी भारती ने संत नामदेव के जीवन चरित्र का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि यूं तो संत नामदेव को विट्ठल भगवान के साक्षात दर्शन होते थे, लेकिन फिर भी विट्ठल भगवान ने उन्हें गुरु की शरण में जाने के लिए प्रेरित किया। जब उन्हें ब्रह्मनिष्ठ संत विशोबा खेचर मिले तभी उन्हें विट्ठल का तत्व स्वरूप में दर्शन हुआ। जिसके पश्चात वे भक्ति की उस पराकाष्ठा तक पहुंच पाए, जहां तक पहुंचने के लिए ही एक जीवात्मा को मानव तन की प्राप्ति होती है। इस मौके पर मुख्य अतिथि जिला परिषद चेयरमैन रमेश ठसका रहे।
उन्होंने कहा कि परमात्मा की सबसे पहली कृपा है जब किसी जीवात्मा को मानव तन की प्राप्ति हो जाती है। किसी भक्त व संत जन के परिवार में जन्म होना और बालपन से ही भक्ति के संस्कार मन, बुद्धि व चित्त में ग्रहण करना ये दूसरी कृपा होती है। अपने जीवन के परम लक्ष्य और परमात्मा को जानने की तड़प तथा अंतरात्मा में संसार के प्रति वैराग्य पैदा होना परमात्मा की तीसरी कृपा है।
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परमात्मा की चौथी कृपा एक जीवात्मा को तभी प्राप्त होती है, जब वह अपना अहंकार त्यागकर साकार स्वरूप परमात्मा स्वयं गुरु के शरणागत होकर ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति कर निष्ठापूर्वक चलते हुए अपने जीवन को मनुष्यत्व से देवत्व की ओर अग्रसर करता है। उसका पुरुषार्थ परोपकार की भावना से परिपूर्ण और स्वार्थ रहित होता है। एक सच्चा साधक, जो मन वचन कर्म से एक हो चुका हो, केवल वही परमात्मा से एकत्व स्थापित कर लेता है।
वह स्व कल्याण के साथ लोक कल्याण का माध्यम बनता है। उसका संपूर्ण जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित हो जाता है। भक्तों के चरित्र एवं भगवान की कथाओं का मर्म केवल इतना है कि हम उन्हें केवल श्रवण करने तक सीमित न रहे, अपितु श्रवण करने के साथ जीवन में आत्मसात करके अपने व्यवहार, व्यक्तित्व और आचरण को शुद्ध करें ताकि हमारी आत्मा भी परमात्मा से एक हो पाए।
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व्यासपुर। व्यासपुर स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय कृष्ण कथा के दूसरे दिन कथा व्यास साध्वी कालिंदी भारती ने संत नामदेव के जीवन चरित्र का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि यूं तो संत नामदेव को विट्ठल भगवान के साक्षात दर्शन होते थे, लेकिन फिर भी विट्ठल भगवान ने उन्हें गुरु की शरण में जाने के लिए प्रेरित किया। जब उन्हें ब्रह्मनिष्ठ संत विशोबा खेचर मिले तभी उन्हें विट्ठल का तत्व स्वरूप में दर्शन हुआ। जिसके पश्चात वे भक्ति की उस पराकाष्ठा तक पहुंच पाए, जहां तक पहुंचने के लिए ही एक जीवात्मा को मानव तन की प्राप्ति होती है। इस मौके पर मुख्य अतिथि जिला परिषद चेयरमैन रमेश ठसका रहे।
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उन्होंने कहा कि परमात्मा की सबसे पहली कृपा है जब किसी जीवात्मा को मानव तन की प्राप्ति हो जाती है। किसी भक्त व संत जन के परिवार में जन्म होना और बालपन से ही भक्ति के संस्कार मन, बुद्धि व चित्त में ग्रहण करना ये दूसरी कृपा होती है। अपने जीवन के परम लक्ष्य और परमात्मा को जानने की तड़प तथा अंतरात्मा में संसार के प्रति वैराग्य पैदा होना परमात्मा की तीसरी कृपा है।
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परमात्मा की चौथी कृपा एक जीवात्मा को तभी प्राप्त होती है, जब वह अपना अहंकार त्यागकर साकार स्वरूप परमात्मा स्वयं गुरु के शरणागत होकर ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति कर निष्ठापूर्वक चलते हुए अपने जीवन को मनुष्यत्व से देवत्व की ओर अग्रसर करता है। उसका पुरुषार्थ परोपकार की भावना से परिपूर्ण और स्वार्थ रहित होता है। एक सच्चा साधक, जो मन वचन कर्म से एक हो चुका हो, केवल वही परमात्मा से एकत्व स्थापित कर लेता है।
वह स्व कल्याण के साथ लोक कल्याण का माध्यम बनता है। उसका संपूर्ण जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित हो जाता है। भक्तों के चरित्र एवं भगवान की कथाओं का मर्म केवल इतना है कि हम उन्हें केवल श्रवण करने तक सीमित न रहे, अपितु श्रवण करने के साथ जीवन में आत्मसात करके अपने व्यवहार, व्यक्तित्व और आचरण को शुद्ध करें ताकि हमारी आत्मा भी परमात्मा से एक हो पाए।