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Yamuna Nagar News: डीसी ने धान के अवशेष जलाते पकड़ा किसान, कार्रवाई के दिए आदेश
Thu, 26 Sep 2024 07:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 26 Sep 2024 07:07 AM IST
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यमुनानगर। डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने सरस्वती नगर मंडी से रादौर मंडी जाते समय रादौरी गांव समीप खेतों में धान के अवशेष जलाते किसान पकड़ा। किसान को थाना प्रभारी को सौंपकर कार्रवाई करने के आदेश दिए। उन्होंने इस बारे में एसपी गंगाराम पूनिया को आदेश दिए कि पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ी 112 के माध्यम से खेतों में फाने जलाने वालों पर नजर रखी जाए और उन पर तुरंत कार्रवाई करें।
डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 में प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत जिले में धान की फसल के बचे अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इन आदेशों की अवहेलना में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो वह भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दंड का पात्र होगा। यह आदेश खरीफ सीजन समाप्त होने तक प्रभावी रहेंगे। डीसी ने बताया कि जिले की सीमा के भीतर धान की फसल की कटाई के बाद पराली को न जलाएं, क्योंकि धान की फसल के अवशेषों को जलाने से जो वायु प्रदूषण होता है, उससे मनुष्य के स्वास्थ्य, संपत्ति की हानि, तनाव, क्रोध या मानव जीवन को भारी खतरे की संभावना बनी रहती है। आग लगने से आसपास के क्षेत्रों में जानमाल की हानि भी हो सकती है तथा चारे की भी कमी हो जाती है, जबकि उन अवशेषों से पशुओं के लिए तूड़ी (चारा) बनाया जा सकता है।
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डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 में प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत जिले में धान की फसल के बचे अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इन आदेशों की अवहेलना में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो वह भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दंड का पात्र होगा। यह आदेश खरीफ सीजन समाप्त होने तक प्रभावी रहेंगे। डीसी ने बताया कि जिले की सीमा के भीतर धान की फसल की कटाई के बाद पराली को न जलाएं, क्योंकि धान की फसल के अवशेषों को जलाने से जो वायु प्रदूषण होता है, उससे मनुष्य के स्वास्थ्य, संपत्ति की हानि, तनाव, क्रोध या मानव जीवन को भारी खतरे की संभावना बनी रहती है। आग लगने से आसपास के क्षेत्रों में जानमाल की हानि भी हो सकती है तथा चारे की भी कमी हो जाती है, जबकि उन अवशेषों से पशुओं के लिए तूड़ी (चारा) बनाया जा सकता है।
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