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मां की अर्थी को बेटियों ने दिया कंधा
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मां की अर्थी को कंधा देती बेटियां। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। गांव गुमथला के नंबरदार दीप राणा की माता बिमला देवी (80) के निधन पर रविवार को चार बेटियों ने उनकी अर्थी को कंधा देकर ग्रामीणों को बेटे व बेटी के एक समान होने का संदेश दिया। मृतका के शव को उनके पोते जितेंद्र राणा ने मुखाग्नि दी।
बिमला देवी ने अपनी मृत्यु के बाद आंखें दान करने का संकल्प लिया था। इस पर उनकी आंखें माधव नेत्र बैंक करनाल को दान की गईं। उनकी आंखों से 2 लोग दुनिया को फिर से देख सकेंगे। आंखें दान करने की समाज के लोगों ने भरपूर प्रशंसा की है। नंबरदार दीप राणा ने बताया कि उनकी माता बिमला देवी कुछ समय से बीमार चल रही थी। उनकी इच्छा थी कि उनकी आंखें मृत्यु के बाद दान की जाएं। उनकी इच्छानुसार आंखें दान की गई हैं।
उन्होंने बताया उनकी बहन रानी इंसा, गुड्डी इंसा, गीतु इंसा, बॉबी इंसा व सोहन इंसा ने मां की अर्थी को कंधा देकर सभी को संदेश दिया कि समाज में बेटा और बेटी एक समान हैं। दोनो में कोई फर्क नहीं है। डेरा सच्चा सौदा की ओर से भी यही संदेश दिया गया है कि बेटियां भी अपने मां-बाप की अर्थी को बेटे के समान कंधा दे सकती हैं। इससे समाज में बेटे और बेटी के बीच के फर्क को खत्म किया जा सकता है।
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रादौर। गांव गुमथला के नंबरदार दीप राणा की माता बिमला देवी (80) के निधन पर रविवार को चार बेटियों ने उनकी अर्थी को कंधा देकर ग्रामीणों को बेटे व बेटी के एक समान होने का संदेश दिया। मृतका के शव को उनके पोते जितेंद्र राणा ने मुखाग्नि दी।
बिमला देवी ने अपनी मृत्यु के बाद आंखें दान करने का संकल्प लिया था। इस पर उनकी आंखें माधव नेत्र बैंक करनाल को दान की गईं। उनकी आंखों से 2 लोग दुनिया को फिर से देख सकेंगे। आंखें दान करने की समाज के लोगों ने भरपूर प्रशंसा की है। नंबरदार दीप राणा ने बताया कि उनकी माता बिमला देवी कुछ समय से बीमार चल रही थी। उनकी इच्छा थी कि उनकी आंखें मृत्यु के बाद दान की जाएं। उनकी इच्छानुसार आंखें दान की गई हैं।
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उन्होंने बताया उनकी बहन रानी इंसा, गुड्डी इंसा, गीतु इंसा, बॉबी इंसा व सोहन इंसा ने मां की अर्थी को कंधा देकर सभी को संदेश दिया कि समाज में बेटा और बेटी एक समान हैं। दोनो में कोई फर्क नहीं है। डेरा सच्चा सौदा की ओर से भी यही संदेश दिया गया है कि बेटियां भी अपने मां-बाप की अर्थी को बेटे के समान कंधा दे सकती हैं। इससे समाज में बेटे और बेटी के बीच के फर्क को खत्म किया जा सकता है।
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