{"_id":"f48025f21c856ab1516dc5d73f594d92","slug":"dangers-overbirdge-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरों से खाली नहीं बाईपास पुल का सफर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरों से खाली नहीं बाईपास पुल का सफर
यमुनानगर/ब्यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2015 12:25 AM IST
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एनएच-73 (चंडीगढ़-रुड़की) पर बने शहर के इकलौते बाईपास पुल का करीब आधा किलोमीटर सफर खतरों से खाली नहीं है। रास्ते के बीच न तो सफेद पट्टी (पैज व सेंटर लाइन) है और न ही वाहन चालकों को दिशा-निर्देश देने को पूर्व सूचना बोर्ड व संकेतक ही हैं। यही नहीं पुल के दोनों ओर जगह-जगह रेलिंग भी टूटी हुई है।
इन्हीं खामियों के बीच आए दिन वाहनों के पलटने व टकराने की घटनाएं होती हैं, जो पुल के नीचे से गुजर रही रेल लाइनों के चलते बड़े हादसे में बदल सकती हैं। खासकर गन्ना पिराई के वक्त ट्रैफिक दबाव बढ़ने और फोग सीजन में हादसों का ग्राफ भी बढ़ता है, किंतु संबंधित विभाग इस दिशा में कोई कार्रवाई करते नहीं दिख रहे हैं।
विश्वकर्मा चौक से कमानी चौक के बीच करीब आधा किलोमीटर बाईपास पुल का सफर पड़ता है। कुरुक्षेत्र-सहारनपुर (यूपी) से शहर आने-जाने का यही मुख्य रास्ता है। इसी रास्ते शहर से होते हुए ट्रैफिक अंबाला, हिमाचल, उत्तराखंड को आता-जाता है। इस कारण मार्ग से 24 घंटे वाहनों की आवाजाही रहती है।
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विभिन्न राज्यों की रोडवेज बसों के अलावा लकड़ी, प्लाई, गन्ना सहित अन्य कारोबारों से जुड़ी सामग्री को लेकर वाहन आते-जाते हैं। जबकि जिले की आधी आबादी को भी पुल शहर से जोड़ता है। इस कारण स्थानीय लोगों का (खासकर नौकरीपेशा-शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी) भी कामकाज के लिए बाईपास से रोज का आना-जाना रहता है। कई दशक पहले बने बाईपास पुल पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
बावजूद इसके बाईपास पुल की चौड़ाई ज्यों की त्यों है वहीं, यातायात नियंत्रण के कोई प्रबंध नहीं हैं। मार्ग पर कहीं भी सफेद पट्टी (पैज व सेंटर लाइन) नहीं है। जबकि सड़क पर वाहनों को सुरक्षित व सुगम तरीके से सुचारु रखने को सफेद पट्टी काफी कारगर है।
खासकर रात के समय व धुंध बढने पर वाहन चालक इसकी मद्द से सही दिशा को भांप पाता है। जबकि इसके अभाव में सड़क किनारे से उतर कर चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठता है और खुद व वाहन में सवार और अन्य वाहन व उसमें सवार लोगों को हादसे की चपेट में ले लेता है।
मार्ग पर न बर्म-रोशनी और न ही संकेतक
पुल पर सफेद पट्टी के अलवा बर्म भी गायब है। मार्ग के दोनों ओर एक-एक फुट कच्चा रास्ता है, उसके भी खस्ताहाल होने से बाइक-साइकिल सवार व राहगीरों को हादसे का खतरा रहता है। सफेद पट्टी व बर्म के अभाव में भारी वाहन मार्ग के किनारे कच्चे रास्ते से भी होकर गुजरने लगते हैं।
ऐसे में दोपहिया चालकों व राहगीरों में हादसे का भय रहता है। पुल के आधा किलोमीटर मार्ग के दोनों ओर रात में रोशनी का प्रबंध भी नहीं है वहीं, सिर्फ एक बोर्ड (जिस पर लिखा है-आगे जंक्शन है, धीरे चले।) को छोड़ कहीं कोई संकेतक व पूर्व सूचना बोर्ड नहीं लगा है। कहने को एक जगह ब्लिंकर भी लगाया गया है, किंतु वह भी टूटा होने से किसी काम नहीं आ रहा है।
पुल के दोनों छोर हुए एक्सिडेंटल प्वाइंट में तब्दील
बाईपास के दोनों छोर विश्वकर्मा चौक व चांदपुर मोड़ पर जहां पुल उतरता है, वह दोनों एक्सिडेंटल प्वाइंट में तब्दील हो चुके हैं। कारण कुछ और नहीं, बाईपास से तेज रफ्तार में उतरते वाहनों के बीच से दोनों तरफ वाहन चालकों व राहगीरों द्वारा क्रॉसिंग करना है।
नतीजतन सुबह-शाम लोग पुल के दोनों छोर पर जान जोखिम में डाल रास्ता पार कर रहे हैं। जबकि यहां जेब्रा क्रॉसिंग, कैट आई सहित अन्य ट्रैफिक कंट्रोल डिवाइस नहीं हैं। ऐसे में ट्रैफिक कर्मचारियों की गैर-मौजूदगी में सड़क पार करते हुए राहगीर व वाहन चालक बाईपास से आ-जा रहे वाहनों के सामने आ जाते हैं और कई बार हादसे का भी शिकार हो चुके हैं। इन्हीं दोनों प्वाइंट पर कई हादसे हो चुके हैं, किंतु वर्षों से चली आ रही अंडरपास की मांग आज तक पूरी नहीं हो पाई है।
शॉटकट के फेर में जोखिम में डाल रहे जान
बाईपास पुल पर दोनों ओर जगह-जगह रेलिंग टूटी हुई है। इसका इस्तेमाल पुल के दोनों ओर बसी कॉलोनियों के लोगों शॉटकट के रूप में कर रहे हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। पुल के दोनों ओर बसी गुलाब नगर, वीना नगर कॉलोनियों के निवासी सुबह-शाम इन टूटी रेलिंग के बीच से निकलते दिख जाते हैं।
बाईपास पुल पर वाहनों की आवाजाही के बीच इस तरह लोगों का गुजरना खतरे से खाली नहीं है, किंतु लोग खुद-ब-खुद अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। उधर, संबंधित विभाग रेलिंग दुरुस्त करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। जबकि पुल के नीचे से बसे लोगों व गुजर रही रेल लाइनों के मद्देनजर यहां रेलिंग न होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
मीटिंग से हटा दिए एक्सिडेंटल प्वाइंट, कैसे बनेगी बात
ओम सेवा संस्थान के निर्देशक व जिला रोड सेफ्टी कमेटी के को-ऑडिनेटर एडवोकेट सुशील आर्य का कहना है कि रात में व धुंध में मार्ग पर सफेद पट्टी (पैज व सेंटर लाइन) के साथ पूर्व सूचना के रेट्रो रिफ्लेक्टर बोर्ड व संकेतक व अन्य ट्रैफिक कंट्रोल डिवासिज होने जरूरी हैं।
जिला रोड सेफ्टी कमेटी की मीटिंग में कई बार इस बारे सचेत कर चुके हैं। बाईपास उतरने वाला स्थान एक्सिडेंटल प्वाइंट है, किंतु उच्च अधिकारियों द्वारा इस प्वाइंट को ही मीटिंग से हटा दिया गया। जबकि यहां रोजाना लोगों द्वारा मार्ग क्रॉसिंग से हादसे का डर बना रहता है। ऐसे में यहां अंडरपास बनाया जाना अनिवार्य है।
वर्जन
सफेद पट्टी (पैज व सेंटर लाइन) खिंचवाने का काम किया जा रहा है। बाईपास पुल पर जरूरत अनुसार सफेद पट्टी सहित अन्य कार्यों को लेकर काम किया जाएगा।
ओसी माथुर, प्रोजेक्ट ऑफिसर, एनएचएआई।
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इन्हीं खामियों के बीच आए दिन वाहनों के पलटने व टकराने की घटनाएं होती हैं, जो पुल के नीचे से गुजर रही रेल लाइनों के चलते बड़े हादसे में बदल सकती हैं। खासकर गन्ना पिराई के वक्त ट्रैफिक दबाव बढ़ने और फोग सीजन में हादसों का ग्राफ भी बढ़ता है, किंतु संबंधित विभाग इस दिशा में कोई कार्रवाई करते नहीं दिख रहे हैं।
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विश्वकर्मा चौक से कमानी चौक के बीच करीब आधा किलोमीटर बाईपास पुल का सफर पड़ता है। कुरुक्षेत्र-सहारनपुर (यूपी) से शहर आने-जाने का यही मुख्य रास्ता है। इसी रास्ते शहर से होते हुए ट्रैफिक अंबाला, हिमाचल, उत्तराखंड को आता-जाता है। इस कारण मार्ग से 24 घंटे वाहनों की आवाजाही रहती है।
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विभिन्न राज्यों की रोडवेज बसों के अलावा लकड़ी, प्लाई, गन्ना सहित अन्य कारोबारों से जुड़ी सामग्री को लेकर वाहन आते-जाते हैं। जबकि जिले की आधी आबादी को भी पुल शहर से जोड़ता है। इस कारण स्थानीय लोगों का (खासकर नौकरीपेशा-शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी) भी कामकाज के लिए बाईपास से रोज का आना-जाना रहता है। कई दशक पहले बने बाईपास पुल पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
बावजूद इसके बाईपास पुल की चौड़ाई ज्यों की त्यों है वहीं, यातायात नियंत्रण के कोई प्रबंध नहीं हैं। मार्ग पर कहीं भी सफेद पट्टी (पैज व सेंटर लाइन) नहीं है। जबकि सड़क पर वाहनों को सुरक्षित व सुगम तरीके से सुचारु रखने को सफेद पट्टी काफी कारगर है।
खासकर रात के समय व धुंध बढने पर वाहन चालक इसकी मद्द से सही दिशा को भांप पाता है। जबकि इसके अभाव में सड़क किनारे से उतर कर चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठता है और खुद व वाहन में सवार और अन्य वाहन व उसमें सवार लोगों को हादसे की चपेट में ले लेता है।
मार्ग पर न बर्म-रोशनी और न ही संकेतक
पुल पर सफेद पट्टी के अलवा बर्म भी गायब है। मार्ग के दोनों ओर एक-एक फुट कच्चा रास्ता है, उसके भी खस्ताहाल होने से बाइक-साइकिल सवार व राहगीरों को हादसे का खतरा रहता है। सफेद पट्टी व बर्म के अभाव में भारी वाहन मार्ग के किनारे कच्चे रास्ते से भी होकर गुजरने लगते हैं।
ऐसे में दोपहिया चालकों व राहगीरों में हादसे का भय रहता है। पुल के आधा किलोमीटर मार्ग के दोनों ओर रात में रोशनी का प्रबंध भी नहीं है वहीं, सिर्फ एक बोर्ड (जिस पर लिखा है-आगे जंक्शन है, धीरे चले।) को छोड़ कहीं कोई संकेतक व पूर्व सूचना बोर्ड नहीं लगा है। कहने को एक जगह ब्लिंकर भी लगाया गया है, किंतु वह भी टूटा होने से किसी काम नहीं आ रहा है।
पुल के दोनों छोर हुए एक्सिडेंटल प्वाइंट में तब्दील
बाईपास के दोनों छोर विश्वकर्मा चौक व चांदपुर मोड़ पर जहां पुल उतरता है, वह दोनों एक्सिडेंटल प्वाइंट में तब्दील हो चुके हैं। कारण कुछ और नहीं, बाईपास से तेज रफ्तार में उतरते वाहनों के बीच से दोनों तरफ वाहन चालकों व राहगीरों द्वारा क्रॉसिंग करना है।
नतीजतन सुबह-शाम लोग पुल के दोनों छोर पर जान जोखिम में डाल रास्ता पार कर रहे हैं। जबकि यहां जेब्रा क्रॉसिंग, कैट आई सहित अन्य ट्रैफिक कंट्रोल डिवाइस नहीं हैं। ऐसे में ट्रैफिक कर्मचारियों की गैर-मौजूदगी में सड़क पार करते हुए राहगीर व वाहन चालक बाईपास से आ-जा रहे वाहनों के सामने आ जाते हैं और कई बार हादसे का भी शिकार हो चुके हैं। इन्हीं दोनों प्वाइंट पर कई हादसे हो चुके हैं, किंतु वर्षों से चली आ रही अंडरपास की मांग आज तक पूरी नहीं हो पाई है।
शॉटकट के फेर में जोखिम में डाल रहे जान
बाईपास पुल पर दोनों ओर जगह-जगह रेलिंग टूटी हुई है। इसका इस्तेमाल पुल के दोनों ओर बसी कॉलोनियों के लोगों शॉटकट के रूप में कर रहे हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। पुल के दोनों ओर बसी गुलाब नगर, वीना नगर कॉलोनियों के निवासी सुबह-शाम इन टूटी रेलिंग के बीच से निकलते दिख जाते हैं।
बाईपास पुल पर वाहनों की आवाजाही के बीच इस तरह लोगों का गुजरना खतरे से खाली नहीं है, किंतु लोग खुद-ब-खुद अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। उधर, संबंधित विभाग रेलिंग दुरुस्त करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। जबकि पुल के नीचे से बसे लोगों व गुजर रही रेल लाइनों के मद्देनजर यहां रेलिंग न होने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
मीटिंग से हटा दिए एक्सिडेंटल प्वाइंट, कैसे बनेगी बात
ओम सेवा संस्थान के निर्देशक व जिला रोड सेफ्टी कमेटी के को-ऑडिनेटर एडवोकेट सुशील आर्य का कहना है कि रात में व धुंध में मार्ग पर सफेद पट्टी (पैज व सेंटर लाइन) के साथ पूर्व सूचना के रेट्रो रिफ्लेक्टर बोर्ड व संकेतक व अन्य ट्रैफिक कंट्रोल डिवासिज होने जरूरी हैं।
जिला रोड सेफ्टी कमेटी की मीटिंग में कई बार इस बारे सचेत कर चुके हैं। बाईपास उतरने वाला स्थान एक्सिडेंटल प्वाइंट है, किंतु उच्च अधिकारियों द्वारा इस प्वाइंट को ही मीटिंग से हटा दिया गया। जबकि यहां रोजाना लोगों द्वारा मार्ग क्रॉसिंग से हादसे का डर बना रहता है। ऐसे में यहां अंडरपास बनाया जाना अनिवार्य है।
वर्जन
सफेद पट्टी (पैज व सेंटर लाइन) खिंचवाने का काम किया जा रहा है। बाईपास पुल पर जरूरत अनुसार सफेद पट्टी सहित अन्य कार्यों को लेकर काम किया जाएगा।
ओसी माथुर, प्रोजेक्ट ऑफिसर, एनएचएआई।