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Yamuna Nagar News: स्वच्छता पर करोड़ों खर्च फिर भी रैंकिंग में पिछड़े

Tue, 16 Jan 2024 03:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 16 Jan 2024 03:59 AM IST
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Crores spent on cleanliness yet lagging behind in ranking
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। नगर निगम की ओर से करोड़ों खर्च के बावजूद शहर स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 की रैंकिंग में पिछड़ गया। इसके लिए निवर्तमान पार्षद सवाल अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आरोप है कि कचरा उठान से निस्तारण, नालों की सफाई जैसे काम करोड़ों रुपये में ठेके पर दे दिए गए, पर ठेके के तहत तय नियमों को अफसरों ने पूरा नहीं कराया। यही वजह है कि पूरे साल डोर टू डोर कचरा उठान व निस्तारण की व्यवस्था होने पर भी सड़कों पर कचरा रहा, जिसने स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग बिगाड़ी।
स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में राष्ट्र स्तर पर शहर का 170 रैंक रहा, जिसमें स्वच्छ सर्वेक्षण-2023 में 51 पायदान नीचे गिरकर शहर 221वें रैंक पर आ गया। ऐसा तब है, जब सालभर में डोर टू डोर कचरा उठान निस्तारण का 26 करोड़ व नालों की सफाई का 1.41 करोड़ के ठेके दिए गए।
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इसके अलावा स्वीपिंग मशीन सहित अन्य कचरा उठान वाहनों व शौचालयों के रखरखाव व सफाई के सामान व स्वच्छता बारे लोगों को जागरूक करने पर भी लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बाद भी शहर की स्वच्छता रैंकिंग बिगड़ने पर निवर्तमान पार्षद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
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निवर्तमान पार्षदों में रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि सालभर निगम अफसरों का ध्यान टेंडर लगाने व वर्क अलॉट में रहा, पर उसके तहत निर्धारित नियमों को संबंधित एजेंसियों से पूरा नहीं कराया। चाहे डोर टू डोर कचरा उठान से निस्तारण हो या नालों की सफाई का ठेका, उसमें तय नियम पूरे नहीं थे।
इसमें जरूरी नियमों में एक नियमित डोर टू डोर कचरा उठान था, पर नियमित के बजाए वार्डों की कॉलोनियों व मोहल्लों में कई दिन व हफ्ते में कचरा उठान वाहन पहुंचे। इससे घरों में एकत्र कचरे को लोग मजबूरन बाहर खुले में गिराने पर मजबूर हुए। ऐसे ही नालों की सफाई का ठेका उस समय किया गया, जब मानसून सिर पर था।
आरोप है कि बारिश के दिनों में नालों की सफाई के नाम पर खानापूर्ति हुई। इन्हीं कमियाें पर हो सकता है सर्वे करने आई केंद्रीय टीमों की नजर गई, जिससे शहर की रैंकिंग करोड़ों खर्च के बाद भी सुधारने के बजाए बिगड़ गई।

सात वर्षों में स्वच्छता रैंकिंग
वर्ष - रैंक
2017 - 346
2018 - 310
2019 - 218
2020 - 147
2021 - 243
2022 - 170
2023 - 221
रैंकिंग पर समीक्षा की जा रही है। शहर की स्वच्छता के लिए और प्रयास होंगे। इसके लिए सफाई शाखा के अफसरों को दिशा निर्देश दिए हैं।- आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।
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