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Yamuna Nagar News: उठान पर करोड़ों खर्च फिर भी खुले में बिखरा कचरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 08 Mar 2025 12:36 AM IST
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Crores of rupees are spent on lifting but still garbage is scattered in the open
यमुनानगर। शहर से कचरा उठान पर हर माह करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हो रहा है। इसके बाद भी खुले में गिर रहा कचरा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। निवर्तमान पार्षदों से लेकर शहर के लोग भी सवाल कर रहे हैं कि इतने खर्च के बाद भी खुले स्थानों व प्लॉटों में कचरा क्यों गिर रहा है। उनकी मानें तो कई इलाकों में डोर टू डोर कचरा उठान रोज नहीं होता, जहां लोग भवनों का कचरा खुले में गिराने पर मजबूर हैं। ज्यादा खराब स्थिति निगम में शामिल गांवों सहित शहर के आउटर इलाकों में हैं।
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शहर के आउटर में लगते गांव सहित अंदर भी कई इलाकों में रोज कचरा उठान नियमित नहीं है। जहां खुले में बिखरे कचरे पर शहर में आने वाली केंद्रीय टीम की नजर पड़ती है तो स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में नंबर कट सकते हैं। बता दें कि वर्ष-2023 में डोर टू डोर कचरा उठान से निस्तारण का काम शहर को 11-11 वार्ड के दो जोन में बांट दो एजेंसियों को दिया गया। तब एजेंसियों से 26 करोड़ रुपये में ठेका हुआ। वर्ष-2024 में पूरे शहर का एक जोन बनाकर एक ही एजेंसी को 19 करोड़ रुपये में ठेका दिया गया। इस हिसाब से हर माह डोर टू डोर कचरा उठान से निस्तारण के काम पर करीब 1.58 करोड़ रुपये खर्च हो रहा है। इसके बाद भी
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गलियों-सड़कों किनारे कचरा दिख रहा है। खासकर खाली प्लांट भी कचरा डंप करने के स्थान बने हुए हैं। यही कचरा बारिश में निकासी व्यवस्था बिगाड़ने का काम कर रहा है। साथ ही कचरे से दुर्गंध और बढ़ते मक्खी-मच्छर लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा खुले में गिरते कचरे से शहर की स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में रैंक बिगड़ने की आशंका है।
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ऐसे ही गत वर्ष सफाई के कामों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग 51 पायदान नीचे गिरकर 170 से 221 पर आ गई। इसकी वजह निवर्तमान पार्षद काम पर सही निगरानी न होना बता रहे हैं। निवर्तमान पार्षद रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह, निर्मल चौहान ने कहा कि कचरा उठान से निस्तारण सहित सफाई के अन्य काम करोड़ों रुपये के खर्च से ठेके पर दिए जाते हैं।
ठेके के समय ई-निविदा में काम के लिए सैकड़ों नियम होते हैं, पर धरातल पर वह पूरे नहीं किए जाते। डोर-टू-डोर कचरा उठान नियमित करने का नियम हैं, पर रोज के बजाय एक-दो दिन बाद कचरा उठान के वाहन आते हैं। ऐसे में लोग अपने भवनों में इकट्ठा किए कचरे से दुर्गंध व मक्खी-मच्छर की परेशानी देख कचरे को आसपास खुले स्थानों पर गिरा देते हैं। कचरे को वाहनों में ढक कर ले जाने और अलग-अलग रखने व उठान की व्यवस्था नहीं बन पाई। यही कमियां स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग बिगाड़ सकती है।

गत वर्षों में स्वच्छता रैंकिंग:
वर्ष - रैंक
2017 - 346
2018 - 310
2019 - 218
2020 - 147
2021 - 243
2022 - 170
2023 - 221
वर्जन-
डोर टू डोर कचरा उठान नियमित हो रहा है। जहां कहीं उठान न होने का पता लगता है, वहां तुरंत कचरा उठान वाहन भेज कर कचरा उठान कराया जाता है।- हरजीत सिंह, सीएसआई, नगर निगम।
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