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Yamunanagar: फर्जी दस्तावेज देकर बैंक से लोन लेकर हड़पे 37.85 लाख रुपये, सात लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

Wed, 31 Jan 2024 05:24 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 31 Jan 2024 05:24 PM IST
सार

जमीन की नकली मलकीयत से संबंधित दस्तावेज दिए थे, किश्त जमा न कराने पर जांच हुई तो पता चला। शहर पुलिस ने मां-बेटे समेत सात लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। 

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Yamunanagar: Grabbed Rs 37.85 lakh by taking loan from bank by giving fake documents
demo pic - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के यमुनानगर में नकली मलकीयत से संबंधित दस्तावेज देकर कुछ लोगों ने इक्विटास स्माल फाइनेंस बैंक से 37 लाख 85 हजार रुपये का लोन ले लिया। जब बैंक से लिया लोन नहीं चुकाया गया तो अधिकारियों ने जिस जमीन से संबंधित दस्तावेज दिए उनकी जांच कराई। जांच में दस्तावेज फर्जी निकलने पर मामला खुला। बैंक प्रतिनिधि सज्जन कुमार ने इसकी शिकायत शहर पुलिस को दी।

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शहर पुलिस ने मामले में प्रोफेसर कॉलोनी निवासी कार्तिक तलवार, उसकी मां आशा तलवार, करनाल के शामगढ़ गांव निवासी अमित कुमार, लाडवा बालाजी फाइनेंशियल सर्विसेज के संचालक विजय कुमार, सुखविंद्र सिंह, बिलासपुर निवासी सुरिंदर कौर व उचाना निवासी रेखा रानी के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का केस दर्ज किया है।
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इक्विटास स्माल फाइनेंस बैंक के अधिकृत प्रतिनिधि सज्जन कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि पिछले साल प्रोफेसर कॉलोनी निवासी कार्तिक तलवार ने आशा तलवार, अमित कुमार, विजय कुमार, सुखविंद्र सिंह, सुरिंदर कौर व रेखा रानी के साथ मिलीभगत कर बैंक में लोन के लिए आवेदन किया था। आरोपियों ने बैंक में जमीन संबंधी दस्तावेज दिए और 37 लाख 85 हजार रुपये का लोन ले लिया।
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लोन की पूरी राशि लेने के बाद आरोपियों ने एक भी किश्त जमा नहीं कराई। जब बैंक में किश्त जमा नहीं हुई तो उन्होंने लोन के दौरान दिए गए जमीन के दस्तावेजों की जांच कराई। आरोप है कि जिस जमीन के दस्तावेज दिए गए थे। उनकी मलकीयत किसी और के नाम थी। बैंक में नकली मलकीयत देकर लोन लिया गया। इस बारे में पुलिस को शिकायत दी गई।


शिकायत पर डीएसपी ने जांच की। आरोप है कि जांच में आरोपियों को नहीं बुलाया गया। जिस संपत्ति के दस्तावेज आरोपियों ने दिए थे। उसका सीमांकन कराया गया। सीमांकन रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। लेकिन बाद में उनकी शिकायत बंद कर दी गई। उसने दोबारा दिसंबर माह में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। जिस पर अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों पर केस दर्ज किया।

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