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फोर्थ क्लास ने अस्मत रौंदी, अस्पताल प्रशासन ने भी नहीं छोड़ी कसर
ब्यूरो/अमर उजाला,यमुनानगर
Updated Thu, 07 Jul 2016 12:23 AM IST
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रेप
- फोटो : ब्यूरो
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यमुनानगर। ट्रामा सेंटर में मंदबुद्धि लड़की के साथ रेप की घटना से पूरे अस्पताल की व्यवस्था कटघरे में आ गई है। एक तरफ तो आउट सोर्सिंग से रखे गए फोर्थ क्लास कर्मचारी ने मंदबुद्धि युवती की अस्मत के साथ खिलवाड़ किया वहीं बाकी रही-सही कसर अस्पताल प्रशासन ने पूरी कर दी। अस्पताल प्रशासन ने रेप पीड़िता को अलग वार्ड देने की बजाय महिला वार्ड में ही रखा तथा अमानवीयता की हद करते हुए बेड से उसके हाथ-पैर बांध दिए।
ट्रामा सेंटर में 24 घंटे डाक्टरों व स्टाफ की ड्यूटी होती है। रात करीब डेढ़ बजे फोर्थ क्लास कर्मचारी मंदबुद्धि लड़की को महिला वार्ड से अपने साथ लेकर बगल में बने एमरजेंसी रूम में ले जाता है। महिला वार्ड से निकलते ही दाहिनी तरफ रिसेप्शन है, जहां नर्सों की ड्यूटी होती है।
लड़की को एमरजेंसी वार्ड में ले जाते समय रिसेप्शन पर कोई मौजूद नहीं था। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि लड़की की चीखने की आवाज सुनकर एक नर्स इमरजेंसी की ओर आई, तब तक आरोपी कर्मचारी भी एमरजेंसी रूम से बाहर आ गया था। इसके बार डाक्टर को फोन कर मौके पर बुलाया गया। यानि घटना के समय डाक्टर भी वहां नहीं थे।
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रात को ट्रामा सेंटर में एक सिक्योरिटी गार्ड की भी ड्यूटी होती है। सवाल यह भी है कि उस समय सिक्योरिटी गार्ड कहां था। आरोपी कर्मचारी के नशे की हालत में होने से सीधे तौर पर अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही बनती है।
आउट सोर्सिंग से रखे गए एक फोर्थ क्लास कर्मचारी ने जिस प्रकार रात को नशे की हालत में एक लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया तथा अस्पताल प्रशासन की जो लापरवाही इस मामले में सामने आई हैं, उससे अस्पताल में भर्ती अन्य महिलाओं की अस्मत भी खतरे में नजर आ रही है।
121 कर्मचारी रखे गए हैं कांट्रेक्ट पर
अस्पताल में आउट सोर्सिंग पर कर्मचारियों को रखने की बाढ़ सी आ गई है। लेकिन इसमें नियम कानून को ताक पर रखा जा रहा है। नियमानुसार कांट्रेक्ट पर रखने वाले कर्मचारी का चरित्र प्रमाण पत्र व उसकी पुलिस वेरिफिकेशन होनी चाहिए। लेकिन इसकी पालना नहीं की जा रही है। कांट्रेक्ट पर रखे गए किसी कर्मचारी का आपराधिक रिकार्ड भी हो सकता है।
गौरतलब है कि ट्रामा सेंटर व सिविल अस्पताल में कुल 121 कर्मचारी आउट सोर्सिंग से रखे गए हैं। इनमें 80 कर्मचारी क्लास फोर्थ, स्वीपर व गार्ड के पद पर हैं। करीब दो महीने पहले आउट सोर्सिंग पर रखे गए कर्मचारियों ने ठेकेदार पर पैसे लेकर कर्मचारियों को रखने का आरोप लगाया था। उस समय इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था।
महिला वार्ड में दिन भर बेड पर पड़ी रही पीड़िता
रेप का शिकार हुई मंद बुद्धि लड़की के प्रति अस्पताल प्रशासन ने कोई संवेदना नहीं दिखाई। इस घटना के बाद दिन भर अस्पताल में पुलिस व मीडिया का आना जारी रहा। लेकिन अस्पताल ने इस रेप पीड़िता की प्राइवेसी की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
उल्टे महिला वार्ड में ही एक बेड पर पीड़िता को लिटाकर उसके हाथ-पैर बांध दिए गए ताकि वह कही चली न जाए। पीड़िता के कपड़े बदलने की किसी ने जहमत नहीं उठाई और न ही उसके पास कोई अटेंडेंट बिठाया गया।
मंदबुद्धि पिंकी की भी ट्रामा सेंटर में हुई थी उपेक्षा
ट्रामा सेंटर में करीब डेढ़ सप्ताह पहले नग्गल की एक मंदबुद्धि को रखा गया था। महिलाओं के लिए काम करने वाली उत्थान संस्था की निदेशिका डॉ. अंजू वाजपेयी उसे ट्रामा सेंटर लेकर आई थी। डॉ. अंजू वाजपेयी ने बताया कि मंदबुद्धि पिंकी की ट्रामा सेंटर में कोई देखभाल नहीं की गई। वह खुद पिंकी के लिए चार जोड़ी कपड़े खरीदकर दे गई थी, लेकिन किसी ने उसके कपड़े नहीं बदले।
दूसरे बेड पर मौजूद मरीजों ने स्टाफ से उसके कपड़े बदलने को कहा तो स्टाफ सदस्यों ने जवाब दिया था कि जो उसे यहां लेकर आया है, वही उसके कपड़े बदलेगा।
पिंकी के कपड़ों से दुर्गंध आने पर डॉ. वाजपेयी ने अस्पताल के डाक्टर व काऊंसलर को कहा कि प्रशासन के अधिकारी इस लड़की को देखने आ रहे हैं। इसके बाद पिंकी के कपड़े बदले गए थे।
वर्जन ::::::::
मंदबुद्धि उग्र हो रही थी, इसलिए उसके हाथ-पैर बांधे गए थे। उसे कमरे में इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि अकेले आने पर फिर कोई अनहोनी होने का भय था। आरोपी कर्मचारी को ठेकेदार ने रखा था। इस घटना के बाद उसे निकाल दिया गया है। उसके सैंपल लिए गए हैं ताकि पता चल सके कि उसने शराब पी थी या नहीं। कांट्रेक्ट पर रखे जाने वाले कर्मचारियों की पुलिस वेरिफिकेशन व चरित्र प्रमाण पत्र लेने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है।
डॉ. रितु चौधरी, मेडिकल सुप्रिटेंडेंट, सिविल अस्पताल तथा ट्रामा सेंटर
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ट्रामा सेंटर में 24 घंटे डाक्टरों व स्टाफ की ड्यूटी होती है। रात करीब डेढ़ बजे फोर्थ क्लास कर्मचारी मंदबुद्धि लड़की को महिला वार्ड से अपने साथ लेकर बगल में बने एमरजेंसी रूम में ले जाता है। महिला वार्ड से निकलते ही दाहिनी तरफ रिसेप्शन है, जहां नर्सों की ड्यूटी होती है।
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लड़की को एमरजेंसी वार्ड में ले जाते समय रिसेप्शन पर कोई मौजूद नहीं था। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि लड़की की चीखने की आवाज सुनकर एक नर्स इमरजेंसी की ओर आई, तब तक आरोपी कर्मचारी भी एमरजेंसी रूम से बाहर आ गया था। इसके बार डाक्टर को फोन कर मौके पर बुलाया गया। यानि घटना के समय डाक्टर भी वहां नहीं थे।
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रात को ट्रामा सेंटर में एक सिक्योरिटी गार्ड की भी ड्यूटी होती है। सवाल यह भी है कि उस समय सिक्योरिटी गार्ड कहां था। आरोपी कर्मचारी के नशे की हालत में होने से सीधे तौर पर अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही बनती है।
आउट सोर्सिंग से रखे गए एक फोर्थ क्लास कर्मचारी ने जिस प्रकार रात को नशे की हालत में एक लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया तथा अस्पताल प्रशासन की जो लापरवाही इस मामले में सामने आई हैं, उससे अस्पताल में भर्ती अन्य महिलाओं की अस्मत भी खतरे में नजर आ रही है।
121 कर्मचारी रखे गए हैं कांट्रेक्ट पर
अस्पताल में आउट सोर्सिंग पर कर्मचारियों को रखने की बाढ़ सी आ गई है। लेकिन इसमें नियम कानून को ताक पर रखा जा रहा है। नियमानुसार कांट्रेक्ट पर रखने वाले कर्मचारी का चरित्र प्रमाण पत्र व उसकी पुलिस वेरिफिकेशन होनी चाहिए। लेकिन इसकी पालना नहीं की जा रही है। कांट्रेक्ट पर रखे गए किसी कर्मचारी का आपराधिक रिकार्ड भी हो सकता है।
गौरतलब है कि ट्रामा सेंटर व सिविल अस्पताल में कुल 121 कर्मचारी आउट सोर्सिंग से रखे गए हैं। इनमें 80 कर्मचारी क्लास फोर्थ, स्वीपर व गार्ड के पद पर हैं। करीब दो महीने पहले आउट सोर्सिंग पर रखे गए कर्मचारियों ने ठेकेदार पर पैसे लेकर कर्मचारियों को रखने का आरोप लगाया था। उस समय इस मामले ने काफी तूल पकड़ा था।
महिला वार्ड में दिन भर बेड पर पड़ी रही पीड़िता
रेप का शिकार हुई मंद बुद्धि लड़की के प्रति अस्पताल प्रशासन ने कोई संवेदना नहीं दिखाई। इस घटना के बाद दिन भर अस्पताल में पुलिस व मीडिया का आना जारी रहा। लेकिन अस्पताल ने इस रेप पीड़िता की प्राइवेसी की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
उल्टे महिला वार्ड में ही एक बेड पर पीड़िता को लिटाकर उसके हाथ-पैर बांध दिए गए ताकि वह कही चली न जाए। पीड़िता के कपड़े बदलने की किसी ने जहमत नहीं उठाई और न ही उसके पास कोई अटेंडेंट बिठाया गया।
मंदबुद्धि पिंकी की भी ट्रामा सेंटर में हुई थी उपेक्षा
ट्रामा सेंटर में करीब डेढ़ सप्ताह पहले नग्गल की एक मंदबुद्धि को रखा गया था। महिलाओं के लिए काम करने वाली उत्थान संस्था की निदेशिका डॉ. अंजू वाजपेयी उसे ट्रामा सेंटर लेकर आई थी। डॉ. अंजू वाजपेयी ने बताया कि मंदबुद्धि पिंकी की ट्रामा सेंटर में कोई देखभाल नहीं की गई। वह खुद पिंकी के लिए चार जोड़ी कपड़े खरीदकर दे गई थी, लेकिन किसी ने उसके कपड़े नहीं बदले।
दूसरे बेड पर मौजूद मरीजों ने स्टाफ से उसके कपड़े बदलने को कहा तो स्टाफ सदस्यों ने जवाब दिया था कि जो उसे यहां लेकर आया है, वही उसके कपड़े बदलेगा।
पिंकी के कपड़ों से दुर्गंध आने पर डॉ. वाजपेयी ने अस्पताल के डाक्टर व काऊंसलर को कहा कि प्रशासन के अधिकारी इस लड़की को देखने आ रहे हैं। इसके बाद पिंकी के कपड़े बदले गए थे।
वर्जन ::::::::
मंदबुद्धि उग्र हो रही थी, इसलिए उसके हाथ-पैर बांधे गए थे। उसे कमरे में इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि अकेले आने पर फिर कोई अनहोनी होने का भय था। आरोपी कर्मचारी को ठेकेदार ने रखा था। इस घटना के बाद उसे निकाल दिया गया है। उसके सैंपल लिए गए हैं ताकि पता चल सके कि उसने शराब पी थी या नहीं। कांट्रेक्ट पर रखे जाने वाले कर्मचारियों की पुलिस वेरिफिकेशन व चरित्र प्रमाण पत्र लेने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है।
डॉ. रितु चौधरी, मेडिकल सुप्रिटेंडेंट, सिविल अस्पताल तथा ट्रामा सेंटर