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जिले के इतिहास में पहली बार एक साथ 16 को ताउम्र कैद
अमर उजाला ब्यूरो यमुनानगर।
Updated Sat, 08 Oct 2016 12:09 AM IST
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योगेश हत्याकांड के 16 दोषियों को एक साथ ताउम्र की सजा सनाए जाने के फैसला इतिहास बन गया। इससे पहले जिले में कोई भी ऐसा केस नहीं आया। जिसमें एक साथ 16 दोषियों को अंतिम सांस तक जेल में कारावास की सजा सुनाई गई हो। 16 दोषियों को एक साथ सजा सुनाए जाने फैसला आने से हर कोईं दंग था। फैसला आने के बाद कुछ दोषियों के परिजनों की आंखों से आंसू झलक उठे।
शुक्रवार को जिले के इतिहास का वो अध्याय सामने आया जिसे देख सब दंग रह गए। गुरुवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके बिश्नोई ने योगेश हत्याकांड में 16 को दोषी करार दे दिया था। जबकि एक को बरी कर दिया गया था। फैसला शुक्रवार को आना था। फैसला सुनने के लिए शुक्रवार सुबह से ही जिला न्यायिक परिसर में लोगों की चहल कदमी थी। सुबह दस बजे ही सभी दोषियों को जिला न्यायालय में बनी हवालात में लाकर बंद कर दिया था। दोपहर बाद करीब चार बजे ही दोषियों के परिजन और मृतक योगेश राणा के परिजन न्यायिक परिसर में एकत्रित होने लगे। कुछ ही देर में न्यायिक परिसर में दोनों पक्षों के सैकड़ों लोगों जमा हो गए। दोनों पक्षों में विवाद न हो इसके लिए मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। शुक्रवार शाम करीब साढ़े पांच बजे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके बिश्नोई ने दोषियों को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए। इसके तुरंत बाद पुलिस 5.35 पर दोषियों को कोर्ट में लेकर गई। करीब छह बजे तक न्यायाधीश एके बिश्नोई ने जब अपना फैसला सुनाया तो सभी दंग रह गए। सभी 16 दोषियों को अंतिम सांस तक के कारावास की सजा सुनाई गई। जिसे सुन मृतक के परिजनों के साथ साथ दोषियों के परिजन भी दंग रह गए।
फैसले से बढ़ेगा न्याय के प्रति विश्वास :
योगेश का केस लड़ रहे अधिवक्ता बीएस चौहान का कहना है कि यमुनानगर में इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। जिसमें इतने लोगों को ऐसी कठोर सजा एक साथ सुनाई गई हो। करीब साढ़े तीन साल से दोषी कानून की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन सच के सामने झूठ की उम्र होती ही कितनी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद लोगों का न्यायिक प्रणाली में विश्वास और मजबूत हो गया है।
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फैसला का किया स्वागत
मृतक योगेश राणा के पिता चंद्रपाल ने कहा कि वह जिला सत्र न्यायालय के फैसले का स्वागत करते है। आखिर सच की ही जीत हुई। उन्हें उम्मीद थी कि कोर्ट दोषियों को उम्रकैद या आजीवन कारावास की सजा सुनाएगा। कोर्ट ने उनकी इस उम्मीद को पूरा किया और उन्हें न्याय दिलाया।
नते ही झलके परिजनों की आंखों से आंसू :
शुक्रवार को जिलावासियों को योगेश हत्याकांड में दोषियों का इंतजार था। मृतक योगेश के परिजनों के साथ सैकड़ों लोग कोर्ट परिसर में पहुंचे। लोग बेसब्री से कोर्ट के फैसले का इंतजार करते रहे। सुबह का इंतजार शाम करीब 6 बजे खत्म हुआ। फैसला सुनने के बाद दोषियों को जब बाहर लाया गया तो उसके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था। आंखें नीचे थी और कुछ दोषी आंखों को मलते हुए बाहर आ रहे थे। दोषी ही नहीं फैसले के बाद उनके परिजनों के चेहरे उतर गए। कुछ दोषियों के परिजनों की आंखों से आंसू झलक गए थे।
कई दिन तक चलता रहा था तनाव व समझौतों का सिलसिला :
योगेश की हत्या के बाद 18 लोगों पर हत्या का केस दर्ज किया गया। मामला दो समुदायों के बीच होने के बाद विवाद बढ़ गया था। जिससे कुछ दिन तनाव की स्थिति भी रही थी। लेकिन बाद में मामला शांत हो गया था। हत्यारों के परिजन गांव नाचरौन में मृतक योगेश के परिजनों से मिलने आए और समझौता करने की बात रखी। मौजिज लोगों से मिलकर समझौता कराने का प्रयास किया गया, लेकिन मृतक के परिजन नहीं माने और न्यायालय का फैसले का सर्वोपरि मानने की बात कहीं।
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शुक्रवार को जिले के इतिहास का वो अध्याय सामने आया जिसे देख सब दंग रह गए। गुरुवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके बिश्नोई ने योगेश हत्याकांड में 16 को दोषी करार दे दिया था। जबकि एक को बरी कर दिया गया था। फैसला शुक्रवार को आना था। फैसला सुनने के लिए शुक्रवार सुबह से ही जिला न्यायिक परिसर में लोगों की चहल कदमी थी। सुबह दस बजे ही सभी दोषियों को जिला न्यायालय में बनी हवालात में लाकर बंद कर दिया था। दोपहर बाद करीब चार बजे ही दोषियों के परिजन और मृतक योगेश राणा के परिजन न्यायिक परिसर में एकत्रित होने लगे। कुछ ही देर में न्यायिक परिसर में दोनों पक्षों के सैकड़ों लोगों जमा हो गए। दोनों पक्षों में विवाद न हो इसके लिए मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। शुक्रवार शाम करीब साढ़े पांच बजे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके बिश्नोई ने दोषियों को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए। इसके तुरंत बाद पुलिस 5.35 पर दोषियों को कोर्ट में लेकर गई। करीब छह बजे तक न्यायाधीश एके बिश्नोई ने जब अपना फैसला सुनाया तो सभी दंग रह गए। सभी 16 दोषियों को अंतिम सांस तक के कारावास की सजा सुनाई गई। जिसे सुन मृतक के परिजनों के साथ साथ दोषियों के परिजन भी दंग रह गए।
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फैसले से बढ़ेगा न्याय के प्रति विश्वास :
योगेश का केस लड़ रहे अधिवक्ता बीएस चौहान का कहना है कि यमुनानगर में इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। जिसमें इतने लोगों को ऐसी कठोर सजा एक साथ सुनाई गई हो। करीब साढ़े तीन साल से दोषी कानून की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन सच के सामने झूठ की उम्र होती ही कितनी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद लोगों का न्यायिक प्रणाली में विश्वास और मजबूत हो गया है।
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फैसला का किया स्वागत
मृतक योगेश राणा के पिता चंद्रपाल ने कहा कि वह जिला सत्र न्यायालय के फैसले का स्वागत करते है। आखिर सच की ही जीत हुई। उन्हें उम्मीद थी कि कोर्ट दोषियों को उम्रकैद या आजीवन कारावास की सजा सुनाएगा। कोर्ट ने उनकी इस उम्मीद को पूरा किया और उन्हें न्याय दिलाया।
नते ही झलके परिजनों की आंखों से आंसू :
शुक्रवार को जिलावासियों को योगेश हत्याकांड में दोषियों का इंतजार था। मृतक योगेश के परिजनों के साथ सैकड़ों लोग कोर्ट परिसर में पहुंचे। लोग बेसब्री से कोर्ट के फैसले का इंतजार करते रहे। सुबह का इंतजार शाम करीब 6 बजे खत्म हुआ। फैसला सुनने के बाद दोषियों को जब बाहर लाया गया तो उसके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था। आंखें नीचे थी और कुछ दोषी आंखों को मलते हुए बाहर आ रहे थे। दोषी ही नहीं फैसले के बाद उनके परिजनों के चेहरे उतर गए। कुछ दोषियों के परिजनों की आंखों से आंसू झलक गए थे।
कई दिन तक चलता रहा था तनाव व समझौतों का सिलसिला :
योगेश की हत्या के बाद 18 लोगों पर हत्या का केस दर्ज किया गया। मामला दो समुदायों के बीच होने के बाद विवाद बढ़ गया था। जिससे कुछ दिन तनाव की स्थिति भी रही थी। लेकिन बाद में मामला शांत हो गया था। हत्यारों के परिजन गांव नाचरौन में मृतक योगेश के परिजनों से मिलने आए और समझौता करने की बात रखी। मौजिज लोगों से मिलकर समझौता कराने का प्रयास किया गया, लेकिन मृतक के परिजन नहीं माने और न्यायालय का फैसले का सर्वोपरि मानने की बात कहीं।