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Yamunanagar: केमिकल फैक्टरी में दिल्ली की टीम ने मारा छापा, करोड़ों का प्रतिबंधित माल बरामद
Tue, 02 Aug 2022 01:00 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर/रादौर (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर/रादौर (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 02 Aug 2022 01:00 AM IST
सार
DRI ने मौके से दो लोगों को काबू किया, अन्य की तलाश है। फैक्टरी को सील कर दिया गया है। नशीली दवाएं बनाने में केमिकल का प्रयोग होने की बात सामने आ रही है। धरे गए दोनों आरोपी मुंबई के निवासी है। कोर्ट में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
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गेट पर लगाई गई सील। आरोपियों को अदालत में पेश करने ले जाती डीआरआई की टीम। फैक्टरी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
हरियाणा के यमुनानगर जिले के रादौर के सढूरा और बापौली गांव के बीच स्थित मुरलीधर इंडस्ट्रीज में न्यू दिल्ली की डीआरआई (डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) की टीम ने छापामारी की। टीम ने जांच के दौरान 661 किलो केमिकल सहित अन्य सामग्री बरामद की है, जो नशीली दवाएं बनाने में प्रयोग किया जाता है। बरामद माल की कीमत करीब 132 करोड़ रुपये बताई जा रही है। टीम ने मौके से दो लोगों को काबू किया है।
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इनकी पहचान मुंबई के शिवाजी नगर निवासी मोहम्मद आजम और मुंबई के सेक्टर-22 निवासी वफादार हुसैन के रूप में हुई है। दोनों ही केमिकल ट्रेडर्स बताए जा रहे हैं। आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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विदित हो कि सूचना के आधार पर गोपनीय तरीके से मुरलीधर इंडस्ट्रीज में छापामारी की गई। यही कारण है कि इसकी भनक स्थानीय पुलिस-प्रशासन को भी नहीं लगी। बताया जा रहा है कि छापामारी के दौरान फैक्टरी में मिले दो केमिकल ट्रेडर्स को काबू किया गया, जबकि फैक्टरी के चार पार्टनर बताए जा रहे हैं, जिनके नाम विजय कुमार, मोहित, श्यामलाल और रंजन है।
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ये सभी यमुनानगर के रहने वाले हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। टीम ने फैक्टरी से कई साक्ष्य जुटाए हैं इसके बाद इसे सील कर दिया गया। उधर, इस छापामारी से पूरे बापौली में हड़कंप मच गया, जिसे भी इस घटना के बारे में पता चला वह फैक्टरी की तरफ दौड़ा चला आया। ग्रामीणों के मुताबिक यह फैक्टरी रादौर के सढूरा व बापौली के बीच में बनी हुई है।
फैक्टरी के अंदर क्या कार्य होता है, यह किसी को कुछ पता नहीं था। आज तक किसी ने भी फैक्टरी के कर्मचारियों को अंदर-बाहर आते जाते नहीं देखा। सभी कर्मचारी फैक्टरी के अंदर ही काम करते थे। ग्रामीणों को इतना पता है यह केमिकल बनाने वाली फैक्टरी है, लेकिन क्या बनता था इसके बारे में आज तक किसी को कुछ पता नहीं चला। कारण कि इसमें कोई स्थानीय कर्मचारी नहीं रखा गया है।