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खैर तस्करों ने वन कर्मियों पर किया हमला
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Sat, 13 Feb 2016 12:11 AM IST
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जाटावाला गांव की नदी के रास्ते खैर की भरी गाड़ी का पीछा कर रही वन विभाग की टीम पर खैर तस्करों ने हमला कर दिया। तस्करों ने टीम के वाहन पर पत्थर और डंडे मारे। इस हमले में वन विभाग के कर्मचारी बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी निजी कार क्षतिग्रस्त हो गई। तस्कर गाड़ी से खैर की लकड़ी नदी में गिरा कर मौके से फरार हो गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
वन विभाग के रेंज आफिसर राजकुमार बताया कि वीरवार रात को विभाग को सूचना मिली थी कि खैर तस्कर क्षेत्र के जंगलों से खैर की लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने क्षेत्र की घेराबंदी कर तस्करों को पकड़ने की रणनीति बनाई। वन कर्मचारी टीमें बनाकर तीन-चार वाहनों में सवार होकर पूरे क्षेत्र में फैल गए। यह सभी टीम पूरी रात तस्करों की तलाश करती रही। सुबह सूत्रों के हवाले से पता चला कि खैर तस्कर दौलतपुर गांव के पास खैर से भरी गाड़ी लेकर जा रहे हैं।
सूचना मिलते ही एक कार मेें सवार वन दरोगा कुलदीप और तीन वन रक्षक उस ओर रवाना हो गए। गांव जाटांवाला के नजदीक गुजर रही नदी में गाड़ी नजर आने पर वन विभाग के कर्मचारियों ने गाड़ी को घेर लिया। गाड़ी के आगे मोटरसाइकिल सवार दो व्यक्ति भी साथ चल रहे थे। वन विभाग कर्मचारियों की कार देखकर मोटरसाइकिल सवार व्यक्तियों व गाड़ी में सवार खैर तस्करों ने डंडों व पत्थरों से हमला कर दिया। उन्होंने कार व पत्थर पर डंडे बरसाए। कार में सवार वन दरोगा ने टीम के दूसरे सदस्यों को फोन पर इसकी सूचना दी। इस दौरान खैर तस्कर मौका पाकर गाड़ी में लदी खैर की लकड़ी को नदी में गिराने लगे।
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वन विभाग की दूसरी टीम के वहां पहुंचने से पहले तस्कर खैर की लकड़ी को गाड़ी से उतारकर वहां से रफूचक्कर हो गए। विभाग की दूसरी टीम के आने के बाद उन्होंने खैर तस्करों का पीछा किया, लेकिन वे हाथ नहीं लगे। इसके बाद टीम सदस्यों ने इसकी सूचना वन विभाग के उच्च अधिकारियों को दी। सूचना मिलने पर वन विभाग के डीएफओ रविंद्र धनखड़ अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे।
भूसे में छिपाकर रखी हुई थी लकड़ी
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार छछरौली रेंज के जंगलों से खैर तस्कर कई दिनों से लकड़ी काट रहे थे। इसकी सूचना विभाग के पास थी। तस्करों द्वारा पिकअप से नदी में खाली की गई लकड़ी कई दिन पहले की काटी हुई है। लकड़ी के ऊपर भूसा लगा हुआ है। जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि खैर तस्करों ने लकड़ी काटने के बाद इसे भूसे में छुपाया था।
जाटांवाला में पहले भी अधिकारियों पर हो चुके हैं हमले
जाटांवाला गांव हमेशा से ही विवादों में रहा है। इससे पहले भी कई बार अधिकारियों व कर्मचारियों पर हमले हो चुके हैं। वर्ष 2010 में वन विभाग के जिला वन अधिकारी पर ग्रामीणों द्वारा हमला किया था। करीब तीन साल पहले दिल्ली पुलिस की टीम को गांव में बंधक बना लिया गया था। यह टीम किसी मामले में जाटोवाला गांव में आई थी। वहीं डेढ़ साल पूर्व गांव में अवैध खनन रोकने गए डीडीपीओ व तहसीलदार पर भी खनन तस्करों ने हमला किया था।
वर्जन
छछरौली रेंज के जंगलों से खैर तस्करों द्वारा कई दिनों से लकड़ी काटने की सूचना मिली थी। तस्करों को पकडन के लिए टीमें बनाई गई थी। एक टीम के वाहन पर खैर तस्करों ने हमला किया है। पुलिस को इसकी शिकायत दी जा रही है।
-रविंद्र धनखड़, डीएफओ, यमुनानगर।
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वन विभाग के रेंज आफिसर राजकुमार बताया कि वीरवार रात को विभाग को सूचना मिली थी कि खैर तस्कर क्षेत्र के जंगलों से खैर की लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने क्षेत्र की घेराबंदी कर तस्करों को पकड़ने की रणनीति बनाई। वन कर्मचारी टीमें बनाकर तीन-चार वाहनों में सवार होकर पूरे क्षेत्र में फैल गए। यह सभी टीम पूरी रात तस्करों की तलाश करती रही। सुबह सूत्रों के हवाले से पता चला कि खैर तस्कर दौलतपुर गांव के पास खैर से भरी गाड़ी लेकर जा रहे हैं।
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सूचना मिलते ही एक कार मेें सवार वन दरोगा कुलदीप और तीन वन रक्षक उस ओर रवाना हो गए। गांव जाटांवाला के नजदीक गुजर रही नदी में गाड़ी नजर आने पर वन विभाग के कर्मचारियों ने गाड़ी को घेर लिया। गाड़ी के आगे मोटरसाइकिल सवार दो व्यक्ति भी साथ चल रहे थे। वन विभाग कर्मचारियों की कार देखकर मोटरसाइकिल सवार व्यक्तियों व गाड़ी में सवार खैर तस्करों ने डंडों व पत्थरों से हमला कर दिया। उन्होंने कार व पत्थर पर डंडे बरसाए। कार में सवार वन दरोगा ने टीम के दूसरे सदस्यों को फोन पर इसकी सूचना दी। इस दौरान खैर तस्कर मौका पाकर गाड़ी में लदी खैर की लकड़ी को नदी में गिराने लगे।
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वन विभाग की दूसरी टीम के वहां पहुंचने से पहले तस्कर खैर की लकड़ी को गाड़ी से उतारकर वहां से रफूचक्कर हो गए। विभाग की दूसरी टीम के आने के बाद उन्होंने खैर तस्करों का पीछा किया, लेकिन वे हाथ नहीं लगे। इसके बाद टीम सदस्यों ने इसकी सूचना वन विभाग के उच्च अधिकारियों को दी। सूचना मिलने पर वन विभाग के डीएफओ रविंद्र धनखड़ अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे।
भूसे में छिपाकर रखी हुई थी लकड़ी
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार छछरौली रेंज के जंगलों से खैर तस्कर कई दिनों से लकड़ी काट रहे थे। इसकी सूचना विभाग के पास थी। तस्करों द्वारा पिकअप से नदी में खाली की गई लकड़ी कई दिन पहले की काटी हुई है। लकड़ी के ऊपर भूसा लगा हुआ है। जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि खैर तस्करों ने लकड़ी काटने के बाद इसे भूसे में छुपाया था।
जाटांवाला में पहले भी अधिकारियों पर हो चुके हैं हमले
जाटांवाला गांव हमेशा से ही विवादों में रहा है। इससे पहले भी कई बार अधिकारियों व कर्मचारियों पर हमले हो चुके हैं। वर्ष 2010 में वन विभाग के जिला वन अधिकारी पर ग्रामीणों द्वारा हमला किया था। करीब तीन साल पहले दिल्ली पुलिस की टीम को गांव में बंधक बना लिया गया था। यह टीम किसी मामले में जाटोवाला गांव में आई थी। वहीं डेढ़ साल पूर्व गांव में अवैध खनन रोकने गए डीडीपीओ व तहसीलदार पर भी खनन तस्करों ने हमला किया था।
वर्जन
छछरौली रेंज के जंगलों से खैर तस्करों द्वारा कई दिनों से लकड़ी काटने की सूचना मिली थी। तस्करों को पकडन के लिए टीमें बनाई गई थी। एक टीम के वाहन पर खैर तस्करों ने हमला किया है। पुलिस को इसकी शिकायत दी जा रही है।
-रविंद्र धनखड़, डीएफओ, यमुनानगर।