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दुराचार और हत्या के दोषी को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Tue, 17 Nov 2015 12:12 AM IST
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नौकरानी की दुराचार के बाद हत्या करने के दोषी जोगिंद्रनगर थाना फरकपुर निवासी जितेंद्र उर्फ जीतू को फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। कोर्ट में करीब एक साल चली सुनवाई के दौरान 12 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सोमवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
19 अगस्त, 2014 को जोगिंद्रनगर निवासी मनजीत कौर उर्फ रमन का शव कॉलोनी के ही जितेंद्र उर्फ जीतू के घर पड़ा मिला था। फरकपुर पुलिस ने मृतका के भाई सतपाल की शिकायत पर जितेंद्र के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था।
सतपाल ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसकी बहन मनजीत कौर पति से अनबन की वजह से अलग रह रही थी। वह कॉलोनी के ही जितेंद्र के घर पर खाना बनाने तथा साफ-सफाई का काम करती थी। 17 अगस्त को वह जितेंद्र के घर गई थी लेकिन लौटी नहीं। उन्होंने जब जितेंद्र के घर जाकर उसकी तलाश की, तो कुछ पता नहीं चला। जीतू और मनजीत कौर दोनों लापता मिले।
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बदबू आई तब पता चला
जब उसकी भतीजी रोजी अपनी मां के साथ जितेंद्र के घर गई, तो उसे अंदर से बदबू आई। जब उन्होंने दरवाजा खोलकर देखा, तो अंदर मनजीत कौर की लाश चादर में लिपटी पड़ी थी। मृतका का चेहरा काला पड़ा हुआ था और उसके मुंह पर बायीं और कट के निशान थे। पुलिस ने जितेंद्र के खिलाफ धारा 302 के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने 21 अगस्त को जितेंद्र को काबू किया। पूछताछ में जितेंद्र ने बताया कि 17 अगस्त को उसने मनजीत कौर के साथ दुराचार किया और फिर गंड़ासे से उसकी हत्या कर दी।
दुराचार की धारा जोड़ी
पुलिस ने इस केस में दुराचार की धारा को भी जोड़ दिया। 22 अगस्त को पुलिस ने जितेंद्र को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने जितेंद्र को भादंसं की धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि 376 में 10 साल कैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माना किया है।
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19 अगस्त, 2014 को जोगिंद्रनगर निवासी मनजीत कौर उर्फ रमन का शव कॉलोनी के ही जितेंद्र उर्फ जीतू के घर पड़ा मिला था। फरकपुर पुलिस ने मृतका के भाई सतपाल की शिकायत पर जितेंद्र के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था।
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सतपाल ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसकी बहन मनजीत कौर पति से अनबन की वजह से अलग रह रही थी। वह कॉलोनी के ही जितेंद्र के घर पर खाना बनाने तथा साफ-सफाई का काम करती थी। 17 अगस्त को वह जितेंद्र के घर गई थी लेकिन लौटी नहीं। उन्होंने जब जितेंद्र के घर जाकर उसकी तलाश की, तो कुछ पता नहीं चला। जीतू और मनजीत कौर दोनों लापता मिले।
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बदबू आई तब पता चला
जब उसकी भतीजी रोजी अपनी मां के साथ जितेंद्र के घर गई, तो उसे अंदर से बदबू आई। जब उन्होंने दरवाजा खोलकर देखा, तो अंदर मनजीत कौर की लाश चादर में लिपटी पड़ी थी। मृतका का चेहरा काला पड़ा हुआ था और उसके मुंह पर बायीं और कट के निशान थे। पुलिस ने जितेंद्र के खिलाफ धारा 302 के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने 21 अगस्त को जितेंद्र को काबू किया। पूछताछ में जितेंद्र ने बताया कि 17 अगस्त को उसने मनजीत कौर के साथ दुराचार किया और फिर गंड़ासे से उसकी हत्या कर दी।
दुराचार की धारा जोड़ी
पुलिस ने इस केस में दुराचार की धारा को भी जोड़ दिया। 22 अगस्त को पुलिस ने जितेंद्र को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने जितेंद्र को भादंसं की धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि 376 में 10 साल कैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माना किया है।