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बच्ची से दुराचार के दोषी को दस साल कैद
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर
Updated Fri, 11 Sep 2015 11:58 PM IST
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चॉकलेट का लालच देकर छह साल की बच्ची से दुराचार करने के दोषी वृद्ध को कोर्ट ने 10 साल कैद तथा सात हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब एक साल चली सुनवाई के दौरान 16 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार थाना छप्पर के अंतर्गत आने वाले एक गांव निवासी व्यक्ति ने 3 अगस्त, 2014 को छप्पर पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उसके पास पांच लड़कियां व दो लड़के हैं। तीन अगस्त को गांव के मंदिर में भंडारा चल रहा था, तो उसकी सबसे छोटी बेटी (6) बच्चों के साथ मंदिर के बाहर खेल रही थी।
दोपहर को करीब डेढ़ बजे उसकी बेटी एकाएक मंदिर के बाहर से लापता हो गई। उसके छोटे भाई की बेटी ने उन्हें बताया कि गांव अंबली निवासी श्योराम (61) बच्ची को पैसों तथा चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ चौबारे पर ले गया है। जब वे चौबारे पर पहुंचे, तो वहां पर श्योराम ने उसकी बेटी के साथ गलत काम कर रखा था। श्योराम उन्हें देखकर भाग गया।
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पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर श्योराम के खिलाफ भादंसं की धारा 366 ए, 376 व 6 पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने उसी दिन आरोपी को काबू कर लिया। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हो गई। कोर्ट में करीब एक साल चली सुनवाई के दौरान 16 लोगों की गवाही हुई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने श्योराम को दोषी करार देते हुए भादंसं की धारा 366 ए में पांच साल कैद तथा दो हजार रुपये जुर्माना किया है। जबकि 5 एम/6 पॉक्सो एक्ट में 10 साल कैद तथा पांच हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। उपरोक्त सजाएं साथ साथ चलेंगी।
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जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब एक साल चली सुनवाई के दौरान 16 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार थाना छप्पर के अंतर्गत आने वाले एक गांव निवासी व्यक्ति ने 3 अगस्त, 2014 को छप्पर पुलिस को दी शिकायत में कहा कि उसके पास पांच लड़कियां व दो लड़के हैं। तीन अगस्त को गांव के मंदिर में भंडारा चल रहा था, तो उसकी सबसे छोटी बेटी (6) बच्चों के साथ मंदिर के बाहर खेल रही थी।
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दोपहर को करीब डेढ़ बजे उसकी बेटी एकाएक मंदिर के बाहर से लापता हो गई। उसके छोटे भाई की बेटी ने उन्हें बताया कि गांव अंबली निवासी श्योराम (61) बच्ची को पैसों तथा चॉकलेट का लालच देकर अपने साथ चौबारे पर ले गया है। जब वे चौबारे पर पहुंचे, तो वहां पर श्योराम ने उसकी बेटी के साथ गलत काम कर रखा था। श्योराम उन्हें देखकर भाग गया।
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पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर श्योराम के खिलाफ भादंसं की धारा 366 ए, 376 व 6 पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने उसी दिन आरोपी को काबू कर लिया। इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हो गई। कोर्ट में करीब एक साल चली सुनवाई के दौरान 16 लोगों की गवाही हुई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग ने श्योराम को दोषी करार देते हुए भादंसं की धारा 366 ए में पांच साल कैद तथा दो हजार रुपये जुर्माना किया है। जबकि 5 एम/6 पॉक्सो एक्ट में 10 साल कैद तथा पांच हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। उपरोक्त सजाएं साथ साथ चलेंगी।