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जिस व्यक्ति के निशक्त बेटी की अस्पताल में गई थी जान, उसी पर जान से मारने की धमकी देने का डॉक्टर ने लगाया आरोप
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यमुनानगर। गोबिंदपुरी रोड स्थित आरके गुप्ता अस्पताल के संचालक डॉ. आरके गुप्ता ने जिस व्यक्ति के निशक्त बेटे की अस्पताल में मौत हुई थी, उसी व्यक्ति पर डॉ. गुप्ता ने जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। मामले में कार्रवाई को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को एसपी कुलदीप सिंह यादव व डीएसपी हेड क्वार्टर सुभाष चंद से मिला। डीएसपी सुभाष चंद ने उन्हें मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
आईएमए के जिला प्रधान डॉ. योगेश जिंदल, डॉ. विक्रम भारती, डा. रविंद्र सिंह गिल बताया कि जनवरी माह में डॉ. गुप्ता अस्पताल में जैन कॉलोनी निवासी अपने निशक्त बेटे को लेकर आया था। उसके साथ आए लोगों ने उनसे कहा कि वह चल फिर नहीं सकता। उसे कार में ही चैक कर लें। जब वह कार में चैक करने गए तो जांच में सामने आया कि उसे जन्म से रीढ़ की हड्डी में दिक्कत है। जिस कारण वह चल फिर नहीं सकता। इसी तरह जांच के दौरान बीपी भी हाई था और किडनी में भी दिक्कत थी। जब उसे दाखिल करने के लिए कहा गया तो परिवार ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि दवाई दे दें। उन्होंने दवाई दे दी। चार घंटे बाद परिवार फिर निशक्त बेटे को लेकर अस्पताल पहुंचा। जांच के दौरान उसका बीपी पहले से ज्यादा हाई था। दिल में भी दिक्कत थी। उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की सलाह दी गई। इस दौरान इंसानियत के नाते उन्होंने बीपी काबू करने के लिए इंजेक्शन लगाया। उनके पास वेंटिलेटर नहीं था। वे उसे दूसरे अस्पताल में ले गए। कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया। इस दौरान परिवार ने डाक्टर के खिलाफ नैक्लीजेंसी बोर्ड में शिकायत कर दी। इसकी सुनवाई 25 मार्च को सिविल अस्पताल में हो रही थी। डाक्टर आरके गुप्ता का आरोप है कि इस सुनवाई के दौरान सरकारी डाक्टरों के सामने उक्त व्यक्ति ने उनके कंधे पर हाथ रखकर जान से मारने की धमकी दी। उसके बेटे को भी देख लेने की धमकी दी। अगले दिन उन्होंने इसकी शिकायत रामपुरा चौकी में की। साथ ही इसकी सूचना सीएमओ को भी दी ताकि 25 मार्च की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध करवाई जा सके ताकि सच्चाई सामने आए। लेकिन अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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आईएमए के जिला प्रधान डॉ. योगेश जिंदल, डॉ. विक्रम भारती, डा. रविंद्र सिंह गिल बताया कि जनवरी माह में डॉ. गुप्ता अस्पताल में जैन कॉलोनी निवासी अपने निशक्त बेटे को लेकर आया था। उसके साथ आए लोगों ने उनसे कहा कि वह चल फिर नहीं सकता। उसे कार में ही चैक कर लें। जब वह कार में चैक करने गए तो जांच में सामने आया कि उसे जन्म से रीढ़ की हड्डी में दिक्कत है। जिस कारण वह चल फिर नहीं सकता। इसी तरह जांच के दौरान बीपी भी हाई था और किडनी में भी दिक्कत थी। जब उसे दाखिल करने के लिए कहा गया तो परिवार ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि दवाई दे दें। उन्होंने दवाई दे दी। चार घंटे बाद परिवार फिर निशक्त बेटे को लेकर अस्पताल पहुंचा। जांच के दौरान उसका बीपी पहले से ज्यादा हाई था। दिल में भी दिक्कत थी। उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की सलाह दी गई। इस दौरान इंसानियत के नाते उन्होंने बीपी काबू करने के लिए इंजेक्शन लगाया। उनके पास वेंटिलेटर नहीं था। वे उसे दूसरे अस्पताल में ले गए। कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया। इस दौरान परिवार ने डाक्टर के खिलाफ नैक्लीजेंसी बोर्ड में शिकायत कर दी। इसकी सुनवाई 25 मार्च को सिविल अस्पताल में हो रही थी। डाक्टर आरके गुप्ता का आरोप है कि इस सुनवाई के दौरान सरकारी डाक्टरों के सामने उक्त व्यक्ति ने उनके कंधे पर हाथ रखकर जान से मारने की धमकी दी। उसके बेटे को भी देख लेने की धमकी दी। अगले दिन उन्होंने इसकी शिकायत रामपुरा चौकी में की। साथ ही इसकी सूचना सीएमओ को भी दी ताकि 25 मार्च की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध करवाई जा सके ताकि सच्चाई सामने आए। लेकिन अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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