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सफीलपुर में शावकों संग दिखी मादा तेंदुआ, दहशत
Updated Mon, 16 Oct 2017 12:39 AM IST
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सफीलपुर में शावकों संग दिखी मादा तेंदुआ, दहशत
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। घाड़ क्षेत्र के गांव सफीलपुर में रविवार सुबह धान के एक खेत में ग्रामीणों ने दो शावकों संग मादा तेंदुआ देखा। जल्द ही यह खबर पूरे गांव में फैल गई। लोगों ने इसकी खबर सरपंच को दी और सरपंच ने पुलिस, वन विभाग और वन्य जीव प्राणी विभाग के अफसरों को सूचना दी। इस पर पहुंची वन्य जीव प्राणी विभाग के डीएफओ शिव सिंह रावत, एएसआई राजींद्र सिंह, एचसी दलजीत सिंह, वन विभाग से संजीव कुमार, सुरेंद्र, मुकंदी, वाइल्ड लाइफ के राजपाल की टीम ने ग्रामीणों संग तकरीबन चार घंटे तक सर्च अभियान चलाया। इस दरम्यान टीम को कुछ स्थानों पर तेंदुए के पग चिह्न दिखाई दिए हैं। ग्रामीण राम कुमार सैनी ने बताया कि उसके धान के खेत में मजदूर धान काटने का कार्य कर रहे थे। सुबह जब वह खेत में गए तो उन्होंने दो शावकों के साथ मादा तेंदुए को देखा।
इधर, गांव पहुंचे डीएफओ रावत का कहना है कि ग्रामीणों से बातचीत के आधार पर कह सकते हैं मादा तेंदुए के शावकों की उम्र करीब 3 माह तक हो सकती है। इस स्थिति में शावक होशियार हो जाता है और मादा तेंदुए के पीछे नहीं चलता। मादा तेंदुए को ही उसकी रक्षा के लिए उसके पीछे चलना पड़ता है। शावक की रक्षा के लिए मादा तेंदुआ आदमी पर हमला भी कर सकती है, जबकि उसके शावक हमला नहीं कर सकते।
डीएफओ बोले- अलर्ट रहें, अकेले खेतों की ओर न जाएं
डीएफओ का कहना है कि, खेतों में धान की कटाई चल रही है, खेत खाली हो रहे हैं, इसलिए मादा तेंदुआ शावकों को लेकर जंगल में जाना चाहती होगी, लेकिन शावक उसके साथ नहीं चलते तो मजबूरन उसे खेतों में ही छिपना पड़ रह होगा। कुछ दिन बाद शावक और होशियार हो जाएंगे तो मादा तेंदुए के पीछे चलने लग जाएंगे। इसके बाद वह उन्हें लेकर सुरक्षित स्थान पर जंगल में निकल जाएगी, मगर अलर्ट रहने की जरूरत है। डीएफओ रावत का कहना है कि, रात और अलसुबह अंधेरे में अकेले खेतों की ओर न निकलें, हाथ में लाठी और टार्च लेकर ही निकलें। साथ ही आवाज करते हुए चलें।
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। घाड़ क्षेत्र के गांव सफीलपुर में रविवार सुबह धान के एक खेत में ग्रामीणों ने दो शावकों संग मादा तेंदुआ देखा। जल्द ही यह खबर पूरे गांव में फैल गई। लोगों ने इसकी खबर सरपंच को दी और सरपंच ने पुलिस, वन विभाग और वन्य जीव प्राणी विभाग के अफसरों को सूचना दी। इस पर पहुंची वन्य जीव प्राणी विभाग के डीएफओ शिव सिंह रावत, एएसआई राजींद्र सिंह, एचसी दलजीत सिंह, वन विभाग से संजीव कुमार, सुरेंद्र, मुकंदी, वाइल्ड लाइफ के राजपाल की टीम ने ग्रामीणों संग तकरीबन चार घंटे तक सर्च अभियान चलाया। इस दरम्यान टीम को कुछ स्थानों पर तेंदुए के पग चिह्न दिखाई दिए हैं। ग्रामीण राम कुमार सैनी ने बताया कि उसके धान के खेत में मजदूर धान काटने का कार्य कर रहे थे। सुबह जब वह खेत में गए तो उन्होंने दो शावकों के साथ मादा तेंदुए को देखा।
इधर, गांव पहुंचे डीएफओ रावत का कहना है कि ग्रामीणों से बातचीत के आधार पर कह सकते हैं मादा तेंदुए के शावकों की उम्र करीब 3 माह तक हो सकती है। इस स्थिति में शावक होशियार हो जाता है और मादा तेंदुए के पीछे नहीं चलता। मादा तेंदुए को ही उसकी रक्षा के लिए उसके पीछे चलना पड़ता है। शावक की रक्षा के लिए मादा तेंदुआ आदमी पर हमला भी कर सकती है, जबकि उसके शावक हमला नहीं कर सकते।
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डीएफओ बोले- अलर्ट रहें, अकेले खेतों की ओर न जाएं
डीएफओ का कहना है कि, खेतों में धान की कटाई चल रही है, खेत खाली हो रहे हैं, इसलिए मादा तेंदुआ शावकों को लेकर जंगल में जाना चाहती होगी, लेकिन शावक उसके साथ नहीं चलते तो मजबूरन उसे खेतों में ही छिपना पड़ रह होगा। कुछ दिन बाद शावक और होशियार हो जाएंगे तो मादा तेंदुए के पीछे चलने लग जाएंगे। इसके बाद वह उन्हें लेकर सुरक्षित स्थान पर जंगल में निकल जाएगी, मगर अलर्ट रहने की जरूरत है। डीएफओ रावत का कहना है कि, रात और अलसुबह अंधेरे में अकेले खेतों की ओर न निकलें, हाथ में लाठी और टार्च लेकर ही निकलें। साथ ही आवाज करते हुए चलें।
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