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38 सील दुकानों पर कब्जा लेगा निगम, सामान नीलाम कर होगी किराये की वसूली
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किराया न देने पर जिन दुकानों को नगर निगम ने सील किया था अब उन पर कब्जा करने की तैयारी हो रही है। इतना ही नहीं निगम के अधिकारी दुकानों में रखे गए सामान को भी नीलाम करेंगे। ताकि सामान को नीलाम करने के बाद जो राशि प्राप्त हो उससे बकाया किराये की रिकवरी की जा सके। किराया न देने वाले दुकानदारों के प्रति पहली बार निगम अधिकारियों ने कड़ा रूख अपनाया है।
निगम के इस फैसले से दुकानदारों की नींद उड़ी हुई है। क्योंकि सील दुकानों में उनका लाखों रुपये का सामान रखा हुुआ है। सामान के साथ-साथ दुकानदारों को किराये की दुकान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि डिफाल्टर दुकानदारों से दुकान लेकर नीलामी कर दूसरे लोगों को दी जाने की भी योजना बनाई जा रही है।
नगर निगम ने शहर में अपनी दुकानों को किराये पर दे रखा है। परंतु काफी दुकानदार ऐसे हैं जिन्होंने कई सालों से दुकानों का किराया जमा नहीं कराया है। ऐसे भी दुकानदार हैं 77 लाख रुपये तक का किराया बकाया है। वर्कशाप रोड, शिवाजी मार्केट, मीट मार्केट जगाधरी व यमुनानगर, कपड़ा मार्केट, बूड़िया चौक, भटौली व अन्य जगहों पर 38 दुकानें ऐसी हैं जिनका किराया दो करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इन दुकानों को नगर निगम के अधिकारियों ने गत वर्ष सील कर दिया था। सील दुकानों में लोगों का लाखों रुपये का सामान भी बंद है।
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नगर निगम एरिया में कुल 1650 सरकारी दुकानें हैं। इनमें 350 दुकानें जगाधरी जोन में, बाकी यमुनानगर जोन में है। बकाया किराया जमा न करवाने पर निगम की ओर से किरायेदारों को कई-कई बार नोटिस जारी किए गए। फिर भी किराया नहीं आया। एग्रीमेंट के मुताबिक दुकानदार को हर माह किराया अदा करना होता है। ऐसी दुकानों की संख्या भी कम नहीं है, जिनका किराया 300-400 रुपये प्रति माह है। बावजूद इसके दुकानदार समय पर किराया जमा नहीं करा रहे हैं। बकायेदारों में छोटे दुकानदार कम जबकि बड़े दुकानदारों व शोरूम मालिक ज्यादा है।
नगर निगम कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा ने बताया कि दुकानों पर कब्ज को लेकर पहले सभी दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया है। यदि सात दिन में बकाया किराया जमा नहीं कराया तो दुकान पर कब्जा कर लिया जाएगा। इसके बाद दुकान में रखे सामान पर कब्जा कर उसकी नीलामी कराई जाएगी। उक्त किरायेदारों से बकाया किराये की वसूली के लिए पंजाब भू-राजस्व अधिनियम 1887 की धारा 67 के तहत आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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निगम के इस फैसले से दुकानदारों की नींद उड़ी हुई है। क्योंकि सील दुकानों में उनका लाखों रुपये का सामान रखा हुुआ है। सामान के साथ-साथ दुकानदारों को किराये की दुकान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि डिफाल्टर दुकानदारों से दुकान लेकर नीलामी कर दूसरे लोगों को दी जाने की भी योजना बनाई जा रही है।
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नगर निगम ने शहर में अपनी दुकानों को किराये पर दे रखा है। परंतु काफी दुकानदार ऐसे हैं जिन्होंने कई सालों से दुकानों का किराया जमा नहीं कराया है। ऐसे भी दुकानदार हैं 77 लाख रुपये तक का किराया बकाया है। वर्कशाप रोड, शिवाजी मार्केट, मीट मार्केट जगाधरी व यमुनानगर, कपड़ा मार्केट, बूड़िया चौक, भटौली व अन्य जगहों पर 38 दुकानें ऐसी हैं जिनका किराया दो करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इन दुकानों को नगर निगम के अधिकारियों ने गत वर्ष सील कर दिया था। सील दुकानों में लोगों का लाखों रुपये का सामान भी बंद है।
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नगर निगम एरिया में कुल 1650 सरकारी दुकानें हैं। इनमें 350 दुकानें जगाधरी जोन में, बाकी यमुनानगर जोन में है। बकाया किराया जमा न करवाने पर निगम की ओर से किरायेदारों को कई-कई बार नोटिस जारी किए गए। फिर भी किराया नहीं आया। एग्रीमेंट के मुताबिक दुकानदार को हर माह किराया अदा करना होता है। ऐसी दुकानों की संख्या भी कम नहीं है, जिनका किराया 300-400 रुपये प्रति माह है। बावजूद इसके दुकानदार समय पर किराया जमा नहीं करा रहे हैं। बकायेदारों में छोटे दुकानदार कम जबकि बड़े दुकानदारों व शोरूम मालिक ज्यादा है।
नगर निगम कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा ने बताया कि दुकानों पर कब्ज को लेकर पहले सभी दुकानदारों को नोटिस जारी किया गया है। यदि सात दिन में बकाया किराया जमा नहीं कराया तो दुकान पर कब्जा कर लिया जाएगा। इसके बाद दुकान में रखे सामान पर कब्जा कर उसकी नीलामी कराई जाएगी। उक्त किरायेदारों से बकाया किराये की वसूली के लिए पंजाब भू-राजस्व अधिनियम 1887 की धारा 67 के तहत आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।