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भूमि विवाद से सरकारी अस्पताल का निर्माण रुका
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नया सरकारी अस्पताल बनने के लिए खाली पड़ी भूमि। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। रादौर में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से 2 एकड़, 6 कनाल भूमि पर बनने वाले आधुनिक सरकारी अस्पताल का कार्य भूमि विवाद के चलते रुक गया है। जिस भूमि पर सरकारी अस्पताल बनने जा रहा है, उस भूमि को कुछ लोगों ने अपनी बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला कोर्ट में होने के चलते नया सरकारी अस्पताल का कार्य खटाई में पड़ गया है।
कोर्ट के आदेश पर विवादित भूमि की निशानदेही करवाई गई है। तहसीलदार सुरेश कुमार की मौजूदगी में करवाई गई निशानदेही में नया अस्पताल बनने की कुछ भूमि के अलावा पुराने अस्पताल का महिला प्रसूति कार्यालय, अस्पताल का ट्रेनिंग हॉल व अन्य खाली पड़ी भूमि जसविंद्र सिंह व उनके भाई राव वीरेंद्र सिंह निवासी छोटाबांस की मलकियत साबित हुई है। निशानदेही के बाद मौके पर अस्पताल के अंदर पिलर लगाए गए हैं। सरकारी अस्पताल के अंदर निजी भूमि पाए जाने के बाद कार्य रुकना तय है।
जसविंद्र सिंह व उनके भाई राव वीरेंद्र सिंह निवासी छोटाबांस ने बताया कि पुराने सरकारी अस्पताल के कुछ हिस्से को तोड़कर नया सरकारी अस्पताल बनाया जा रहा है। उन्होंने जब उपरोक्त भूमि की कोर्ट के आदेश पर निशानदेही करवाई तो सरकारी अस्पताल के अंदर उनकी लगभग 6 कनाल भूमि पाई गई है। इससे पहले उन्होंने जब निशानदेही करवाई थी तो बीडीपीओ व एसडीएम कार्यालय भी उनकी भूमि पर बना हुआ पाया गया है।
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उधर एसएमओ रादौर डॉ. विजय परमार ने बताया कि नया अस्पताल बनाने के लिए पुराने अस्पताल की कुछ बिल्डिंग को तोड़ा गया था। इसके बाद नया अस्पताल बनने का कार्य शुरू होना था। खाली पड़ी भूमि की निशानदेही हुई है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इससे नया अस्पताल बनने का कार्य रुक गया है।
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रादौर। रादौर में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से 2 एकड़, 6 कनाल भूमि पर बनने वाले आधुनिक सरकारी अस्पताल का कार्य भूमि विवाद के चलते रुक गया है। जिस भूमि पर सरकारी अस्पताल बनने जा रहा है, उस भूमि को कुछ लोगों ने अपनी बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला कोर्ट में होने के चलते नया सरकारी अस्पताल का कार्य खटाई में पड़ गया है।
कोर्ट के आदेश पर विवादित भूमि की निशानदेही करवाई गई है। तहसीलदार सुरेश कुमार की मौजूदगी में करवाई गई निशानदेही में नया अस्पताल बनने की कुछ भूमि के अलावा पुराने अस्पताल का महिला प्रसूति कार्यालय, अस्पताल का ट्रेनिंग हॉल व अन्य खाली पड़ी भूमि जसविंद्र सिंह व उनके भाई राव वीरेंद्र सिंह निवासी छोटाबांस की मलकियत साबित हुई है। निशानदेही के बाद मौके पर अस्पताल के अंदर पिलर लगाए गए हैं। सरकारी अस्पताल के अंदर निजी भूमि पाए जाने के बाद कार्य रुकना तय है।
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जसविंद्र सिंह व उनके भाई राव वीरेंद्र सिंह निवासी छोटाबांस ने बताया कि पुराने सरकारी अस्पताल के कुछ हिस्से को तोड़कर नया सरकारी अस्पताल बनाया जा रहा है। उन्होंने जब उपरोक्त भूमि की कोर्ट के आदेश पर निशानदेही करवाई तो सरकारी अस्पताल के अंदर उनकी लगभग 6 कनाल भूमि पाई गई है। इससे पहले उन्होंने जब निशानदेही करवाई थी तो बीडीपीओ व एसडीएम कार्यालय भी उनकी भूमि पर बना हुआ पाया गया है।
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उधर एसएमओ रादौर डॉ. विजय परमार ने बताया कि नया अस्पताल बनाने के लिए पुराने अस्पताल की कुछ बिल्डिंग को तोड़ा गया था। इसके बाद नया अस्पताल बनने का कार्य शुरू होना था। खाली पड़ी भूमि की निशानदेही हुई है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इससे नया अस्पताल बनने का कार्य रुक गया है।