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रामलीला के मंचन को लेकर असमंजस
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कोरोना महामारी के चलते इस बार भी रामलीला मंचन और दशहरा मेला को लेकर असमंजस है। रामलीला मंचन करीब आ गए हैं और अभी तक आयोजन समितियों को प्रशासन से मंचन की अनुमति नहीं मिल पाई है। आयोजन समितियां अनुमति का इंतजार कर रही हैं। समितियों का कहना है कि संक्रमण का प्रभाव बेहद कम हो गया है। टीकाकरण के साथ इसकी संभावनाएं क्षीण होती जा रही हैं। ऐसे में प्रशासन को रामलीला मंचन की अनुमति दे देनी चाहिए।
दरअसल इन दिनों रामलीला मंच के लिए कलाकार प्रयास करना शुरू कर देते हैं और मंच लगाया जाने लगता है। पितृ पक्ष की अमावस्या एवं पहले नवरात्र से रामलीला मंचन शुरू हो जाता है। रामलीला का आयोजन दस दिन होता है। यमुना रामलीला कमेटी के सचिव मुकेश सैनी का कहना है कि कि भगवान श्रीराम सनातन आस्था के सबसे बड़े प्रतीक हैं।
राजसी काल से रामलीला का मंचन किया जाता आ रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले रामलीला का मंचन नहीं हुआ था। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण का असर कम हो गया है। देश भर में अन्य राजनीतिक, सामाजिक धार्मिक कार्यक्रमों की अनुमति दी गई है, तो रामलीला मंचन की भी अनुमति दी जाए। आयोजन समितियां कोरोना से बचाव की नियमावली के साथ काम करेंगी।
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सब्जी मंडी में 78 साल से हो रही रामलीला
जिले में सबसे पुरानी रामलीला पुरानी सब्जी मंडी स्थित मैदान में होती है। यहां 78 साल से रामलीला करवाई जा रही है। मंचन यमुना रामलीला कमेटी की ओर से कराया जाता है। पिछले साल की तरह इस साल भी रामलीला मंचन को लेकर कमेटी असमंजस में है। कमेटी प्रधान अंजेय कुमार, लाला कैशाल चंद, व्यापारी देसराज इसे लेकर सदस्यों व पदाधिकारियों से कई बार बैठक कर चुके हैं। सचिव मुकेश सैनी ने बताया अभी तक रामलीला मंचन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन को अनुमति देनी चाहिए।
शहर में चार स्थानों पर रामलीला का मंचन किया जाता है। पुरानी सब्जी मंडी, पेपर मिल कॉलोनी ग्राउंड, कैंप और जगाधरी में रामलीला होती है। इस बार मंचन के लिए समितियां प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेंगी। इसे लेकर सोमवार को विभिन्न समितियों की बैठक होगी। बैठक के बाद मंचन को लेकर रुख साफ हो पाएगा।
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यमुनानगर। कोरोना महामारी के चलते इस बार भी रामलीला मंचन और दशहरा मेला को लेकर असमंजस है। रामलीला मंचन करीब आ गए हैं और अभी तक आयोजन समितियों को प्रशासन से मंचन की अनुमति नहीं मिल पाई है। आयोजन समितियां अनुमति का इंतजार कर रही हैं। समितियों का कहना है कि संक्रमण का प्रभाव बेहद कम हो गया है। टीकाकरण के साथ इसकी संभावनाएं क्षीण होती जा रही हैं। ऐसे में प्रशासन को रामलीला मंचन की अनुमति दे देनी चाहिए।
दरअसल इन दिनों रामलीला मंच के लिए कलाकार प्रयास करना शुरू कर देते हैं और मंच लगाया जाने लगता है। पितृ पक्ष की अमावस्या एवं पहले नवरात्र से रामलीला मंचन शुरू हो जाता है। रामलीला का आयोजन दस दिन होता है। यमुना रामलीला कमेटी के सचिव मुकेश सैनी का कहना है कि कि भगवान श्रीराम सनातन आस्था के सबसे बड़े प्रतीक हैं।
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राजसी काल से रामलीला का मंचन किया जाता आ रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले रामलीला का मंचन नहीं हुआ था। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण का असर कम हो गया है। देश भर में अन्य राजनीतिक, सामाजिक धार्मिक कार्यक्रमों की अनुमति दी गई है, तो रामलीला मंचन की भी अनुमति दी जाए। आयोजन समितियां कोरोना से बचाव की नियमावली के साथ काम करेंगी।
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सब्जी मंडी में 78 साल से हो रही रामलीला
जिले में सबसे पुरानी रामलीला पुरानी सब्जी मंडी स्थित मैदान में होती है। यहां 78 साल से रामलीला करवाई जा रही है। मंचन यमुना रामलीला कमेटी की ओर से कराया जाता है। पिछले साल की तरह इस साल भी रामलीला मंचन को लेकर कमेटी असमंजस में है। कमेटी प्रधान अंजेय कुमार, लाला कैशाल चंद, व्यापारी देसराज इसे लेकर सदस्यों व पदाधिकारियों से कई बार बैठक कर चुके हैं। सचिव मुकेश सैनी ने बताया अभी तक रामलीला मंचन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन को अनुमति देनी चाहिए।
शहर में चार स्थानों पर रामलीला का मंचन किया जाता है। पुरानी सब्जी मंडी, पेपर मिल कॉलोनी ग्राउंड, कैंप और जगाधरी में रामलीला होती है। इस बार मंचन के लिए समितियां प्रशासनिक अधिकारियों से मिलेंगी। इसे लेकर सोमवार को विभिन्न समितियों की बैठक होगी। बैठक के बाद मंचन को लेकर रुख साफ हो पाएगा।