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इंडस्ट्री शुरू करने के लिए मैनुअल वेरिफिकेशन नहीं होगी, ऑनलाइन आवेदन से ऑटोमैटिक मिल जाएगी परमीशन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 May 2020 12:45 AM IST
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परमिशन के बाद इंडस्ट्री एरिया में चल रही फैक्ट्रियां। - फोटो : Yamuna Nagar
निरंजन कुमार राणा
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यमुनानगर। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने लॉकडाउन के तीसरे चरण में उद्योगों को राहत देनी शुरू कर दी है। शहर का प्लाइवुड व मैटल इंडस्ट्री को शर्तों के अनुसार खोलने की अनुमति दी जा रही है। इंडस्ट्री शुरू करने के लिए दूसरे चरण का पंजीकरण पोर्टल शुरू कर दिया गया। यमुनानगर और जगाधरी के उद्यमियों के आवेदन भी धड़ाधड़ मंजूर किए जा रहे हैं। क्योंकि सरकार ने अब मैनुअल वेरिफिकेशन को खत्म कर दिया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइड लाइन का शत प्रतिशत पालन करने की शर्त पर ऑटोमेटिक परमीशन दी जा रही है। सरकार के इस कदम की शहर के उद्यमियों ने सराहना की है। बुधवार तक 1099 उद्योगों को परमीशन दी जा चुकी है। इनमें करीब दो सौ प्लाइवुड इंडस्ट्री हैं। हालांकि सरकार की तरफ से छूट मिलने के बावजूद उद्यमी अपनी फैक्टरी चलाने में कई तरह की दिक्कत महसूस कर रहे हैं।
बिजली के बिल और टैक्स में राहत दें सरकार
-ऑल इंडिया प्लाइवुड मेन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेजीडेंट देवेंद्र चावला का कहना है कि इंडस्ट्री को चलाने की परमीशन तो मिल रही है। अधिकतर जगहों पर काम शुरू भी हो गया, लेकिन रॉ मैटेरियल और तैयार माल की व्यवस्था नहीं हुई है। इस वजह से जो स्टॉक है, उसी से माल तैयार किया जा रहा है। पूरी तरह से लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही फैक्टरियों में काम काज सुचारू होगा। तब तक उद्यमियों को भी काफी नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि बिजली बिल और जीएसटी समेत अन्य टैक्स में छूट दें। क्योंकि कई राज्य ऐसा कर चुके हैं। हरियाणा सरकार भी उद्यमियों को राहत दें।
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लंबे समय तक नुकसान झेलना पड़ेगा
वहीं हरियाणा प्लाइवुड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रेजीडेंट जेके बिहानी का कहना है कि संकट की इस घड़ी में सभी अपने वर्करों के साथ खड़े हैं। किसी भी कंपनी वर्कर को भूखे नहीं रहने दिया जाएगा। लेकिन बड़ी मार्केट बंद पड़ी हैं, जहां तैयार मॉल भेजना अभी संभव नहीं है। रॉ मैटीरियल भी नहीं मिल रहा। कुछ दिन के बाद फैक्टरी बंद करनी ही पड़ेगी। वहीं लेबर भी अपने घर जा रही है। जो गिने चुने श्रमिक बचे हुए हैं, वे भी हर हाल में घर जाएंगे। ऐसे में प्लाइवुड ही नहीं बल्कि अन्य उद्योगों से जुड़े उद्यमियों को लंबे समय तक नुकसान झेलने को तैयार रहना पड़ेगा।
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स्पोर्टिंग उद्योग भी ठप
फेस विनियर के इंपोर्टर सुमित गुप्ता का कहना है कि सरकार का फैसला सराहनीय है और इंडस्ट्री को कुछ मिनटों में ही परमिशन दी जा रही है, लेकिन इंडस्ट्री के पास कुछ ही स्टॉक है। उसके बाद काम बंद हो जाएगा। फैक्ट्रियां नहीं चलने से स्पोर्टिंग उद्योग धंधे भी बंद है, क्योंकि जब तैयार मॉल के ही ऑर्डर नहीं है तो फैक्टरी चलेंगी ही नहीं। शहर के जिन इंडस्ट्रीयलिस्ट ने परमीशन मांगी है वे स्टॉक को खराब होने से बचाने के लिए ही काम करेंगे, उसके बाद मजबूरन उन्हें काम बंद करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि जितने उद्योगों को परमीशन मिली है, उसके हिसाब से 15 से 20 हजार लेबर चाहिए, लेकिन जिसको भी फोन करते हैं, तो जवाब मिलता है कि साहब बिहार में अपने घर आ गए हैं।

सुरक्षा के करने होंगे ये इंतजाम
कंपनी के अंदर आने पर साइकिल, बाइक को सैनिटाइज करना होगा।
-सभी का थर्मल स्कैनिंग से टेंपरेचर चेक किया जाएगा।
-हर घंटे हैंडवॉश और मॉस्क उपलब्ध करवाना जरूरी।
-वर्करों के बीच करीब 6 फिट की दूरी मेंटेन करनी होगी।
-पहले सप्ताह 50 फीसदी और दूसरे सप्ताह में 75 फीसदी वर्कर।
इंडस्ट्री को चलवाने के लिए सरकार काफी कम समय पर परमीशन दे रही है। अब उद्यमी को सेल्फ डिक्लयरेशन देना होता है। उद्यमियों से भी अपील है कि वे सही जानकारी देकर परमीशन लें और सरकार की गाइड लाइन के तहत ही उद्योग चलाएं।
-दीपक नरवाल, जीएम जिला उद्योग केंद्र, यमुनानगर
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