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दुष्कर्म पीड़िता बिना मंजूरी के 20 सप्ताह तक करवा सकती गर्भपात: डॉ. विजय दहिया
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दुष्कर्म पीड़िता अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए यदि गर्भ का समय 20 सप्ताह से कम है तो किसी भी अधिकृत सरकारी-गैर सरकारी अस्पताल में मेडिकल टर्मिनेशन प्रेग्नेंसी एक्ट यानि एमटीपी के तहत गर्भपात करवा सकती हैं।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया ने बताया कि पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाने के बाद मेडिकल जांच में प्रेग्नेंसी का पता चलता है तो पीड़िता इस सुविधा का लाभ उठा सकती हैं, लेकिन अगर गर्भ 20 सप्ताह से ऊपर हो चुका है तो उसके लिए न्यायालय की मंजूरी अनिवार्य हो जाती है। उन्होंने बताया कि दुष्कर्म पीड़िताओं को यह राहत हाईकोर्ट ,े मिली हुई है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, सीडब्ल्यूसीडी, राज्य सरकार सहित अन्य संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश भी जारी हुए थे। इस व्यवस्था से पुलिस विभाग के जांच अधिकारी भी अनजान थे, जोकि पीड़िता का गर्भपात करवाने के लिए अदालत की शरण में जाते थे। इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। उन्होंने बताया कि मंजूरी मिलने तक गर्भ का समय 20 सप्ताह से अधिक हो जाता था। इससे पीड़िता को मानसिक-शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती थी। इसके बाद हाईकोर्ट में आवेदक देकर गर्भपात करवाने की मंजूरी लेनी पड़ती थी। इस परेशानी भरी प्रक्रिया को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हेडक्वार्टर की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के तहत 40 सरकारी और 20 प्राइवेट सेंटर अधिकृत किए हैं।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय दहिया ने बताया कि पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाने के बाद मेडिकल जांच में प्रेग्नेंसी का पता चलता है तो पीड़िता इस सुविधा का लाभ उठा सकती हैं, लेकिन अगर गर्भ 20 सप्ताह से ऊपर हो चुका है तो उसके लिए न्यायालय की मंजूरी अनिवार्य हो जाती है। उन्होंने बताया कि दुष्कर्म पीड़िताओं को यह राहत हाईकोर्ट ,े मिली हुई है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, सीडब्ल्यूसीडी, राज्य सरकार सहित अन्य संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश भी जारी हुए थे। इस व्यवस्था से पुलिस विभाग के जांच अधिकारी भी अनजान थे, जोकि पीड़िता का गर्भपात करवाने के लिए अदालत की शरण में जाते थे। इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। उन्होंने बताया कि मंजूरी मिलने तक गर्भ का समय 20 सप्ताह से अधिक हो जाता था। इससे पीड़िता को मानसिक-शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती थी। इसके बाद हाईकोर्ट में आवेदक देकर गर्भपात करवाने की मंजूरी लेनी पड़ती थी। इस परेशानी भरी प्रक्रिया को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हेडक्वार्टर की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के तहत 40 सरकारी और 20 प्राइवेट सेंटर अधिकृत किए हैं।
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