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सिनेमा समाज का दर्पण : गिरिजा शंकर

Sun, 17 Nov 2013 01:08 AM IST
यमुनानगर
यमुनानगर Updated Sun, 17 Nov 2013 01:08 AM IST
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Cinema mirror of society: Girija Shankar
धृतराष्ट्र का किरदार महाभारत की रीढ़ है। उस किरदार ने भारत ही नहीं,
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अपितु पूरे विश्व में प्रसिद्धि प्राप्त की। यह शब्द महाभारत में धृतराष्ट्र का किरदार अदा करने वाले अभिनेता गिरिजा शंकर ने शनिवार को डीएवी गर्ल्स कॉलेज में वाणिज्य विभाग की ओर से आयोजित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए कहे।

सिनेमा का शिक्षा में योगदान विषय पर गिरिजा शंकर ने चर्चा की। अतिरिक्त उपायुक्त डा. सतबीर सिंह सैनी कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि रहे, जबकि कॉलेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
गिरिजा शंकर ने कहा कि सिनेमा समाज का दर्पण है।

 उसके आधार पर फिल्म, नाटक व अन्य कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं। समाज को सही दिशा प्रदान करने के लिए सिनेमा का बखूबी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सिनेमा में बढ़ते पाश्चात्य प्रभाव की वजह से अब उसने ग्लैमर का चोला पहन लिया है, जो युवा पीढ़ी के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।

यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति व सभ्यता से कोसों दूर होती जा रही है। महाभारत का जिक्र करते हुए गिरिजा शंकर ने कहा कि कोई भी ग्रंथ व किताब इसका मुकाबला नहीं कर सकती। श्रीमद्भागवत गीता भी महाभारत का ही अंश है। महाभारत की अच्छाइयों को जीवन में धारण कर बुलंदियों को छुआ जा सकता है। उन्होंने बताया कि छोटे पर्दे पर उन्होंने बुनियाद सीरियल से शुरुआत की।

 लेकिन प्रसिद्धि महाभारत में अदा किए गए धृतराष्ट्र के किरदार से मिली। हालांकि उन्होंने हिंदी, पंजाबी के अलावा हॉलीवुड की फिल्मों में भी ढेर सारे किरदार अदा किए। लेकिन धृतराष्ट्र के किरदार को उन्होंने अपने आप में संपूर्ण बताया। गिरिजा शंकर ने आज के सिनेमा को फास्ट फूड की संज्ञा दी और कहा कि यही वजह है कि आज के दौर में अदा किए जाने वाले किरदार दर्शकों के जहन में सालों तक स्मृतियां नहीं बना पा रहे हैं। नई पीढ़ी की सोच में बहुत तेजी से बदल रही है। बढ़ते ग्लैमर की भरमार की वजह से अब सिनेमा में अलग दिखने की होड़ मची है। मीडिया ग्लैमर को बढ़ावा देने में तड़के का काम कर रहा है।

अतिरिक्त उपायुक्त डा. सतबीर सिंह सैनी ने कहा कि जब महाभारत का प्रसारण होता था, तो गलियां सूनी हो जाती है। उन्होंने कॉलेज द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए डा. सुषमा आर्य का आभार व्यक्त किया।
कॉलेज प्रिंसिपल डा. सुषमा आर्य ने कहा कि महाभारत में धृतराष्ट्र का महान किरदार अदा करने वाले सुप्रसिद्ध अभिनेता गिरिजा शंकर को कॉलेज में बुलाने का मुख्य उद्देश्य सिनेमा के प्रति समझ को विकसित करना है, ताकि सिनेमा द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में दिए जा रहे योगदान के बखूबी समझा जा सके। सिनेमा के जरिये समाज में व्याप्त बुराइयों को उठाकर लोगों को शिक्षित किया जा सकता है। जो आज के समय की मांग है।
वाणिज्य विभाग की अध्यक्षा डा. सुरेंद्र कौर ने अभिनेता एवं निर्माता-निर्देशक गिरिजा शंकर तथा अतिरिक्त उपायुक्त डा. एसएस सैनी का आभार व्यक्त किया।


फाइटर पायलट की जगह बन गए अभिनेता
जगाधरी। महाभारत के धृतराष्ट्र यानी गिरिजा शंकर का बचपन से सपना एयरफोर्स में फाइटर पायलट बनना था। लेकिन किस्मत ने उन्हें थियेटर व रंगमंच के जरिये मुंबई पहुंचा दिया। शुरुआती दिनों में अभिनय के क्षेत्र में काम न मिलने पर उन्होंने स्वयं को हताश महसूस किया। कुछ कर दिखाने की ललक ने उनकी आस को बनाए रखा। बुनियाद सीरियल में काम करके मिली प्रसिद्धि के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह बात गिरिजा शंकर ने अमर उजाला के साथ सांझा की।
गिरिजा शंकर ने राजस्थान के गंगानगर से स्कूल शिक्षा ग्रहण करने के बाद पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी से स्नातक की। बचपन से उन्होंने एयरफोर्स में फाइटर पायलट बनने का सपना संजोया, हालांकि उनका चयन आर्मी में हुआ, लेकिन नौकरी ज्वाइन नहीं की। एक्टिंग की तरफ रुख करने के बाद परिजनों ने उनसे नाता तोड़ लिया। मुंबई में रंगमंच पर अभिनय करते हुए उस समय के बडे़-बडे़ निर्माता-निर्देशकों ने उनका काम देखा, लेकिन फिल्म और सीरियल में रोल किसी ने नहीं दिया। रमेश सिप्पी के बुनियाद सीरियल में किए अभिनय को सराहना मिली। इसके बाद उन्हें महाभारत में धृतराष्ट्र के किरदार के लिए चयन किया। उन्होंने बिना किसी लेंस का सहारा लिए, इस किरदार को जिया। गिरिजा शंकर ने बताया कि उन्होंने हिंदी, पंजाबी, तमिल के अलावा हॉलीवुड की फिल्मों में भी काम किया है। हॉलीवुड के वर्क कल्चर की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वहां काम करते तकनीकी रूप से सीखने का बहुत ज्यादा मौका मिलता है। भारत में मॉर्डन सिनेमा हॉलीवुड की देन है।
ओ माई गॉड, आई एम रियल ब्लाइंड
डीएवी गर्ल्स कॉलेज के सभागार में बैठे टीचर्स को गिरिजा शंकर ने स्टूडेंट्स कह कर संबोधित किया। इसके बाद कॉलेज प्रिंसिपल ने उनकी गलती को दुरुस्त करते हुए बताया कि ये स्टूडेंट्स नहीं, टीचर्स हैं, तो गिरिजा शंकर के मुंह से एक दम निकल पड़ा ओ माई गॉड, आई एम रियल ब्लाइंड...यह एक अच्छा व खूबसूरत धोखा है। इसके बाद वहां पर हंसी की फुहारें छूट पड़ीं। आस्था के आगे हजारों किलोमीटर की दूरी भी कम पड़ जाती है। कपालमोचन मेले के बारे में उन्होंने खूब सुना था, लेकिन इस साल मेले की आस्था उन्हें मुंबई से यहां खींच लाई। यमुनानगर के लोगों से मिले की उन्होंने अपार सराहना की।
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