फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Children are falling victim to fatty liver disease and stomach problems

Yamuna Nagar News: फैटी लिवर और पेट रोग का शिकार हो रहे बच्चे

Mon, 02 Feb 2026 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 02 Feb 2026 01:46 AM IST
विज्ञापन
Children are falling victim to fatty liver disease and stomach problems
जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी के बाहर लगी लोगों की भीड़। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

यमुनानगर। अब तक बुजुर्गों और मध्यम आयु वर्ग की बीमारी मानी जाने वाली फैटी लिवर की समस्या ने बच्चों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। जिला नागरिक अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना बड़ी संख्या में बच्चे पेट और लिवर से जुड़ी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में बच्चों में लिवर से संबंधित बीमारियों का रोग पैटर्न तेजी से बदला है।
डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों में फैटी लिवर बढ़ने के पीछे केवल बीमारी नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक आदतें भी जिम्मेदार हैं। घर के बने भोजन की जगह पैकेटबंद और बाजारू खाने पर बढ़ती निर्भरता ने बच्चों के लिवर पर सीधा असर डाला है। नमकीन, बिस्कुट, फास्ट फूड और मीठे पेय पदार्थ बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं।
विज्ञापन

इसके साथ ही मोबाइल, टीवी और ऑनलाइन गेम्स के कारण शारीरिक गतिविधियां लगभग खत्म हो गई हैं। नतीजा यह है कि कम उम्र में ही बच्चों के शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो रही है, जिसका असर सीधे लिवर पर पड़ रहा है। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 150 से 200 तक बच्चे पेट दर्द, थकान, वजन बढ़ने और सुस्ती जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जांच के दौरान बड़ी संख्या में बच्चों में फैटी लिवर की शुरुआती स्थिति सामने आ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि यदि समय रहते इन मामलों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ सकती है। इससे न केवल बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि अस्पतालों पर भी इलाज का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

फैटी लिवर के लक्षण
जल्दी थकान, पेट के दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन, वजन तेजी से बढ़ना, भूख कम लगना, सुस्ती और कमजोरी।
बचाव के लिए क्या करें
जंक फूड और मीठे पेय से दूरी, घर का बना संतुलित भोजन, रोजाना कम से कम 30-45 मिनट शारीरिक गतिविधि, बच्चों में मोबाइल और स्क्रीन टाइम सीमित करना।
बच्चों को बाहर के खाने से बचना चाहिए। घर का बना ही भोजन करना चाहिए। बाहर का खाने से संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। अभिभावकों को बच्चों के खानपान का विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। -डॉ. वागीश गुटेन, डिप्टी सीएमओ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed