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Yamuna Nagar News: नहाय-खाय से छठ पर्व शुरू, व्रतियों में उत्साह

Wed, 06 Nov 2024 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 06 Nov 2024 02:01 AM IST
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Chhath festival begins with Nahai-Khai, enthusiasm among devotees
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। महापर्व छठ की शुरुआत मंगलवार को नहाय-खाय के साथ हो गई। महापर्व का समापन उदयगामी सूर्य को अर्घ्य के साथ होगा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बिना प्याज व लहसुन के लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल का भोग लगाकर स्वयं भोजन किया। इसके साथ ही पर्व का आगाज हो गया। बुधवार को खरना होगा, जिसमें श्रद्धालु घरों में गन्ने के रस की खीर बनाते हैं।
पर्व के शुभारंभ के साथ ही बाजारों में भी इसकी रौनक बढ़ गई। शहर के तमाम बाजारों में छठ को लेकर खूब भीड़ देखने को मिली। औद्योगिक नगरी होने के चलते यहां पर हजारों पूर्वोत्तर भारत के लोग रहते हैं। इस पर यहां पर छठ पर्व बड़े स्तर पर मनाया जाता है। छठ के दिन पश्चिमी यमुना नहर घाट व यमुना नदी के घाटों पर हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है।
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महापर्व की शुरुआत नहाय खाये परंपरा से होती है। मंगलवार तड़के महिलाओं ने स्नान किया और छठ व्रत का संकल्प लिया। उसके बाद अरवा चावल का भात, चने की दाल और कद्दू, लौकी की सब्जी का भोग लगाकर भोजन ग्रहण किया। इसमें परिवार के सभी सदस्य भी शामिल रहे। इसके लिए पूर्व संध्या को बजारों में रौनक रही। व
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हीं मंगलवार तड़के मंदिरों में भी भीड़ देखने को मिली। नहाय-खाय के बाद व्रती खरना की तैयारी में जुट गए हैं। इस दौरान व्रतियों ने खरना के लिए गेहूं धोकर सुखाया और मिट्टी के चूल्हे को अंतिम रूप दिया। इस दौरान हेवंती, शोभा, ममता, पूजा, मीना, छोटे लाल, राजकुमार, अमित कुमार उनकी छठ मैय्या में भारी आस्था है। उनके परिवार की महिलाएं हर साल यह कठिन व्रत करती हैं। हेवंती, शोभा, पूजा ने बताया कि यह व्रत संतान प्राप्ति, उनकी सुख-समृद्धि, दीर्घायु के लिए किया जाता है।

गलियों में गूंजे छठी माई के भजन

शहर की तमाम कॉलोनियों में पूर्वोत्तर भारत के लोग रहते हैं। जम्मू कॉलोनी, कैंप, पुराना हमीदा, शादीपुर, जमना गली, सिटी सेंटर, गोल्डन कॉलोनी, आजाद नगर, चौधरी कॉलोनी, प्रह्ललादपुरी, शांति कॉलोनी, तेजली, छोटी लाइन, दुर्गा गार्डन, सावनपुरी, रेलवे बाजार, जड़ौदा, रूपनगर, शांति काॅलोनी, सरस्वतीनगर जगाधरी की तमाम गलियों में छठ माई के भजन सुनाई दिए।

खरना की परंपरा महत्वपूर्ण
छठ पूजा की शुरुआत हो चुकी है। खरना की परंपरा छठ पूजा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है। इसे सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है, जो साधक इस दौरान व्रत रखते हैं, उनके जीवन से संतान और धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। खरना का अर्थ शुद्धता होता है। आचार्य सुरेश तिवारी ने बताया कि इस दिन अंतर मन की स्वच्छता पर जोर दिया जाता है। खरना छठ पूजा के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। मान्यता है कि इस दिन छठी मैया का आगमन होता है, जिसके बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।

खरना पूजा की विधि
आचार्य सुरेश तिवारी ने बताया कि खरना पूजन के दिन सबसे पहले उपासक को स्नान आदि से निवृत हो जाना चाहिए। इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर साठी के चावल, गुड़ अथवा गन्ने के रस और दूध की खीर बनाना चाहिए। सबसे पहले छठ मैय्या को को भोग अर्पित करना चाहिए। अंत में व्रती को प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। इस दिन एक समय ही भोजन का विधान है। इसके साथ ही 36 घंटे के लिए निर्जला व्रत की शुरुआत हो जाती है। छठ पूजा के चौथे दिन भोर में अर्घ्य देकर इस व्रत का समापन किया जाता है।
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