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इराक में फंसे हैं रादौर क्षेत्र के तीन और युवक
ब्यूरो/अमर उजाला, रादौर।
Updated Tue, 24 Jun 2014 12:08 AM IST
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रादौर क्षेत्र के तीन और युवक इराक में फंसे हुए हैं। इन युवकों ने अपने परिजनों को फोन पर वहां के हालात बताए हैं, जिसे सुनकर परिजन चिंतित हैं। उन्होंने सोमवार को उपायुक्त से मिलकर युवकों को सकुशल भारत लाने में सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
रादौर के गांव सांगीपुर के शिवलाल का पुत्र रमेश कुमार गांव सागड़ी के बाधुराम का पुत्र रघुबीर और औरंगाबाद के चमेला राम का पुत्र लखविंद्र इराक के कर्बला शहर के नजदीक फंसे हैं। तीनों इराक की कंस्ट्रक्शन कंपनी मरमरा में काम करते हैं। गांव सांगीपुर के रमेश कुमार ने रविवार को अपने भाई प्रवेश को फ ोन पर बताया कि वे यहां 10 दिन से फं से हुए हैं। 350 लोग यहां कमरों में बंद हैं।
एक-एक कमरे में 15 से 20 लोग रह रहे हैं। कंपनी के ठेकेदार और कर्मचारी भाग चुके हैं। बाहर लगातार गोलाबारी चल रही है। सभी भय के साये में किसी तरह जी रहे हैं। रमेश ने बताया कि वहां हालात बहुत खराब हो चुके हैं। खाने-पीने के लिए कुछ नहीं है, सभी दो दिन से भूखे हैं। बिजली भी बंद हो गई है और गर्मी बढ़ गई है।
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रमेश ने बताया कि उनका यहां से निकलना मुश्किल हो गया है। उनके पास पैसे भी नहीं हैं। रमेश के पिता शिवलाल ने बताया कि रमेश को कर्ज लेकर एक महीने पहले ही इराक भेजा था। इस उम्मीद से इराक भेजा था कि पैसे कमाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकेगा।
लेकिन हालात को देखते हुए बेटा शीघ्र घर लौट आए, उन्हें कुछ नहीं चाहिए। रमेश की मां देबो देवी, पत्नी किरण, बच्चे रूपल तथा डेविड रमेश की शीघ्र वापसी की राह जोह रहे हैं। घर में सभी परेशान हैं। सभी की नींद उड़ी हुई है। वहीं रघुबीर तथा लखविंद्र के परिजन भी परेशान हैं। परिजनों ने डीसी को सोमवार को पत्र देकर बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए गुहार लगाई है। परिजनों का कहना है कि केंद्र सरकार उनके बच्चों की शीघ्र वापसी के लिए प्रयास करें।
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रादौर के गांव सांगीपुर के शिवलाल का पुत्र रमेश कुमार गांव सागड़ी के बाधुराम का पुत्र रघुबीर और औरंगाबाद के चमेला राम का पुत्र लखविंद्र इराक के कर्बला शहर के नजदीक फंसे हैं। तीनों इराक की कंस्ट्रक्शन कंपनी मरमरा में काम करते हैं। गांव सांगीपुर के रमेश कुमार ने रविवार को अपने भाई प्रवेश को फ ोन पर बताया कि वे यहां 10 दिन से फं से हुए हैं। 350 लोग यहां कमरों में बंद हैं।
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एक-एक कमरे में 15 से 20 लोग रह रहे हैं। कंपनी के ठेकेदार और कर्मचारी भाग चुके हैं। बाहर लगातार गोलाबारी चल रही है। सभी भय के साये में किसी तरह जी रहे हैं। रमेश ने बताया कि वहां हालात बहुत खराब हो चुके हैं। खाने-पीने के लिए कुछ नहीं है, सभी दो दिन से भूखे हैं। बिजली भी बंद हो गई है और गर्मी बढ़ गई है।
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रमेश ने बताया कि उनका यहां से निकलना मुश्किल हो गया है। उनके पास पैसे भी नहीं हैं। रमेश के पिता शिवलाल ने बताया कि रमेश को कर्ज लेकर एक महीने पहले ही इराक भेजा था। इस उम्मीद से इराक भेजा था कि पैसे कमाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकेगा।
लेकिन हालात को देखते हुए बेटा शीघ्र घर लौट आए, उन्हें कुछ नहीं चाहिए। रमेश की मां देबो देवी, पत्नी किरण, बच्चे रूपल तथा डेविड रमेश की शीघ्र वापसी की राह जोह रहे हैं। घर में सभी परेशान हैं। सभी की नींद उड़ी हुई है। वहीं रघुबीर तथा लखविंद्र के परिजन भी परेशान हैं। परिजनों ने डीसी को सोमवार को पत्र देकर बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए गुहार लगाई है। परिजनों का कहना है कि केंद्र सरकार उनके बच्चों की शीघ्र वापसी के लिए प्रयास करें।