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यज्ञशाला की परिक्रमा करने से मिलता है मनवांछित फल
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महायज्ञ में संध्या आरती के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। गांव अमादलपुर स्थित प्राचीन एवं प्रसिद्ध सूर्य कुंड मंदिर में चल रहे श्री महाचंडी महायज्ञ में श्रद्धालुओं का पहुंचना निरंतर जारी है। मंदिर महंत त्रियंबकेश्वर महाराज ने बताया कि सोमवार तक महायज्ञ में मां भगवती की 60 लाख आहुतियां दी जा चुकी हैं। संपूर्ण भारत से आए 300 साधु संतों एवं ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ में आहुतियां दी जा रही हैं।
उन्होंने बताया 14 अक्तूूबर तक चलने वाले इस महायज्ञ में दूर-दूर से धर्म प्रेमी शिरकत कर रहे हैं। इस महायज्ञ में एक करोड़ से अधिक आहुतियां डाली जाएंगी। उन्होंने बताया कि महायज्ञ से संपूर्ण मानव जाति को लाभ मिलेगा। जिले में 22 वर्षों के बाद हो रहे इस महायज्ञ में दूर दराज से श्रद्धालु पहुंचकर आशीर्वाद ले रहे हैं। महंत ने बताया कि प्रतिदिन यज्ञ के बाद महा आरती में शामिल होने वाले धर्म प्रेमियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। महाआरती काशी से आए ब्राह्मणों की ओर से वैदिक विधि विधान से करवाई जाती है। वहीं इसके उपलक्ष्य में मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा करवाई जा रही है।
कथा में पांचवें दिन सोमवार को दस वर्षीय कथावाचक सुखदेव ऋषभदेव ने बताया कि धरती पर कंस के अत्याचार बढ़ रहा था। धरती पापों से कराह रही थी। तब कन्हैया का अवतार हुआ। अत्याचारी को मारने के लिए भगवान ने बालपन में ही पूतना राक्षसी का नाश किया। भगवान कृष्ण को मारने के लिए तमाम तरह के प्रयोग किए, लेकिन भगवान तो सभी की महिमा जानते हैं। तीनों लोकों के स्वामी श्रीकृष्ण का अवतार लेकर गोपियों के साथ नृत्य किया।
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उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। भगवान भक्तों को सब कुछ देते हैं, लेकिन भक्त भगवान को श्रद्धा एवं भक्ति भाव दे सकता है। भक्ति की भव्यता को समझने की शक्ति श्रीमद्भागवत से मिलती है। भागवत दया, प्रेम एवं भक्ति का सागर है। उन्होंने कहा कि अपने आराध्य के प्रति समर्पण व परम अनुरक्ति भक्ति है। भागवत कथा के बाद मंदिर महंत त्रियंबकेश्वर महाराज एवं महंत आचार्य डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य महाराज ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। इस दौरान राम प्रकाश गोयल, सुशील गोयल, हरिदास राठी, शिवकुमार चांडक, गोपाल, सतीश, विशाल सहित अन्य उपस्थित रहे।
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यमुनानगर। गांव अमादलपुर स्थित प्राचीन एवं प्रसिद्ध सूर्य कुंड मंदिर में चल रहे श्री महाचंडी महायज्ञ में श्रद्धालुओं का पहुंचना निरंतर जारी है। मंदिर महंत त्रियंबकेश्वर महाराज ने बताया कि सोमवार तक महायज्ञ में मां भगवती की 60 लाख आहुतियां दी जा चुकी हैं। संपूर्ण भारत से आए 300 साधु संतों एवं ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ में आहुतियां दी जा रही हैं।
उन्होंने बताया 14 अक्तूूबर तक चलने वाले इस महायज्ञ में दूर-दूर से धर्म प्रेमी शिरकत कर रहे हैं। इस महायज्ञ में एक करोड़ से अधिक आहुतियां डाली जाएंगी। उन्होंने बताया कि महायज्ञ से संपूर्ण मानव जाति को लाभ मिलेगा। जिले में 22 वर्षों के बाद हो रहे इस महायज्ञ में दूर दराज से श्रद्धालु पहुंचकर आशीर्वाद ले रहे हैं। महंत ने बताया कि प्रतिदिन यज्ञ के बाद महा आरती में शामिल होने वाले धर्म प्रेमियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। महाआरती काशी से आए ब्राह्मणों की ओर से वैदिक विधि विधान से करवाई जाती है। वहीं इसके उपलक्ष्य में मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा करवाई जा रही है।
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कथा में पांचवें दिन सोमवार को दस वर्षीय कथावाचक सुखदेव ऋषभदेव ने बताया कि धरती पर कंस के अत्याचार बढ़ रहा था। धरती पापों से कराह रही थी। तब कन्हैया का अवतार हुआ। अत्याचारी को मारने के लिए भगवान ने बालपन में ही पूतना राक्षसी का नाश किया। भगवान कृष्ण को मारने के लिए तमाम तरह के प्रयोग किए, लेकिन भगवान तो सभी की महिमा जानते हैं। तीनों लोकों के स्वामी श्रीकृष्ण का अवतार लेकर गोपियों के साथ नृत्य किया।
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उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। भगवान भक्तों को सब कुछ देते हैं, लेकिन भक्त भगवान को श्रद्धा एवं भक्ति भाव दे सकता है। भक्ति की भव्यता को समझने की शक्ति श्रीमद्भागवत से मिलती है। भागवत दया, प्रेम एवं भक्ति का सागर है। उन्होंने कहा कि अपने आराध्य के प्रति समर्पण व परम अनुरक्ति भक्ति है। भागवत कथा के बाद मंदिर महंत त्रियंबकेश्वर महाराज एवं महंत आचार्य डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य महाराज ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। इस दौरान राम प्रकाश गोयल, सुशील गोयल, हरिदास राठी, शिवकुमार चांडक, गोपाल, सतीश, विशाल सहित अन्य उपस्थित रहे।