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Yamuna Nagar News: यहां स्नान से ऋण और दोष से मिलती है मुक्ति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Nov 2023 02:35 AM IST
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By bathing here one gets freedom from debt and vices.
फोटो: 37
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यमुनानगर। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र की तरह कपालमोचन भी गुरुओं, संतों व महापुरुषों की धरती है। कुरुक्षेत्र में कौरवों को युद्ध में पांडवों ने परास्त किया था, वहीं पांडवों ने कपालमोचन में अस्त्र, शस्त्र धोए थे। मान्यता है कि पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने ऋणमोचन सरोवर में स्नान किया था। इसके अलावा त्रेता युग में रावण का वध करने के बाद श्रीराम ने कपालमोचन तीर्थ में स्नान कर ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाई थी। इसके बावजूद कुरुक्षेत्र की तर्ज पर कपालमोचन को ख्याति नहीं मिल पाई है।
कुरुक्षेत्र के मेले में देश के कई राष्ट्रपति पहुंच चुके हैं। इसके विपरीत कपालमोचन मेला केवल अंबाला कमिश्नरी तक सिमट कर रह गया है। हर साल अंबाला कमिश्नर से उद्घाटन करवा कर मेले की रस्म अदा करवा ली जाती है। मेले के भविष्य को लेकर जिला प्रशासन भी कोई ठोस योजना नहीं बना पाया। यही कारण है कि कपालमोचन मेले का आयोजन आज भी कई दशक पुराने तरीके ही चल रहा है। पहले मेला सड़कों किनारे लगता था जो करीब 15 साल से चार सेक्टर में बांट कर लगाया जा रहा है। मेले के आयोजन में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
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पंजाब से पहुंचते हैं अधिक श्रद्धालुपंजाब से कपालमोचन में अधिक श्रद्धालु इसलिए आ रहे हैं क्योंकि उनका सीधा जुड़ाव यहां गुरुद्वारा पहली व दसवीं पातशाही से है।
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धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से विस्तार की हैं अपार संभावनाएं जिला प्रशासन की तरफ से कपालमोचन में केवल गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर साल में एक बार ही आयोजन होता है। इसके बाद पूरा साल प्रशासन का ध्यान कपालमोचन की तरफ नहीं जाता। यदि सालभर यहां कोई न कोई आयोजन होते रहें तो यहां न केवल धार्मिक, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत काम हो सकता है। गुरु रविदास जयंती पर फरवरी माह में भी कपालमोचन में जिलास्तरीय कार्यक्रम होता है, जिसमें एक ही दिन में डेढ़ से दो लाख से अधिक लोग पहुंचते हैं। सरोवरों में सारा साल पानी भरा रहे तो सोमवती अमावस्या, सूर्यग्रहण के समय भी यहां हजारों लोग आ सकते हैं। सरोवरों में टिकट पर बोटिंग शुरू की जा सकती है, जिससे प्रशासन को राजस्व भी प्राप्त होगा।
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