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अवगुणों का त्याग से होगी प्रभु की प्राप्ति : मदन
Wed, 13 Nov 2024 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 13 Nov 2024 01:19 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। व्यक्ति सांसारिकता में लिप्त रहकर प्रभु को प्राप्त करना चाहता है। जबकि प्रभु प्राप्ति के लिए मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, माया, हिंसा, घृणा इत्यादि अवगुणों का त्याग करना होगा। परंतु मनुष्य इन गुणों के साथ संपन्न रहकर भक्ति करता और फिर कहता है कि प्रभु मिलते नहीं हैं। यह पंक्तियां श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य मदन शास्त्री ने कहीं।
वे ग्रीन पार्क में चल रही कथा के तीसरे दिन प्रवचन कर रहे थे। इस दौरान श्रद्धालुओं को आचार्य मदन शास्त्री ने जीवन-मृत्यु व निष्काम भाव भक्ति का महत्व बताया। आचार्य मदन शास्त्री ने कहा कि भागवत मनुष्यों को उसके कर्तव्यों व धर्म का बोध करवाता है। परंतु विडंबना यह है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत और अपनी काया को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत ने बताया कि कर्म ऐसा करो जो निष्काम हो, वही सच्ची भक्ति है। श्रीमद्भागवत कथा जीवन के सत्य का ज्ञान करवाने के साथ ही धर्म और अधर्म के बीच के फर्क को बताती है। इस दौरान गायिका अनुप्रिया ने भजनों से प्रभु महिमा का गुणगान किया।
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जगाधरी। व्यक्ति सांसारिकता में लिप्त रहकर प्रभु को प्राप्त करना चाहता है। जबकि प्रभु प्राप्ति के लिए मनुष्य को काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, माया, हिंसा, घृणा इत्यादि अवगुणों का त्याग करना होगा। परंतु मनुष्य इन गुणों के साथ संपन्न रहकर भक्ति करता और फिर कहता है कि प्रभु मिलते नहीं हैं। यह पंक्तियां श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य मदन शास्त्री ने कहीं।
वे ग्रीन पार्क में चल रही कथा के तीसरे दिन प्रवचन कर रहे थे। इस दौरान श्रद्धालुओं को आचार्य मदन शास्त्री ने जीवन-मृत्यु व निष्काम भाव भक्ति का महत्व बताया। आचार्य मदन शास्त्री ने कहा कि भागवत मनुष्यों को उसके कर्तव्यों व धर्म का बोध करवाता है। परंतु विडंबना यह है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं।
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उन्होंने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत और अपनी काया को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत ने बताया कि कर्म ऐसा करो जो निष्काम हो, वही सच्ची भक्ति है। श्रीमद्भागवत कथा जीवन के सत्य का ज्ञान करवाने के साथ ही धर्म और अधर्म के बीच के फर्क को बताती है। इस दौरान गायिका अनुप्रिया ने भजनों से प्रभु महिमा का गुणगान किया।
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