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Yamuna Nagar News: खेतों में तीन जगह जलती मिली पराली
Tue, 05 Nov 2024 02:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 05 Nov 2024 02:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में कई दिनों के बाद पराली जलाने के तीन नए मामले सामने आए हैं। सेटेलाइट ने छछरौली में दो व बाल छप्पर गांव में एक जगह खेतों में पराली जलती हुई पकड़ी। हालांकि चार जगह पराली जलती हुई मिली लेकिन इनमें से एक केस ट्रेस नहीं हो पाया है। खेतों में पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने एसपी को पत्र लिखा है।
जिले के खेतों में पराली जलाने के अब तक कुल 34 केस मिल चुके हैं। इनमें से 20 जगह ही ट्रेस हो पाई ,जहां पर पराली जलती मिली। अब तक सात किसानों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। माना जा रहा है कि किसानों ने दिवाली पर्व का फायदा उठाते हुए खेतों में पराली में आग लगाई।
कृषि विभाग के एपीपीओ डॉ. सतीश अरोड़ा ने बताया कि पराली जलाने के तीन मामले सामने आए हैं। अब कुल मामले 34 हो चुके हैं। इनमें से 20 जगह ही पराली जलती मिली। एफआईआर के लिए एसपी को पत्र लिख दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र दामला के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने बताया कि खेतों में जल रहे फसल अवशेष जमीन को बंजर कर रहे हैं। एक टन धान की पराली जलाने से मिट्टी में 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन सल्फर 22 किलोग्राम, पोटाश 2.3 किलोग्राम व आर्गेनिक कार्बन 400 किलोग्राम पोषक तत्वों की हानि होती है।
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प्रदूषित कण शरीर के अंदर जाकर फेफड़ों में सूजन सहित इंफेक्शन का कारण बनते हैं। खांसी, अस्थमा, डाइबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष का प्रबंध करने पर सरकार द्वारा किसानों को सहायता राशि उपलब्ध करवाई जाती है। हरियाणा सरकार द्वारा 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि दी जाएगी। गत सीजन में करीब छह करोड़ रुपये जारी किए जा चुके है।
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यमुनानगर। जिले में कई दिनों के बाद पराली जलाने के तीन नए मामले सामने आए हैं। सेटेलाइट ने छछरौली में दो व बाल छप्पर गांव में एक जगह खेतों में पराली जलती हुई पकड़ी। हालांकि चार जगह पराली जलती हुई मिली लेकिन इनमें से एक केस ट्रेस नहीं हो पाया है। खेतों में पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने एसपी को पत्र लिखा है।
जिले के खेतों में पराली जलाने के अब तक कुल 34 केस मिल चुके हैं। इनमें से 20 जगह ही ट्रेस हो पाई ,जहां पर पराली जलती मिली। अब तक सात किसानों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। माना जा रहा है कि किसानों ने दिवाली पर्व का फायदा उठाते हुए खेतों में पराली में आग लगाई।
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कृषि विभाग के एपीपीओ डॉ. सतीश अरोड़ा ने बताया कि पराली जलाने के तीन मामले सामने आए हैं। अब कुल मामले 34 हो चुके हैं। इनमें से 20 जगह ही पराली जलती मिली। एफआईआर के लिए एसपी को पत्र लिख दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र दामला के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने बताया कि खेतों में जल रहे फसल अवशेष जमीन को बंजर कर रहे हैं। एक टन धान की पराली जलाने से मिट्टी में 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन सल्फर 22 किलोग्राम, पोटाश 2.3 किलोग्राम व आर्गेनिक कार्बन 400 किलोग्राम पोषक तत्वों की हानि होती है।
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प्रदूषित कण शरीर के अंदर जाकर फेफड़ों में सूजन सहित इंफेक्शन का कारण बनते हैं। खांसी, अस्थमा, डाइबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष का प्रबंध करने पर सरकार द्वारा किसानों को सहायता राशि उपलब्ध करवाई जाती है। हरियाणा सरकार द्वारा 1000 रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि दी जाएगी। गत सीजन में करीब छह करोड़ रुपये जारी किए जा चुके है।